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Utterly Butterly To Rs 1 Lakh Crore How Cooperative Power Made Amul India S Dairy Giant National Identity
'अटरली बटरली' से ₹1 लाख करोड़ के सफर तक: सहकारिता ने अमूल को कैसे बनाया डेयरी दिग्गज व भारत की राष्ट्रीय पहचान
डॉ. उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 08 Apr 2026 04:44 PM IST
सार
भारत के गांवों से उठी सहकारी क्रांति की मिसाल अमूल (Amul) ने 36 लाख डेयरी किसानों (Dairy Farmers) की बदौलत वैश्विक पहचान बनाई और ‘Utterly Butterly’ अमूल गर्ल (Amul Girl) के साथ 1960 के दशक से शुरू यह सफर 1 लाख करोड़ के ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंच गया।
अमूल से जुड़े 36 लाख किसान, तो अमूल गर्ल ने देश की चेतना को आवाज दी।
- फोटो : GCMMF
7 अप्रैल, 2026 को गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन (GCMMF) के तहत संचालित सहकारी डेयरी ब्रांड अमूल ने वर्ष 2025-26 में 1 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि हासिल करने वाला अमूल भारत का पहला फूड ब्रांड बन गया।
अमूल की यह सफलता उन 36 लाख किसानों के सीधे जुड़ाव का परिणाम है, जिनका दूध बिना किसी बिचौलिए के उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। रोजाना 3.5 करोड़ लीटर दूध की आपूर्ति करने वाले इन किसानों को साल के 365 दिन भुगतान मिलता है, साथ ही उन्हें सस्ती पशु आहार और पशु चिकित्सा सेवाएं भी मिलती हैं।
पूरे देश में फैला गुजरात का सहकारी मॉडल
Amul की सफलता ने न केवल भारत के डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) को विश्व में नई पहचान दिलाई, बल्कि देशभर में सहकारिता मॉडल (Cooperative Model) को भी मजबूत किया। आज भारत में 1.6 करोड़ किसान, 1,85,903 डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से जुड़े हैं। 222 जिला समितियां और 28 राज्य मार्केटिंग फेडरेशन मिलकर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक (World's Largest Milk Producer) बनाते हैं।
डबल डिजिट ग्रोथ और वैश्विक विस्तार
अमूल ने 2024-25 के मुकाबले 11% वृद्धि दर्ज की, जिसमें करीब 4% कारोबार 50 देशों में निर्यात से आता है। अमूल ने अमेरिका में मिशिगन मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और यूरोप में स्पेन की लॉस पेद्रोचेस घाटी की पशुपालक सहकारी समिति - Cooperativa Ganadera del Valle de los Pedroches - के साथ साझेदारी की। मिशिगन का चयन अमूल क्रांति के जनक वर्गीस कुरियन की स्मृति में किया गया, जो मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र थे।
व्यापार नीति और सीमाओं का सवाल
अमूल की वैश्विक महत्वाकांक्षा के बावजूद भारत सरकार डेयरी सेक्टर को मुक्त व्यापार समझौतों में खोलने को लेकर सतर्कता बरतती रही है। अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी का मानना है कि भारतीय कृषि का 80% हिस्सा प्रतिस्पर्धी है, लेकिन डेयरी अभी भी एक संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है।
अमूल का विज्ञापन, जो इतिहास बन गया
अमूल के विज्ञापन अभियान ने 50 साल पूरे होने पर फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लिखा - 'वर्ष 1967 में सिल्वेस्टर दा कुन्हा (Sylvester da Cunha) और यूस्टेस फर्नांडीस (Eustace Fernandes) द्वारा गढ़ी गई ‘Amul Girl’ समय के साथ भारत की सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं की चश्मदीद गवाह बन गई। मुंबई की द कुन्हा कम्युनिकेशन्स (Da Cunha Communications) द्वारा तैयार यह अभियान उस दौरान 25 अखबारों, 6 टीवी चैनलों और 190 बिलबोर्ड्स पर दिखाई देता रहा और 1.5 करोड़ लोगों तक सोशल मीडिया के जरिए पहुंचा।' वहीं, विज्ञापन जगत के दिग्गज Alyque Padamsee ने कहा था - 'भारत का असली इतिहास Amul के विज्ञापनों में दर्ज है।'
देश की चेतना झकझोरती रही अमूल गर्ल
समय के साथ अमूल गर्ल (Amul Girl) केवल एक ब्रांड मैस्कॉट नहीं रही, बल्कि देश की आवाज बन गई। T20 वर्ल्ड कप 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत की जीत पर “Anhoni ko Dhoni karde!” जैसे वन-लाइनर्स और डोनाल्ड ट्रंप पर व्यंग्य “Donald’s Blowing his own Trump!” इस अभियान की पहचान बन गए।
वर्ष 2016 में प्रकाशित ‘Amul’s INDIA 3.0’ नामक किताब में अमूल के चुनिंदा विज्ञापनों और निबंधों का संग्रह प्रस्तुत किया गया। हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित इस किताब में अमिताभ बच्चन, शशि थरूर, अर्णब गोस्वामी, करण जौहर जैसी हस्तियों सहित अन्य कई लेखकों के योगदान शामिल हैं। यह पुस्तक अमूल गर्ल की नजर से भारत के 50 वर्षों के उतार-चढ़ाव और सामाजिक परिदृश्य को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत करती है।
दुनिया का सबसे लंबा अभियान
1966 में शुरू हुआ यह अभियान आज दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला आउटडोर विज्ञापन अभियान बन चुका है। 1975 में महीने में एक विज्ञापन से बढ़कर 2016 तक हर डेढ़ दिन में एक नया विज्ञापन बनने लगा। अमूल की कहानी केवल एक डेयरी ब्रांड की सफलता नहीं, बल्कि सहकारिता, नवाचार और जन-भागीदारी की ताकत का प्रतीक है।
एक ब्रांड, जो बन गया आंदोलन
अमूल जहां एक ओर यह किसानों की आय का भरोसेमंद स्रोत बना, वहीं दूसरी ओर अमूल गर्ल ने देश की चेतना को हँसते-हँसाते आईना दिखाया। आज जब अमूल 1 लाख करोड़ के मुकाम पर खड़ा है, तो सवाल सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि उस मॉडल का है, जो भारत के गांवों को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ता है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अमूल और सारस्वत बैंक को वर्ष 2025-26 में ₹1 लाख करोड़ टर्नओवर पार करने पर बधाई देते हुए कहा - यह उपलब्धि सहकारिता की ताकत का प्रमाण है; उन्होंने इसे सहकारी बैंकिंग और डेयरी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताते हुए आत्मनिर्भर भारत की दिशा में नई ऊर्जा देने वाला कदम बताया है।
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