गर्मियों में कूलर की खस-पट्टी से आती भीनी महक शायद आपने भी महसूस की होगी। वही वेटिवर यानी खस दुनिया के लग्ज़री परफ्यूम उद्योग का अहम हिस्सा है। खस की खुशबू करीब 90 फीसदी प्रीमियम पुरुष परफ्यूम्स में मुख्य सुगंध के रूप में रहती है और खुशबू को देर तक बनाए रखती है।
केरल के कस्बे कोलेंचेरी की सिंथाइट इंडस्ट्रीज ने इसी खुशबू को वैश्विक कारोबार में बदल दिया है। आज यह कंपनी सिर्फ स्पाइस ओलियोरेज़िन तक सीमित न रहकर, दुनिया के बड़े परफ्यूम हाउस, खाद्य कंपनियों और प्राकृतिक इंग्रीडिएंट्स उद्योग की भरोसेमंद साझेदार बन चुकी है।
तमिलनाडु के तटीय इलाकों में करीब 600 एकड़ रेतीली और पहले बंजर मानी जाने वाली जमीन पर सिंथाइट अपने कॉन्ट्रैक्ट किसानों के साथ वेटिवर (खस) की खेती कराती है। इसकी जड़ों से निकाला गया सुगंधित तेल स्विट्जरलैंड की दिग्गज कंपनी गिवोदान तक पहुंचता है।
यहीं इस तेल को "Vetiver des Sables India Orpur" के रूप में तैयार किया जाता है, जो आगे चलकर अमेरिकी फैशन डिजाइनर मार्क जैकब्स के चर्चित परफ्यूम "Daisy Murakami Eau de Parfum" जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होता है।
वर्ष 1972 में स्थापित सिंथाइट दुनिया की सबसे बड़ी स्पाइस ओलियोरेज़िन निर्माता है। इस वैश्विक बाजार में इसकी करीब 30% हिस्सेदारी है। आज गिवोदान, डीएसएम-फिर्मेनिख, केरी ग्रुप, आईएफएफ, टाटा कंज्यूमर, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और पेप्सिको जैसे दिग्गज इसके ग्राहकों में शामिल हैं।
सिंथाइट लग्ज़री परफ्यूम से लेकर स्नैक्स और इंस्टेंट फूड के लिए प्राकृतिक इंग्रीडिएंट्स उपलब्ध कराती है। वर्ष 2025-26 में सिंथाइट ने 50 करोड़ डॉलर के कारोबार का आंकड़ा पार किया। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजु जैकब के अनुसार, "पहले 50 करोड़ डॉलर तक पहुंचने में 54 साल लगे, अब 2030 तक कारोबार को बढ़ाकर 100 करोड़ डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।"
घर में इस्तेमाल होने वाले पिसे मसालों का स्वाद और खुशबू हर फसल के साथ थोड़ी-बहुत बदल जाती है। लेकिन अगर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी को दुनिया के किसी भी देश में एक जैसा स्वाद चाहिए, तो उसे मसालों के बजाय ओलियोरेज़िन की जरूरत पड़ती है।
ओलियोरेज़िन मसालों का गाढ़ा अर्क होता है, जिसमें खुशबू देने वाले वाष्पशील तेल और स्वाद, रंग व तीखापन देने वाले प्राकृतिक यौगिक दोनों सुरक्षित रहते हैं। यही वजह है कि नूडल्स, चिप्स, सॉस या रेडी-टू-ईट उत्पादों का स्वाद हर पैकेट में लगभग एक जैसा रहता है।
यही तकनीक सिंथाइट जैसी कंपनियों को साधारण मसाला कारोबार से कहीं आगे ले गई है।
सिंथाइट की नज़र अब उन क्षेत्रों पर है, जहां कम मात्रा में ज्यादा मूल्य मिलता है। असली संभावनाएं प्राकृतिक रंग, न्यूट्रास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स, बॉटनिकल एक्सट्रैक्ट्स और स्पेशलिटी एक्टिव्स में हैं, जिसमें सिंथाइट तेजी से निवेश कर रही है।