Home›Misal Bemisal›Vishesh›
Svamitva Scheme Boosts Rural Economy Unlocks 135 Lakh Crore Land Value
स्वामित्व योजना: 3.30 लाख गांवों का ड्रोन सर्वे, 3.14 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी, 135 लाख करोड़ की संपत्ति उजागर
डॉ. उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 06 May 2026 08:32 PM IST
सार
स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों का ड्रोन सर्वे करके डिजिटल मानचित्र बनाकर अब 3.14 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए गए हैं। इससे गांवों में आबादी क्षेत्र के निवासियों को पहली बार संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक मिला है। इस पहल ने ग्रामीण संपत्ति को आर्थिक संसाधन में बदलते हुए संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ाई, पंचायतों की आर्थिक सेहत सुधारी और करीब ₹135 लाख करोड़ की संपत्ति का मूल्य उजागर किया है।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव ने हाल में अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वामित्व योजना के नतीजे साझा किए।
- फोटो : गांव जंक्शन
गांवों में पीढ़ियों से भूमि पर कब्जा और परंपरागत विरासत को ही जमीन का मालिकाना अधिकार माना जाता रहा है। लेकिन, कोई दस्तावेज और जमीन का नक्शा नहीं होने के कारण गांव के लोग न तो जमीन को बैंक में गिरवी रखकर ऋण ले सकते हैं और न ही किसी विवाद की स्थिति में अदालत में उस जमीन को अपना साबित कर पाते हैं।
ग्रामीण भारत के परिवारों की इस समस्या का समाधान केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना लेकर आई है। इसका उद्देश्य ड्रोन तकनीक के माध्यम से गांवों की आबादी भूमि का सटीक नक्शा तैयार कर उसे कानूनी रूप से मान्यता देना है।
1.89 लाख गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड जारी
अप्रैल 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई 'सर्वे ऑफ विलेजेस एंड मैपिंग विद इम्प्रूव्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरियाज' (SVAMITVA) योजना ने अपने पांच वर्षों में असाधारण प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2020-21 में जहां केवल 7,440 गांवों को प्रॉपर्टी कार्ड मिले थे।
वर्ष 2025-26 तक 1.89 लाख गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सितंबर 2027 तक 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3.46 लाख गांवों की 4 करोड़ ग्रामीण परिवारों को प्रॉपर्टी कार्ड दे दिए जाएं।
3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे कर डिजिटल मानचित्र तैयार किए गए हैं।
- फोटो : गांव जंक्शन
3.30 लाख गांवों में अब तक ड्रोन सर्वे
स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे कर डिजिटल मानचित्र तैयार किए गए हैं। ड्रोन और GPS तकनीक से जमीन की सटीक सीमा तय की जा रही है, जिससे विवाद कम हो रहे हैं और पारदर्शिता बढ़ रही है। इसके तहत अब तक करीब 70,000 वर्ग किलोमीटर आबादी भूमि कवर की गई है, जिसके आधार पर अब तक 3.14 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड जारी हुए हैं।
इस योजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) अहमदाबाद के अध्ययन के अनुसार, इससे ग्रामीणों की संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ रही है, पंचायतों के राजस्व और भूमि दस्तावेजीकरण में सुधार हुआ।
स्वामित्व योजना के लिए शुरुआत में ₹472 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जिसे बढ़ाकर ₹576 करोड़ कर दिया गया है। सरकार ने स्वामित्व योजना के बजट में ₹104 करोड़ अतिरिक्त जोड़े हैं, ताकि इस योजना को ज्यादा से ज्यादा गांवों तक पहुंचाया जा सके, ड्रोन सर्वे तेज किया जा सके और प्रॉपर्टी कार्ड वितरण का काम विस्तार से पूरा हो सके।
भूमि रिकॉर्ड अब हो रहे हैं पक्के और साफ
IIM अहमदाबाद के अध्ययन के मुताबिक, SVAMITVA योजना से गांवों में जमीन के रिकॉर्ड पहले से ज्यादा साफ और व्यवस्थित हो रहे हैं। अब लोग अपनी रिहायशी जमीन (घर वाली जमीन) का ज्यादा पंजीकरण करा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के 42,000 गांवों के सर्वे में पाया गया कि रिहायशी जमीन के पंजीकरण (म्यूटेशन) में हर साल 6.2% की बढ़ोतरी हुई, वहीं कृषि जमीन के म्यूटेशन में 4.87% की कमी आई है। इसका सीधा मतलब है कि अब जमीन का गलत या अनौपचारिक इस्तेमाल कम हो रहा है और रिकॉर्ड ज्यादा पारदर्शी बन रहे हैं।
श के गांवों में पीढ़ियों से अनौपचारिक तरीके से काबिज जमीन को अब कानूनी पहचान मिल रही है।
- फोटो : AI
135 लाख करोड़ की मैप की गई आबादी भूमि
ग्रामीण भारत में संपत्ति के अधिकार और आर्थिक मजबूती को नई दिशा देने वाली केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की स्वामित्व योजना (SVAMITVA SCHEME) अब गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बनकर उभर रही है।
ड्रोन आधारित सर्वे के जरिए गांवों की आबादी भूमि का सटीक रिकॉर्ड तैयार कर उसे कानूनी मान्यता दी जा रही है, जिससे संपत्ति मालिकों की क्रेडिट क्षमता बढ़ी है और पंचायतों की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है।
सबसे बड़ी बात ये है कि इस योजना के तहत मैप की गई आबादी जमीन की कुल कीमत करीब ₹135 लाख करोड़ आंकी गई है, जो इसकी आर्थिक ताकत को दिखाती है।
पंचायतों की आर्थिक सेहत में हुआ सुधार
महाराष्ट्र के 32 जिलों में 2015 से 2025 के बीच पंचायत वित्त पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि प्रॉपर्टी कार्ड वितरण के बाद ग्राम पंचायत का संपत्ति कर राजस्व 4.71 प्रतिशत यानी प्रति पंचायत सालाना 10,284 रुपये बढ़ा, जबकि अन्य स्थानीय कर 7.57 प्रतिशत यानी प्रति पंचायत 5,566 रुपये बढ़े।
उल्लेखनीय यह है कि जिन ड्रोन सर्वेक्षित गांवों में कार्ड नहीं बांटे गए, वहां संपत्ति कर राजस्व 12.29 प्रतिशत घट गया, जो प्रॉपर्टी कार्ड के महत्व को और स्पष्ट करता है।
ऐसे मालिकाना हक दे रही योजना
ड्रोन से गांव की तस्वीर लेकर, स्थायी जीपीएस स्टेशनों की मदद से जमीन की सटीक माप की जाती है। ड्रोन सर्वेक्षण से पहले संपत्ति मालिकों की सहमति और भागीदारी से चूना मार्किंग के जरिये सीमाएं तय होती हैं। फिर, राजस्व अधिकारी मैप का जमीनी सत्यापन करते हैं। एक निर्धारित अवधि के दावा-आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं। फिर, मानचित्र जारी कर दिया जाता है और डिजिटल दस्तावेज संपत्ति कार्ड जारी कर दिए जाते हैं।
संपत्ति कार्ड एक भू-संदर्भित, अधिकार-आधारित दस्तावेज होता है, जिसे अदालतें भी अब मान्यता दे रही हैं।
ड्रोन से गांव की तस्वीर लेकर, स्थायी जीपीएस स्टेशनों की मदद से जमीन की सटीक माप की जाती है।
- फोटो : AI
बैंक से कर्ज लेना हुआ आसान
पहले गांव की आबादी जमीन के पास कानूनी कागज नहीं होते थे, इसलिए बैंक कर्ज नहीं देते थे या बहुत कम देते थे। अब प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद वही जमीन बैंक के लिए गारंटी (collateral) बन गई है। यह पहली बार हुआ है जब ग्रामीण आबादी क्षेत्रों की भूमि को बैंक योग्य संपत्ति के रूप में स्वीकार किया गया है। SVAMITVA योजना के तहत जारी संपत्ति कार्ड को गारंटी के रूप में उपयोग करके अब तक 10,913 ऋण स्वीकृत किए गए हैं, और कुल ₹1,679 करोड़ की ऋण राशि वितरित की गई है।
IIM अहमदाबाद के अध्ययन में पाया गया कि स्वामित्व योजना के तहत मध्य प्रदेश के 42,000 गांवों में सर्वे किए गए आवासीय भूखंडों पर औसतन ऋण राशि में सालाना प्रति पार्सल 22,129 रुपये की वृद्धि हुई। इस बदलाव ने कृषि भूमि ऋण को प्रभावित नहीं किया, यानी कृषि से कोई प्रतिस्थापन नहीं हुआ। इन ऋणों का उपयोग वाहन खरीद, व्यवसाय विस्तार और मकान मरम्मत जैसे कार्यों में हुआ।
राज्यों में योजना कहां कितना मिला स्वामित्व
स्वामित्व योजना का दायरा देखें तो ड्रोन सर्वेक्षण कराने वाले अग्रणी राज्यों में उत्तर प्रदेश (1.11 करोड़ कार्ड), मध्य प्रदेश (67.33 लाख), हरियाणा (25.15 लाख), गुजरात (17.65 लाख) और कर्नाटक (10.58 लाख) शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मिजोरम और लद्दाख में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। हरियाणा, उत्तराखंड, पुडुचेरी, गोवा, त्रिपुरा, दादरा नगर हवेली दमन, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप में योजना पूर्णतः संतृप्त हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल इस योजना में शामिल नहीं हैं, क्योंकि इन राज्यों में पहले से ही भूमि अभिलेख प्रणाली मौजूद है। इसी तरह, जनजातीय क्षेत्रों और पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टु शेड्यूल्ड एरियाज) वाले क्षेत्रों में यह लागू नहीं है, क्योंकि वहां भूमि सामूहिक स्वामित्व में है।
महिलाओं और ग्रामीणों को लाभ
संपत्ति कार्ड में महिलाओं के नाम जोड़ने को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जमीन का कानूनी स्वामित्व मिलने से न केवल महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा में सुधार होता है, बल्कि उनका सम्मान भी बढ़ता है और ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है।
विकासशील देशों के लिए रोल मॉडल
देश के गांवों में पीढ़ियों से अनौपचारिक तरीके से काबिज जमीन को अब कानूनी पहचान मिल रही है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना ने ड्रोन तकनीक के जरिये न केवल ग्रामीण संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया है, बल्कि गांव के घरों को बैंक ऋण का आधार भी बना दिया है। IIM अहमदाबाद के एक व्यापक मूल्यांकन अध्ययन ने इस योजना की सफलता पर मुहर लगाई है और इसे विश्व बैंक सम्मेलन में विकासशील देशों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
दुनिया ने सुनी स्वामित्व योजना की कहानी
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने 29 अप्रैल से 1 मई 2026 तक वाशिंगटन स्थित विश्व बैंक मुख्यालय में आयोजित 'लैंड एंड प्रॉपर्टी रिसर्च कॉन्फ्रेंस-2026' में इस योजना के परिणाम साझा किए।
विश्व बैंक के लीड इकोनॉमिस्ट क्लॉस डेनिंगर ने 'इवैल्युएटिंग द स्वामित्व स्कीम' सत्र में अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। इस अवसर पर एक शोध पत्र 'क्रेडिट इम्पैक्ट्स ऑफ टाइटलिंग रूरल हैबिटेशन लैंड: एविडेंस फ्रॉम इंडियाज स्वामित्व स्कीम' भी प्रस्तुत किया गया।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।