विज्ञापन
Home› Misal Bemisal› Vishesh› From Spice Extracts To Global Shelves Indian Ingredients Flavor World Snacks And Even Luxury Perfumes

मसालों के अर्क से वैश्विक बाजार में पैठ : नूडल्स, चिप्स, पिज्जा और पास्ता जैसे स्नैक्स में छाए भारत के मसाले

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 23 Jul 2026 08:54 PM IST
सार

मसालों से केरल का रिश्ता सदियों पुराना है। कभी रोमन, अरब और यूरोपीय व्यापारी काली मिर्च व इलायची की तलाश में मालाबार तट पहुंचते थे। आज फर्क इतना है कि अब दुनिया यहां से मसालों की बोरियां नहीं, बल्कि उनसे तैयार हाई-वैल्यू इंग्रीडिएंट्स खरीदने आती है।

केरल की कंपनी ने बदल दी परफ्यूम और स्नैक्स उद्योग की दुनिया।
केरल की कंपनी ने बदल दी परफ्यूम और स्नैक्स उद्योग की दुनिया। - फोटो : सिंथाइट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कभी रोमन, अरब और यूरोपीय व्यापारी काली मिर्च व इलायची की तलाश में केरल के मालाबार तट पर पहुंचते थे। आज दुनिया यहां से मसालों की बोरियां नहीं, बल्कि उनसे तैयार हाई-वैल्यू इंग्रीडिएंट्स खरीदने आती है। कोच्चि के आसपास स्थित सिंथाइट, प्लांट लिपिड्स और माने कैनकोर जैसी तीन कंपनियां मिलकर दुनिया के करीब 65 से 70 प्रतिशत स्पाइस एक्सट्रैक्शन कारोबार पर पकड़ रखती हैं। यही वजह है कि केरल को आज भी वैश्विक मसाला उद्योग का सबसे अहम केंद्र माना जाता है।
मसालों से केरल का रिश्ता सदियों पुराना है। समय बदला, मगर पहचान बनी रही।
मसालों से केरल का रिश्ता सदियों पुराना है। समय बदला, मगर पहचान बनी रही। - फोटो : सिंथाइट

प्राकृतिक रंगों की बढ़ती मांग पर दांव

1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में स्थापित सिंथाइट आज दुनिया की सबसे बड़ी स्पाइस ओलियोरेज़िन निर्माता है और वैश्विक बाजार में इसकी करीब 30% हिस्सेदारी है। गिवोदान, डीएसएम-फिर्मेनिख, केरी ग्रुप, आईएफएफ, टाटा कंज्यूमर, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और पेप्सिको जैसी कंपनियां इसकी ग्राहक हैं। वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 50 करोड़ डॉलर के कारोबार का आंकड़ा पार किया।

दुनिया भर में, खासकर अमेरिका में, प्राकृतिक रंगों की बढ़ती मांग को देखते हुए सिंथाइट हल्दी, पेपरिका, स्पिरुलिना, क्लोरोफिल और गेंदा से प्राकृतिक रंग विकसित कर रही है। कंपनी सूक्ष्मजीवों की मदद से फेरुलिक एसिड से किफायती बायो-आधारित वैनिलिन तैयार करने पर भी काम कर रही है।

तीन कंपनियों की 65 से 70% स्पाइस एक्सट्रैक्शन कारोबार पर पकड़

कोच्चि के आसपास स्थित सिंथाइट, प्लांट लिपिड्स और माने कैनकोर मिलकर दुनिया के करीब 65-70% स्पाइस एक्सट्रैक्शन कारोबार पर पकड़ रखते हैं। सिंथाइट का खस (वेटिवर) अर्क दुनिया के नामी परफ्यूम ब्रांड्स में इस्तेमाल होता है। यह भारत की स्पाइस एक्सट्रैक्शन तकनीक, खासकर टू-स्टेज एक्सट्रैक्शन में हासिल विशेषज्ञता की वैश्विक पहचान का प्रतीक है।

सिंथाइट की आय का लगभग 80% हिस्सा मसाला अर्क कारोबार से आता है, जिसमें काली मिर्च, पेपरिका, कैप्सिकम, हल्दी और अदरक की करीब 60% हिस्सेदारी है। वहीं कॉफी एक्सट्रैक्ट, वैनिला, प्राकृतिक रंग और फ्रेगरेंस इंग्रीडिएंट्स जैसे उत्पाद कंपनी के लगभग आधे मुनाफे का आधार हैं।

हालांकि प्राकृतिक रंग, न्यूट्रास्युटिकल्स और परफ्यूमरी इंग्रीडिएंट्स के वैश्विक बाजार में सिंथाइट को कई अनुभवी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
सिंथाइट के संस्थापक सी.वी. जैकब, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन डॉ. विजू जैकब और मैनेजिंग डायरेक्टर अजु जैकब।
सिंथाइट के संस्थापक सी.वी. जैकब, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन डॉ. विजू जैकब और मैनेजिंग डायरेक्टर अजु जैकब। - फोटो : सिंथाइट

भारत से बाहर भी मजबूत हो रहा नेटवर्क

भारत के तेजी से बढ़ते प्रोसेस्ड फूड बाजार को देखते हुए सिंथाइट ने वर्ष 2006 में सायमेगा फूड इंग्रीडिएंट्स की शुरुआत की, जो आज सीज़निंग, फ्लेवर, सॉस, प्राकृतिक रंग और कस्टमाइज्ड इंग्रीडिएंट्स उपलब्ध कराती है। फिक्की-डेलॉयट के अनुसार, भारत का प्रोसेस्ड फूड बाजार 2023 के 300 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 600 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

वैश्विक विस्तार के तहत सिंथाइट चीन, रवांडा, कनाडा, ब्राज़ील और इंडोनेशिया में उत्पादन व कच्चे माल के स्रोत विकसित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उसके कुल उत्पादन का 25-30% हिस्सा भारत के बाहर स्थित इन केंद्रों से आए।

5 दशकों की विरासत और 100 अरब डॉलर का लक्ष्य 

सिंथाइट इंडस्ट्रीज के संस्थापक सी.वी. जैकब के बेटे डॉ. विजू जैकब और अजु जैकब आज कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। डॉ. विजू जैकब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं, जबकि अजु जैकब मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में 2030 तक कंपनी का कारोबार एक अरब डॉलर तक पहुंचाने और उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध (IPO) कराने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

सिंथाइट की सफलता इस बात का प्रतीक है कि भारत अब केवल मसाले नहीं, बल्कि प्राकृतिक खुशबू, स्वाद, रंग और उच्च मूल्य वाले इंग्रीडिएंट्स भी दुनिया को निर्यात कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन