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हरियाणा: गांवों के विकास पर खर्च होगी बड़ी रकम; सिंचाई, सड़क और पानी पर हरियाणा का ₹2,295 करोड़ का प्लान

गांव जंक्शन डेस्क, चंडीगढ़ Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 21 Sep 2026 07:39 PM IST
सार

हरियाणा सरकार ने सिंचाई, सड़क, पेयजल और भंडारण से जुड़ी ग्रामीण परियोजनाओं के लिए ₹2,295 करोड़ का प्लान तैयार किया है। इसमें ₹2,180.50 करोड़ नाबार्ड के RIDF से प्रस्तावित हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी - फोटो : AI Image
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हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने गांवों में सिंचाई, सड़क, पीने के पानी और भंडारण जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ₹2,295.27 करोड़ की परियोजनाएं तैयार की हैं। इनमें से ₹2,180.50 करोड़ की राशि नाबार्ड के ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (RIDF) से कर्ज के रूप में लेने का प्रस्ताव है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को नाबार्ड की मदद से चल रही ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से चल रहे कामों में तेजी लाने और समय पर कर्ज की राशि के लिए दावे जमा करने को कहा।

सिंचाई और 57 सड़कों पर होगा निवेश
राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए छह प्रमुख प्रस्तावों को प्राथमिकता दी है। इनमें सिंचाई, पेयजल, सड़क और वेयरहाउसिंग से जुड़े काम शामिल हैं। सिंचाई से जुड़े एक प्रस्ताव की कुल लागत ₹315.36 करोड़ है। इसके लिए RIDF से ₹299.59 करोड़ की सहायता प्रस्तावित है।

इसके अलावा 57 सड़क परियोजनाओं के लिए ₹495.71 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन सड़कों के सुधार, चौड़ीकरण और मजबूतीकरण पर यह राशि खर्च होगी। इनके लिए RIDF से ₹470.92 करोड़ की सहायता प्रस्तावित है। दोनों प्रस्ताव RIDF के वेब पोर्टल पर जमा किए जा चुके हैं।

नूंह और पलवल के पांच गांवों में पानी की योजना
ग्रामीण पेयजल से जुड़ी एक बड़ी परियोजना नूंह और पलवल जिलों के पांच महाग्राम गांवों - बिछोर, बिसरू, नई, सिंगार और पिंगवां के लिए है। इस परियोजना की कुल लागत ₹744.59 करोड़ है। इसके लिए RIDF से ₹707.36 करोड़ की सहायता प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य इन गांवों में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करना है।

गन्नौर के हॉर्टिकल्चर मार्केट पर भी नजर
बैठक में सोनीपत के गन्नौर स्थित इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट (IIHM) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। नाबार्ड ने इस परियोजना के लिए NIDA यानी NABARD Infrastructure Development Assistance के तहत ₹1,850 करोड़ का टर्म लोन मंजूर किया है। परियोजना के लिए 2025-26 से 2027-28 तक तीन साल की वित्तीय योजना बनाई गई है। वर्ष 2025-26 में ₹740 करोड़ जारी किए जाने थे, लेकिन इस दौरान ₹451 करोड़ ही जारी हुए। यानी ₹289 करोड़ की राशि अभी जारी होना बाकी है।

सूक्ष्म सिंचाई के लिए ₹264 करोड़ के प्रस्ताव
बैठक में माइक्रो इरिगेशन यानी सूक्ष्म सिंचाई की योजनाओं की भी समीक्षा हुई। संचालन समिति ने ₹264.24 करोड़ के ऋण घटक वाली चार नई परियोजनाओं की सिफारिश की है। ड्रिप और अन्य सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों से कम पानी में खेती करने में मदद मिलती है। ऐसे में राज्य की जल प्रबंधन योजनाओं में इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नाबार्ड से ₹2,300 करोड़ तक कर्ज की मंजूरी
बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हरियाणा को नाबार्ड से ₹2,300 करोड़ तक कर्ज लेने की अनुमति दी है। बैठक में सिंचाई, सड़क, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, शिक्षा, पशुपालन, कृषि विपणन और वेयरहाउसिंग समेत अलग-अलग विभागों की परियोजनाओं की प्रगति भी देखी गई।

जल सुरक्षा कार्यक्रम में ₹5,714 करोड़ का निवेश
बैठक में वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम को भी नाबार्ड की सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया गया। इस कार्यक्रम की कुल लागत करीब ₹5,714 करोड़ है। इसमें लगभग ₹4,000 करोड़ विश्व बैंक की सहायता और ₹1,714 करोड़ राज्य सरकार का हिस्सा है।

कार्यक्रम के तहत भूजल रिचार्ज, सिंचाई व्यवस्था में सुधार, पानी के बेहतर इस्तेमाल, तालाबों और जलधाराओं के पुनर्जीवन, सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने और उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल पर काम किया जाएगा। इससे राज्य में पानी की उपलब्धता और खेती में पानी के बेहतर इस्तेमाल के साथ बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर जोर रहेगा।
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