पराली जली तो तेज हुई सियासत: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उठाए सवाल, पंजाब ने बताया कैसे घटे मामले
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली/चंडीगढ़
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 06 Oct 2026 08:54 PM IST
सार
धान कटाई के इस दौर में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है। एक ओर दिल्ली प्रदूषण के लिहाज से पंजाब में पराली प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं पंजाब सरकार की ओर से मामलों में कमी और रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों का दावा किया जा रहा है।
पराली जलाने की घटनाओं को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब सरकार पर निशाना साधा।
- फोटो : Ai (सांकेतिक तस्वीर)
पंजाब के तरणतारन में पराली जलाने की घटनाओं के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के विधायक अजय गुप्ता ने दावा किया है कि 2022 के बाद राज्य में पराली जलाने के मामले करीब एक-तिहाई रह गए हैं।
दिल्ली CM ने पंजाब सरकार पर उठाए सवाल
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रमुख अरविंद केजरीवाल के उस पुराने वादे का जिक्र किया, जिसमें एक साल में पंजाब में पराली जलाना रोकने की बात कही गई थी।
रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से पराली प्रबंधन के लिए फंड, मशीनें और सब्सिडी उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पंजाब में जमीन पर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। उन्होंने किसानों को पराली जलाने की मजबूरी से बाहर निकालने के लिए बेहतर व्यवस्था की जरूरत बताई।
15 सितंबर से बढ़ती है पराली की निगरानी
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच छह राज्यों में पराली जलाने की 254 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें पंजाब में 84, हरियाणा में चार, उत्तर प्रदेश में 63, दिल्ली में एक, राजस्थान में सात, उत्तराखंड में एक और मध्य प्रदेश में 94 घटनाएं शामिल हैं। धान की कटाई के साथ पराली जलाने की घटनाओं पर इस अवधि में खास निगरानी रखी जाती है।
पंजाब सरकार का दावा, मामले हुए कम
आम आदमी पार्टी के विधायक अजय गुप्ता ने दावा किया कि 2022 में सरकार बनने के बाद पंजाब में पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई है। उनके मुताबिक अब घटनाएं पहले के मुकाबले करीब एक-तिहाई रह गई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को जागरूक करने, प्रशिक्षण देने और सब्सिडी वाली पराली प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। जिला प्रशासन, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कृषि विभाग और सहकारी समितियां भी इस काम में जुटी हैं।
पराली से बेल और पेलेट बनाने पर जोर
अजय गुप्ता के मुताबिक किसानों को पराली से बेल और पेलेट बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनका इस्तेमाल चीनी मिलों और ईंट-भट्ठों जैसे उद्योगों में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है।
इसके अलावा इन-सिटू पराली प्रबंधन मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन मशीनों की मदद से पराली को जलाने के बजाय खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है। गुप्ता के मुताबिक इससे मिट्टी की उर्वरता में मदद मिलती है और पराली में मौजूद नाइट्रोजन व फास्फोरस जैसे पोषक तत्व अगली फसल के लिए मिट्टी में बने रहते हैं।
कार्रवाई से पहले किसानों को सुविधा देने की बात
पराली जलाने पर नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, अजय गुप्ता ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें जागरूक करना और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पंजाब-हरियाणा में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात
पराली जलाने की रोकथाम के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने भी पंजाब और हरियाणा में निगरानी बढ़ाई है। पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं।
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