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Home› Misal Bemisal› Vishesh› Kerala Company Becomes The Global Czar Of Taste And Fragrance Built A 500 Million Empire On The Spices Aroma

स्वाद-सुगंध का वैश्विक सरताज भारत: मसालों व खस की खुशबू से दुनिया के स्नैक्स और परफ्यूम बाजार में जमाया सिक्का

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 23 Jul 2026 08:02 PM IST
सार

कभी खस की ठंडी खुशबू महसूस की है? उसी खुशबू ने केरल की एक कंपनी को दुनिया के सबसे बड़े परफ्यूम और फूड ब्रांड्स तक पहुंचा दिया। मसालों के अर्क से शुरू हुआ यह सफर आज 50 करोड़ डॉलर के बड़े वैश्विक कारोबार में बदल चुका है और अब लक्ष्य वर्ष 2030 तक एक अरब डॉलर तक पहुंचने का है।

खस की खुशबू से लेकर मार्क जैकब्स के परफ्यूम तक सिंथाइट ने बनाई वैश्विक पहचान।
खस की खुशबू से लेकर मार्क जैकब्स के परफ्यूम तक सिंथाइट ने बनाई वैश्विक पहचान। - फोटो : AI
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विस्तार
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गर्मियों में कूलर की खस-पट्टी से आती भीनी महक शायद आपने भी महसूस की होगी। वही वेटिवर यानी खस दुनिया के लग्ज़री परफ्यूम उद्योग का अहम हिस्सा है। खस की खुशबू करीब 90 फीसदी प्रीमियम पुरुष परफ्यूम्स में मुख्य सुगंध के रूप में रहती है और खुशबू को देर तक बनाए रखती है।

केरल के कस्बे कोलेंचेरी की सिंथाइट इंडस्ट्रीज ने इसी खुशबू को वैश्विक कारोबार में बदल दिया है। आज यह कंपनी सिर्फ स्पाइस ओलियोरेज़िन तक सीमित न रहकर, दुनिया के बड़े परफ्यूम हाउस, खाद्य कंपनियों और प्राकृतिक इंग्रीडिएंट्स उद्योग की भरोसेमंद साझेदार बन चुकी है।


केरल की कंपनी सिंथाइट ने बदल दी दुनिया के परफ्यूम और स्नैक्स की दुनिया।
केरल की कंपनी सिंथाइट ने बदल दी दुनिया के परफ्यूम और स्नैक्स की दुनिया। - फोटो : सिंथाइट

खस की जड़ों से मार्क जैकब्स के परफ्यूम तक

तमिलनाडु के तटीय इलाकों में करीब 600 एकड़ रेतीली और पहले बंजर मानी जाने वाली जमीन पर सिंथाइट अपने कॉन्ट्रैक्ट किसानों के साथ वेटिवर (खस) की खेती कराती है। इसकी जड़ों से निकाला गया सुगंधित तेल स्विट्जरलैंड की दिग्गज कंपनी गिवोदान तक पहुंचता है।

यहीं इस तेल को "Vetiver des Sables India Orpur" के रूप में तैयार किया जाता है, जो आगे चलकर अमेरिकी फैशन डिजाइनर मार्क जैकब्स के चर्चित परफ्यूम "Daisy Murakami Eau de Parfum" जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होता है।


सिंथाइट की कमाई का बड़ा आधार मसाला एक्सट्रैक्ट्स हैं, जिनमें पांच प्रमुख मसालों का 60% योगदान है।
सिंथाइट की कमाई का बड़ा आधार मसाला एक्सट्रैक्ट्स हैं, जिनमें पांच प्रमुख मसालों का 60% योगदान है। - फोटो : सिंथाइट

दुनिया के दिग्गज मसाला अर्क निर्माता की कहानी

वर्ष 1972 में स्थापित सिंथाइट दुनिया की सबसे बड़ी स्पाइस ओलियोरेज़िन निर्माता है। इस वैश्विक बाजार में इसकी करीब 30% हिस्सेदारी है। आज गिवोदान, डीएसएम-फिर्मेनिख, केरी ग्रुप, आईएफएफ, टाटा कंज्यूमर, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और पेप्सिको जैसे दिग्गज इसके ग्राहकों में शामिल हैं।

सिंथाइट लग्ज़री परफ्यूम से लेकर स्नैक्स और इंस्टेंट फूड के लिए प्राकृतिक इंग्रीडिएंट्स उपलब्ध कराती है। वर्ष 2025-26 में सिंथाइट ने 50 करोड़ डॉलर के कारोबार का आंकड़ा पार किया। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजु जैकब के अनुसार, "पहले 50 करोड़ डॉलर तक पहुंचने में 54 साल लगे, अब 2030 तक कारोबार को बढ़ाकर 100 करोड़ डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।"


ओलियोरेज़िन मसालों का सघन अर्क है, जो उनकी खुशबू, स्वाद, रंग और तीखापन समेटे रहता है।
ओलियोरेज़िन मसालों का सघन अर्क है, जो उनकी खुशबू, स्वाद, रंग और तीखापन समेटे रहता है। - फोटो : सिंथाइट

क्या होता है ओलियोरेज़िन?

घर में इस्तेमाल होने वाले पिसे मसालों का स्वाद और खुशबू हर फसल के साथ थोड़ी-बहुत बदल जाती है। लेकिन अगर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी को दुनिया के किसी भी देश में एक जैसा स्वाद चाहिए, तो उसे मसालों के बजाय ओलियोरेज़िन की जरूरत पड़ती है।

ओलियोरेज़िन मसालों का गाढ़ा अर्क होता है, जिसमें खुशबू देने वाले वाष्पशील तेल और स्वाद, रंग व तीखापन देने वाले प्राकृतिक यौगिक दोनों सुरक्षित रहते हैं। यही वजह है कि नूडल्स, चिप्स, सॉस या रेडी-टू-ईट उत्पादों का स्वाद हर पैकेट में लगभग एक जैसा रहता है।

यही तकनीक सिंथाइट जैसी कंपनियों को साधारण मसाला कारोबार से कहीं आगे ले गई है।

सिर्फ मसाले नहीं, हाई-वैल्यू कारोबार पर नजर

सिंथाइट की नज़र अब उन क्षेत्रों पर है, जहां कम मात्रा में ज्यादा मूल्य मिलता है। असली संभावनाएं प्राकृतिक रंग, न्यूट्रास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स, बॉटनिकल एक्सट्रैक्ट्स और स्पेशलिटी एक्टिव्स में हैं, जिसमें सिंथाइट तेजी से निवेश कर रही है।


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