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Karnataka Takes Up Special Discussion On Kasturirangan Report And Drought
कर्नाटक: विधानसभा में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विशेष चर्चा, पश्चिमी घाट के गांवों पर असर ने बढ़ाई चिंता
गांव जंक्शन डेस्क, बेंगलुरु
Published by: Umashankar Mishra
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:26 PM IST
सार
कर्नाटक विधानसभा में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, पश्चिमी घाट के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र और सूखे पर विशेष चर्चा हो रही है। वहीं, श्रींगेरी में किसानों और स्थानीय संगठनों ने रिपोर्ट के विरोध में बंद रखा। जानिए, विस्तार से...
कर्नाटक में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट के बड़े हिस्से को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने के प्रस्ताव पर लंबे समय से चर्चा चल रही है।
- फोटो : सोशल मीडिया
कर्नाटक सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि विधानसभा की तीन दिन की बैठक को अलग से ‘विशेष सत्र’ कहना सही नहीं था। इसे चल रहे मानसून सत्र के हिस्से के रूप में ‘विशेष चर्चा’ माना जाएगा। इस दौरान कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, पश्चिमी घाट और राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति पर चर्चा हो रही है।
सरकार ने शब्दावली पर दी सफाई
कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने विधानसभा में कहा कि सदन को अलग विशेष सत्र के लिए नहीं बुलाया गया था। यह मानसून सत्र की ही आगे की बैठक है। यह सफाई विपक्ष की ओर से बैठक को ‘विशेष सत्र’ कहे जाने पर उठाई गई आपत्ति के बाद आई। सरकार ने कहा कि बैठक का उद्देश्य लंबित जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना है।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर सरकार और स्थानीय लोगों की चिंताएं
कर्नाटक में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट के बड़े हिस्से को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने के प्रस्ताव पर लंबे समय से चर्चा चल रही है।
केंद्र के 27 जुलाई 2026 के सातवें मसौदा नोटिफिकेशन में छह राज्यों में करीब 56,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ESA के तहत लाने का प्रस्ताव है। कर्नाटक में करीब 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 33 तालुकों और 10 जिलों के 1,576 गांवों को प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल किया गया है।
राज्य सरकार ने इस मसौदे पर स्थानीय लोगों और किसानों की राय लेने की बात कही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से उनकी राय लेने पर जोर दिया है।
श्रींगेरी में किसानों और स्थानीय संगठनों का बंद
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के विरोध में चिक्कमगलुरु जिले के श्रींगेरी में सोमवार को किसानों और स्थानीय संगठनों ने बंद रखा। सुबह छह बजे शुरू हुआ बंद शाम छह बजे तक चलने की बात कही गई।
पुलिस के मुताबिक स्थिति शांतिपूर्ण रही। ज्यादातर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि मेडिकल स्टोर और दूध की दुकानों जैसी जरूरी सेवाएं खुली रहीं। कुछ स्कूलों और कॉलेजों ने भी छुट्टी घोषित की।
किसानों ने आजीविका और विकास को लेकर उठाए सवाल
बंद में शामिल किसानों और स्थानीय संगठनों ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर ESA लागू करने का विरोध किया। उनका कहना है कि प्रस्तावित पर्यावरणीय प्रतिबंधों का असर खेती, स्थानीय लोगों की आजीविका और क्षेत्र के भविष्य के विकास पर पड़ सकता है।
यह राज्य में रिपोर्ट को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। कर्नाटक सरकार ने कहा है कि अंतिम रुख तय करने से पहले प्रभावित लोगों और अन्य पक्षों की राय पर विचार किया जाएगा।
124 तालुक सूखाग्रस्त घोषित
विधानसभा की चर्चा का दूसरा बड़ा मुद्दा सूखा है। राज्य सरकार के मुताबिक अब तक 124 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है और अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति का आकलन जारी है। चर्चा में किसानों की फसल, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता, पशुधन और सूखे से प्रभावित लोगों को राहत जैसे मुद्दे भी उठाए जाने हैं।
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