Home›Misal Bemisal›Vishesh›
World Economic Forum Wef Deep Tech Ai Robotics Nanotech Crispr Satellite Remote Sensing
WEF में चमका भारत का AGRITECH : चावल की लचीली किस्में, PMFBY में रिमोट सेंसिंग, गन्ने की सटीक खेती बनी मिसाल
डॉ उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 12 Nov 2025 08:15 PM IST
सार
नई कृषि तकनीकें (Agritech) भारत के किसानों का बड़ा सहारा बन रही हैं। कृषि क्षेत्र में भारत के उभरते तकनीकी नवोन्मेष खेती-बाड़ी को जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार कर रहे हैं। पूरी दुनिया खेती में भारत के इन तकनीकी अनुभवों से न केवल सबक ले रही है, बल्कि विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) जैसे अंतरराष्ट्रीय फोरम पर भी इसकी मिसाल दी जा रही है।
खेती में भारत के तकनीकी प्रयोग दुनिया के लिए बने मिसाल।
- फोटो : डब्ल्यूईएफ
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक, वर्ष 2050 तक दुनिया की बढ़ती आबादी को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बहुत ज्यादा खाद्य उत्पादन करना होगा। दुनिया की एक-तिहाई खराब हो चुकी मिट्टी के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करना आसान नहीं होगा। 71 फीसदी सूखते जलस्रोतों और किसानों की औसत उम्र सिर्फ 60 साल के करीब सिमटने के साथ इस चुनौती से पार पाना आसान नहीं होगा। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कृषि क्षेत्र से जुड़ी इन मुश्किलों को आसान बना रहा है, जिसकी तारीफ विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) भी कर रहा है।
इन सात उभरती तकनीकों से बदल रही खेती
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) ने भारत के कृषि क्षेत्र तकनीकी हस्तक्षेप को लेकर कहा है कि जेनरेटिव एआई, रोबोटिक्स, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग जैसी सात उभरती डीप टेक्नोलॉजी भारतीय कृषि को पूरी तरह बदल देंगी। इन तकनीकों में कंप्यूटर विज़न, एज IoT, क्रिस्पर और नैनो-टेक्नोलॉजी भी शामिल हैं। ये तकनीकें फसलों की पैदावार बढ़ाएंगी, फसलों को मजबूत बनाएंगी और ग्रामीण आजीविका को संकटों से बचाएंगी।
लोकल नैनो इनपुट्स से लचीलापन बढ़ाने, सैटेलाइट से कार्बन मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग एवं वेरिफिकेशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जेनरेटिव एआई और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने से जुड़े प्रयासों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
उद्योग जगत और अकादमिक क्षेत्र की साझेदारी में तैयार की गई विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट - 'शेपिंग द डीप-टेक रेवोल्यूशन इन एग्रीकल्चर' - में ये बातें कही गई हैं। यह रिपोर्ट WEF के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर एग्रीकल्चर इनिशिएटिव (AI4AI) द्वारा जारी की गई है। बता दें कि वर्ष 2021 से AI4AI ने भारत में 8.95 लाख से ज्यादा किसानों को डिजिटल तकनीकें मुहैया कराई हैं। कृषि में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने वाली यह पहल सरकार, प्राइवेट सेक्टर, अकादमिक क्षेत्र, स्टार्टअप्स और सिविल सोसाइटी के बीच बहुपक्षीय पार्टनरशिप पर आधारित है।
रिमोट सेंसिंग से रोबोटिक्स और जेनरेटिव एआई तक
WEF ने बताया कि अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान से कई बागवानी फसलों में 65 फीसदी तक नुकसान हो चुका है। पुरानी फसल सुधार विधियां लंबी और कम सटीक होती थीं, जिससे जलवायु और बीमारियों से निपटने वाली किस्में धीमी गति से तैयार हो पाती थीं। लेकिन, अब इस तस्वीर में बदलाव हो रहा है।
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) ने कहा है कि जेनरेटिव एआई, रोबोटिक्स, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग जैसी सात उभरती डीप टेक्नोलॉजी फसल उगाने से लेकर उसकनी निगरानी, फसलों की सुरक्षा और वितरण के तरीके को पूरी तरह बदल देंगी, जिससे उत्पादकता, टिकाऊपन और लचीलापन बढ़ेगा।
रिपोर्ट में, इन तकनीकों को मिलाकर हाई-इम्पैक्ट इस्तेमाल बताए गए हैं, जैसे - ऑटोनॉमस स्वार्म रोबोटिक्स, प्रिसिजन फार्म मैनेजमेंट, एजेंटिक एआई सिस्टम और कार्बन रिपोर्टिंग।
भारत के तकनीकी प्रयोग दुनिया के लिए बने सबक
खेती-बाड़ी में स्मार्ट तकनीक के उपयोग से जुड़ी भारत की कई केस स्टडीज का रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, जिनमें से कुछ के बारे में यहां बताया जा रहा है:
(1) भारत की जलवायु-सहिष्णु चावल की किस्में
भारत ने जलवायु-सहिष्णु चावल की ऐसी किस्में लॉन्च की हैं, जो 20 फीसदी कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करती हैं। ICAR ने CRISPR जीन एडिटिंग से चावल की ऐसी दो किस्में बनाई हैं। चावल की पहली किस्म - DRR 100 है, जो सूखा, लवणता और जलवायु तनाव सहने में सक्षम है, यह 19 फीसदी पैदावार बढ़ाती है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 20 फीसदी कम करती है। आईसीएआर द्वारा विकसित जलवायु सहिष्णु चावल की दूसरी किस्म - डीएसटी चावल-1 है, जो लवणीय और क्षारीय मिट्टी में 9.66 से 30.4 फीसदी तक पैदावार बढ़ाने के साथ ही कुल उत्पादन 20 फीसदी तक बढ़ा सकती है।
(2) गन्ने की सटीक खेती से 40% बढ़ी पैदावार
गन्ने में प्रिसिजन एग्रीकल्चर से भी भारत ने मिसाल कायम की है और 40 फीसदी पैदावार बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है।
(3) रिमोट सेंसिंग से सप्लाई चेन रिस्क का अनुमान
रिमोट सेंसिंग से सप्लाई चेन रिस्क का अनुमान लगाकर किसानों को कार्बन फाइनेंस मिल रहा है।
(4) PMFBY में रिमोट सेंसिंग का कमाल
एक अन्य केस स्टडी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में रिमोट सेंसिंग के उपयोग से जुड़ी है। पहले फसल नुकसान का आकलन मैनुअल क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट पद्धति से होता था। फसल के नुकसान के आकलन की यह तकनीक धीमी होती थी, जिसमें गलती होने के साथ पारदर्शिता की कमी भी होती थी। इससे दावों के निपटान में देरी और विवाद होते थे।
PMFBY ने सैटेलाइट इमेजरी से फसल के स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग शुरू की है और हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन व जियो-टैग्ड मोबाइल एप से रीयल-टाइम डेटा जोड़कर आकलन शुरू किया है। WEF ने कहा कि इससे दावों का निपटान तेज और सटीक तरीके से हो रहा है, किसानों को जरूरत के वक्त पैसा मिलता है, सैटेलाइट डेटा से पारदर्शिता बढ़ती है और सरकार-बीमा कंपनियां रिस्क बेहतर मैनेज कर पाती हैं।
(5) 'भाषिणी' से कम हो रही हैं भाषाई बाधाएं
भारत के नेशनल लैंग्वेज ट्रांसलेशन मिशन के तहत लॉन्च किया गया 'भाषिणी' प्लेटफॉर्म भारतीय भाषाओं में अनुवाद और स्पीच टेक्नोलॉजी के लिए पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कराता है। यह ओपन-सोर्स डेटासेट, ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन, मशीन ट्रांसलेशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच के लिए लैंग्वेज मॉडल और API प्रदान करता है।
डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए भाषिणी एंट्री बैरियर को कम करता है, स्थानीय भाषा में वॉइस और टेक्स्ट इंटरफेस जोड़ने में मदद करता है, गैर-अंग्रेजी भाषी यूजर्स तक पहुंच बढ़ाता है, बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय तैनाती का समर्थन करता है और बहुभाषी डिजिटल उपकरण बनाने की लागत घटाता है।
भारत के इन तकनीकी प्रयोगों से सबक लेकर AI4AI ने सऊदी अरब, कोलंबिया और ब्राजील में भी ऐसे ही कार्यक्रम शुरू किए हैं।
WEF की डीप-टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने की अपील
विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने सरकारों से अपील करते हुए कहा है कि डीप-टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए चुस्त नीतियां और विनियामक परीक्षण के लिए माहौल बनाएं ताकि तकनीक की बढ़ती रफ्तार के साथ कदमताल किया जा सके।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।