Home›Paryavaran›
Wwf Global Conservation Conference In Jaipur Focuses On Community Led Wildlife Conservation
WWF ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस: भूपेंद्र यादव ने वन, घासभूमि और आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए समुदायों की भागीदार
गांव जंक्शन डेस्क, जयपुर
Published by: Umashankar Mishra
Updated Mon, 21 Sep 2026 06:38 PM IST
सार
जयपुर में WWF ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस में भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने संरक्षित क्षेत्रों, बाघ अभयारण्यों और रामसर साइटों के विस्तार की जानकारी दी। जानिए, विस्तार से...
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव।
- फोटो : सोशल मीडिया
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को जयपुर में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) की ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और संरक्षण विशेषज्ञ शामिल हुए। मंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व पर जोर दिया।
एक दशक में बढ़े संरक्षित क्षेत्र
भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या करीब 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है। इसी अवधि में बाघ अभयारण्यों की संख्या 47 से बढ़कर 58 और हाथी अभयारण्यों की संख्या 30 से बढ़कर 33 हुई है। उन्होंने बताया कि रामसर साइटों की संख्या भी 24 से बढ़कर 101 हो गई है। ये ऐसे आर्द्र क्षेत्र हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड के रूप में मान्यता मिली है।
वैज्ञानिक निगरानी से संरक्षण को मदद
मंत्री ने वन्यजीवों की संख्या और स्थिति पर देशभर में होने वाले वैज्ञानिक आकलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाघ, हाथी, डॉल्फिन, शेर और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों की आबादी के आकलन से उनके आवास, वन्यजीव गलियारों और बड़े स्तर पर संरक्षण की योजना बनाने में मदद मिलती है। उन्होंने भारत के चीता पुनर्वास कार्यक्रम का भी उल्लेख किया और कहा कि बाघ, हाथी, गैंडा और एशियाई शेर जैसी प्रजातियों के संरक्षण में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
राजस्थान के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण का जिक्र
भूपेंद्र यादव ने राजस्थान में गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने पारंपरिक पवित्र वन क्षेत्रों यानी ओरान के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
सिर्फ जंगल नहीं, घासभूमि और आर्द्रभूमि भी जरूरी
मंत्री ने कहा कि संरक्षण का दायरा केवल जंगलों तक सीमित नहीं होना चाहिए। घासभूमि और आर्द्रभूमि का संरक्षण भी जरूरी है। उन्होंने एक सींग वाले गैंडे और जंगली भैंसे जैसी घासभूमि पर निर्भर बड़ी शाकाहारी प्रजातियों के संरक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दुनिया भर के संरक्षण विशेषज्ञों से सफल संरक्षण मॉडलों से सीख लेकर उन्हें जमीन पर लागू करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।