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साक्षात्कार : तकनीक से बदल रही पशुपालन की तस्वीर, दुनिया के लिए सबक बनेगा भारत का संतुलित डेयरी मॉडल

डॉ. उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 20 Dec 2025 09:49 AM IST
सार

भारत का डेयरी सेक्टर छोटे किसानों पर टिका है। देश में प्रति पशु उत्पादकता में सुधार करके किसानों की आय कैसे बढ़ा सकते हैं, इस पर पेश है शून्य एग्रीटेक के सीईओ विजय सिंह से डॉ. उमाशंकर मिश्र की खास बातचीत...

शून्य एग्रीटेक के सीईओ और प्रबंध निदेशक विजय सिंह बताते हैं कि हाईटेक तकनीक से बदल रहा डेयरी उद्योग।
शून्य एग्रीटेक के सीईओ और प्रबंध निदेशक विजय सिंह बताते हैं कि हाईटेक तकनीक से बदल रहा डेयरी उद्योग। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भारत में प्रति पशु उत्पादकता वैश्विक औसत से 50% कम है। इसमें सुधार कैसे होगा?
भारत विश्व का 25% दूध उत्पादन करता है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता वैश्विक औसत से 50% कम है। इसका कारण पशुओं की संख्या नहीं, बल्कि हरे चारे और पोषण की कमी है। घटते चारागाह, बढ़ती मजदूरी, अनिश्चित मौसम और छोटे खेतों के कारण किसान सूखे चारे और महंगे कंसन्ट्रेट्स पर निर्भर हैं, जो संतुलित या प्राकृतिक नहीं हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक से तैयार शून्य का न्यूट्री अंकुरित फीड (एनएएफ), पोषक, रसायन-मुक्त व किफायती हरा चारा सालभर उपलब्ध कराता है। यह आसानी से पचता है, इसमें उच्च प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व हैं, जो दूध की मात्रा व गुणवत्ता (फैट व एसएनएफ) बढ़ाते हैं। ऐसा पोषक चारा पशुओं की संख्या बढ़ाए बिना कम उत्पादकता का संकट दूर कर सकता है।

हाइड्रोपोनिक मॉडल चारे की कमी दूर करके छोटे किसानों को कैसे फायदा देता है?
डेयरी सेक्टर छोटे किसानों, खासकर 70% महिलाओं पर निर्भर है, जिन्हें 30% पारिवारिक आय दूध उत्पादन से मिलती है। उनके सशक्तिकरण के लिए पारदर्शी दूध खरीद (जैसे अमूल मॉडल) और सालभर चारे की उपलब्धता जरूरी है। लेकिन, भारत में हरे चारे की 35–40% कमी है, कुछ जिलों में यह 60% तक है। छोटी जोत पर किसान नकदी फसलों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे चारे के लिए जमीन नहीं बचती। अनियमित मानसून, सूखा, बाढ़ और जंगली जानवर चारा उत्पादन को मुश्किल बनाते हैं। हमारे हाइड्रोपोनिक ग्रोथ एंड लॉजिस्टिक्स सेंटर्स (जीएलसी) 5000 वर्गफुट में 25 एकड़ के बराबर पौष्टिक चारा उगाते हैं, जिसमें 99% पानी की बचत होती है। नियंत्रित तकनीक से सालभर ताजा व किफायती चारा छोटे किसानों तक सीधे डिलीवर होता है। अपने सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए शून्य एग्रीटेक पौष्टिक चारा उपलब्ध कराता है व उत्पादन लागत घटाता है। 

हाइड्रोपोनिक तकनीक भारत के किसानों के लिहाज से कितनी किफायती है?
हाइड्रोपोनिक्स महंगी तकनीक मानी जाती है। लेकिन, शून्य ने इसे किसानों के लिए किफायती बनाया है। स्थानीयकृत तकनीक और अनुकूलित प्लेटफॉर्म के साथ एनएएफ का उपयोग प्रति पशु रोजाना `25 रुपये की बचत व दूध की मात्रा और फैट/एसएनएफ बढ़ने से `65–75 की अतिरिक्त आय देता है। इससे प्रति पशु `100 शुद्ध लाभ होता है। 

जीडीपी में पशुपालन और डेयरी सेक्टर का योगदान बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं?
अधिकांश पशुओं को जरूरी 7–10 किलो हरा चारा रोजाना नहीं मिल पाता, जिससे दूध उत्पादन क्षमता कम होती है। शून्य देशभर में ग्रोथ लॉजिस्टिक सेंटर्स स्थापित करके सालभर पोषक चारा उपलब्ध कराता है। इससे प्रति पशु दूध उत्पादन 15-20% और फैट कंटेंट 0.5–1% बढ़ता है, जिससे किसानों की आय में अरबों रुपये जुड़ सकते हैं। बेहतर नस्ल के पशुओं और पशु-चिकित्सा सेवाओं के साथ यह पहल डेयरी सेक्टर का जीडीपी में योगदान दोगुना कर सकती है। 

कार्बन-न्यूट्रल चारा उत्पादन डेयरी सेक्टर में पर्यावरणीय प्रभाव को कैसे कम करता है?
डेयरी सेक्टर में मीथेन उत्सर्जन बड़ी चुनौती है। शून्य का हाइड्रोपोनिक चारा मीथेन उत्सर्जन घटाता है और दूध उत्पादन बढ़ाता है। यह 99% पानी बचाता है, न्यूनतम जमीन का उपयोग करता है और रसायन-मुक्त है, जिससे पशु का स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह भारत के क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर और सतत विकास लक्ष्यों को बढ़ावा देता है।

एआई व आईओटी से डेयरी सेक्टर में पशु स्वास्थ्य व चारा प्रबंधन कैसे बदल रहा है? 
हमारा 10 दिन (240 घंटे) का उत्पादन चक्र रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर निर्भर है। आईओटी सेंसर तापमान, नमी और जल-प्रवाह ट्रैक करते हैं। एआई और एमएल तकनीक इसे प्रभावी बनाती हैं। दृष्टि एआई बीज की गुणवत्ता जांचता है और एआई कैमरे फफूंद का पता लगाकर समाधान सुझाते हैं। वहीं, एमएल एल्गोरिदम भविष्य के प्रभावों का अनुमान लगाते हैं। इससे गांव के ऑपरेटर भी उन्नत तकनीक के साथ कुशल और भरोसेमंद उत्पादन कर सकते हैं।

अगले 5 साल में वैश्विक डेयरी नवाचारों में भारत की क्या भूमिका रहने वाली है?
भारत न केवल दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि सबसे उत्पादक और टिकाऊ डेयरी शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। हमारा सपना है कि यह संतुलित डेयरी मॉडल अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के गांवों तक पहुंचे और पूरा विश्व भारत से प्रेरणा ले।
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