Home›Paryavaran›
Some Industrious Methane Mitigating Microbes Could Reduce The Effects Of Global Warming
CLIMATE CHANGE: ग्लोबल वार्मिंग के असर को कम कर सकते हैं मीथेन का शमन करने वाले कुछ मेहनती सूक्ष्मजीव
डॉ. निमिष कपूर, विज्ञान संचार विशेषज्ञ
Published by: Umashankar Mishra
Updated Mon, 14 Apr 2025 02:26 PM IST
सार
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत मीथेन का शमन करने वाले उन सूक्ष्मजीवों पर भरोसा कर सकता है, जो धान के खेतों और आर्द्रभूमियों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। ये मेहनती सूक्ष्मजीव ग्लोबल वार्मिंग के असर को कम करने में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कुछ ऐसे मेहनती सूक्ष्मजीव भी हैं, जो मीथेन को समाप्त करने में अपना काम बखूबी कर रहे हैं।
- फोटो : गांव जंक्शन
वर्ष 2024 जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर एक बड़ी चेतावनी साबित हुआ, यहां तक कि वे लोग जिन्होंने इससे पहले इसकी गंभीरता को नकारा था, उनके लिए भी यह एक आंखें खोलने वाला साल था। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह संकट और भी गंभीर है, जहां मौसम के उतार-चढ़ाव ने न केवल जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित किया।
जलवायु से जंग लड़ते सूक्ष्मजीव
आर्द्रभूमियां, जुगाली करने वाले पशु, धान के खेत और लैंडफिल जैसे स्थान मीथेन के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। धान के खेतों में मीथेन का उत्सर्जन मुख्यतः जलभराव की स्थिति में होता है, क्योंकि इस वातावरण में मिट्टी में सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों का विघटन होता है, जिससे प्राकृतिक रूप से मीथेन गैस का उत्पादन होता है। हालांकि, कुछ ऐसे मेहनती सूक्ष्मजीव भी हैं, जो मीथेन को समाप्त करने में अपना काम बखूबी कर रहे हैं। धान के खेतों और आर्द्रभूमियों में मीथेन का शमन करने वाले सूक्ष्मजीवों का विकास जलवायु चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। यह मीथेनोट्रॉफ बैक्टीरिया की गतिविधियों के कारण ही है कि पिछले कुछ वर्षों में वायुमंडलीय मीथेन के स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हुई।
मीथेन का शमन करने वाले ऐसे बैक्टीरिया को मिथेनोट्रॉफ कहते हैं, जो मीथेन गैस को कम करने में मदद कर सकते हैं। डॉ. मोनाली राहलकर के नेतृत्व में, आघारकर अनुसंधान संस्थान, पुणे के वैज्ञानिकों ने ऐसे ही बैक्टीरिया की खोज की है। बैक्टीरिया की इस प्रजाति का नाम मिथाइलोकुकुमिस ओरिजे रखा गया है। इस सूक्ष्मजीव को मीथेन को खाने वाले खीरे के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसका आकार खीरे जैसा होता है। शोधकर्ताओं ने इसकी तीन किस्मों का उल्लेख किया है। इस बैक्टीरिया की दो किस्में जलमग्न धान के खेतों और तीसरी किस्म को हाल ही में पुणे के वेताल टेकड़ी क्षेत्र की पत्थर की खदान में पाया गया है। ये तीनों स्थान पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र में स्थित हैं।
कैसे काम करते हैं सूक्ष्मजीव?
मीथेन का शमन करने वाले बैक्टीरिया की खोज पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ये बैक्टीरिया मीथेन गैस को ऑक्सीजन के साथ मिलाकर वातावरण से हटा देते हैं, जिससे ग्लोबल वार्मिंग पर काबू पाया जा सकता है। मीथेन पैदा करने वाले बैक्टीरिया के क्रियाकलापों से यह हानिकारक गैस पैदा होती है। दूसरी ओर, मीथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया मीथेन को ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्सीकृत करते हैं, जिससे उनका बायोमास बनता है और गैस के स्थान पर कार्बन डाईऑक्साइड और पानी का उत्सर्जन होता है। मीथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया मीथेन का शमन करने वाले उपयोगी प्राकृतिक एजेंट हैं और ये उन सभी वातावरणों में मौजूद रहते हैं, जहां मीथेन और ऑक्सीजन दोनों पाए जाते हैं। आर्द्रभूमि, धान के खेत, तालाब और अन्य जलीय निकाय कुछ ऐसे ही स्थान हैं, जहां मीथेन का शमन करने वाले बैक्टीरिया बहुतायत में पाए जाते हैं।
बैक्टीरिया की खूबियां
आघारकर अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया की इस प्रजाति के अध्ययन में छह वर्ष लगाए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि मिथाइलोकुकुमिस ओरिजे मिथेनोट्रॉफ बैक्टीरिया की कोई भी प्रजाति किसी अन्य देश से रिपोर्ट नहीं की गई है। इसका आकार अन्य बैक्टीरिया की तुलना में काफी बड़ा है। इस प्रजाति की एक और विशेषता है कि यह बैक्टीरिया केवल 37 डिग्री सेल्सियस तापमान तक ही बढ़ सकता है, जबकि अधिकांश अन्य मीथेनोट्रॉफ्स 40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकते हैं।
पुणे के खेतों में इस बैक्टीरिया का प्रयोग करने पर पाया गया कि यह धान के पौधों में जल्दी फूलने और उच्च उपज को बढ़ावा देने में सहायक है। प्रयोगों में यह भी देखा गया कि इस बैक्टीरिया ने धान की इंद्रायणी किस्म में 31% अधिक उपज प्राप्त करने में मदद की और पौधों में लगभग 17 दिन पहले फूल आने की प्रक्रिया को तेज कर दिया। इस प्रकार, यह मिथेनोट्रॉफ बैक्टीरीया न केवल पर्यावरणीय समाधान है, बल्कि यह कृषि उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
बैक्टीरिया का औद्योगिक उपयोग
शोध के अनुसार, ये बैक्टीरिया मीथेन के वायुमंडल में उत्सर्जन को 10-60% तक कम कर सकते हैं, जिससे वैश्विक तापमान वृद्धि पर काबू पाया जा सकता है। इस बैक्टीरिया का उपयोग मीथेन के उत्सर्जन को कम करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और औद्योगिक एप्लीकेशन्स में किया जा सकता है। यह बैक्टीरिया कैरोटीनॉयड जैसे जैविक यौगिकों का उत्पादन करता है, जो खाद्य उद्योग में रंग देने और अन्य उपयोगों में मूल्यवान हो सकते हैं। इसके अलावा, रासायनिक प्रक्रियाओं में अधिक लागत और हानिकारक सह-उत्पादों के कारण, यह बैक्टीरिया एक स्थायी और आर्थिक विकल्प के रूप में भूमिका निभा सकता है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में 274 दिन ऐसे थे, जब देश के किसी न किसी हिस्से में चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल रही थीं। यह आंकड़ा वर्ष 2023 और 2022 की तुलना में ज्यादा था, जब क्रमशः 235 और 241 दिन ऐसी घटनाओं के गवाह बने थे। यह आंकड़ा पर्यावरण के संकट को उजागर करने के साथ दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में भी तापमान और ग्रीष्म लहरों में कमी नहीं आने वाली। फरवरी 2025 में रिकॉर्ड उच्च तापमान ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि इस साल भी स्थिति विकट हो सकती है। ऐसे में, हमें अपने पर्यावरणीय प्रबंधन और जलवायु नीति में तात्कालिक और निर्णायक बदलाव की आवश्यकता है।
मीथेन उत्सर्जन के प्रमुख स्रोत
कार्बन डाईऑक्साइड के बाद मीथेन मानव-निर्मित ग्रीनहाउस गैसों में दूसरे स्थान पर है। यह वैश्विक स्तर पर जहरीली गैसों (ग्रीनहाउस गैसों) के उत्सर्जन में लगभग 20% योगदान देती है। मीथेन इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि यह कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में 26 गुना अधिक ग्लोबल वार्मिंग की क्षमता रखती है। भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के तहत शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने और वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए मीथेन उत्सर्जन को कम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कुल वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में लगभग 10 फीसदी हिस्से के लिए धान की खेती को जिम्मेदार ठहराया जाता है। विश्व संसाधन संस्थान के अनुसार, वर्ष 2010 और 2050 के बीच कृषि में मीथेन उत्सर्जन के स्रोत 38% तक बढ़ जाएंगे। जबकि, खाद्य और कृषि संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2050 तक कृषि में मीथेन उत्सर्जन लगभग 200 मिलियन टन बढ़ सकता है। धान उत्पादन करने वाले एशियाई देशों में उपयुक्त प्रबंधन की कमी के कारण मीथेन के स्तर का लगातार ऊपर जाना चिंताजनक है।
स्टेटिस्टा डाटा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत के कृषि क्षेत्र ने 2 करोड़ मीट्रिक टन मीथेन वायुमंडल में छोड़ा। यह उस वर्ष भारत के कुल मीथेन उत्सर्जन का लगभग 70 प्रतिशत था। भारत में धान के खेतों से हर साल लगभग 33 लाख टन मीथेन का उत्सर्जन होता है, जो देश के कुल मीथेन उत्सर्जन का लगभग 10% है।
मीथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया की मीथेन शमन की क्षमता और कृषि में सकारात्मक प्रभाव इसे जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपयोगी बनाते हैं। आगे इस बैक्टीरिया के संवर्धन (कल्चर) की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता होगी, ताकि बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके। प्राकृतिक मीथेन शमनकर्ता बैक्टीरिया न केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकते हैं, बल्कि कृषि उत्पादकता को भी बढ़ा सकते हैं। इन फायदों को देखते हुए, भारत सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मीथेन निगरानी और शमन प्रौद्योगिकियों पर अनुप्रयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को वित्तीय सहायता दे रहा है। अब समय आ गया है कि हम जलवायु परिवर्तन के खतरों से अपने खेतों और गांवों को बचाएं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्थिर पर्यावरण सुनिश्चित करें।
चुनौतियां भी हैं!
अपनी खूबियों के साथ-साथ इस बैक्टीरिया के उपयोग में कुछ चुनौतियां भी हैं। मिथेनोट्रॉफ बैक्टीरिया का विकास धीमा होता है। इसे शुद्ध रूप में पृथक करना भी कठिन है। इसके अलावा, इसे सुरक्षित और नियंत्रित पर्यावरण में ही विकसित कर सकते हैं, क्योंकि यह बैक्टीरिया अन्य बैक्टीरिया के साथ मिलकर दूषण का शिकार हो सकता है। भविष्य में इसके संवर्धन और विकास के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि इसके कृषि व औद्योगिक उपयोग को व्यावसायिक स्तर पर लागू किया जा सके।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।