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Explained: भूख और कुपोषण से निपटने के लिए क्या कर रही सरकार, क्या है प्लानिंग और किन योजनाओं पर हो रहा काम?

डॉ. पुरुषोत्तम कुमार आर्य Published by: Himanshu Mishra Updated Fri, 02 Aug 2024 03:05 PM IST
सार

जुलाई 2024 तक, देश के  सेंट्रल पूल में 608.75 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उपलब्ध है, जो 411.20 लाख मीट्रिक टन के स्टॉकिंग मानदंड से काफी अधिक है। खाद्यान की अतिरिक्त उपलब्धता, देश भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस), विभिन्न कल्याणकारी  योजनाओं (सीडब्ल्यूएस) और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न आपूर्ति की गारंटी देती है।

डॉ. पुरुषोत्तम कुमार आर्य, दिल्ली विश्वविद्यालय
डॉ. पुरुषोत्तम कुमार आर्य, दिल्ली विश्वविद्यालय - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश की गरीब आबादी को भूख और कुपोषण से दूर रखने के लिए केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने बड़ी प्लानिंग कर रखी है। कई योजनाओं पर एकसाथ काम हो रहा है। फिर वह महिलाएं हों या बुजुर्ग, बच्चे हों या युवा। हर वर्ग और उनकी चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने कई योजनाएं लॉन्च की हैं। आइए समझते हैं सरकार की प्लानिंग और योजनाओं के बारे में सबकुछ...

 
खाद्यान्न के आंकड़े जान लीजिए 
जुलाई 2024 तक, देश के  सेंट्रल पूल में 608.75 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उपलब्ध है, जो 411.20 लाख मीट्रिक टन के स्टॉकिंग मानदंड से काफी अधिक है। खाद्यान की अतिरिक्त उपलब्धता, देश भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस), विभिन्न कल्याणकारी  योजनाओं (सीडब्ल्यूएस) और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न आपूर्ति की गारंटी देती है। भारत में कई सरकारी योजनाओं के तहत आबादी के विभिन्न वर्गों को मुफ्त या सब्सिडी के साथ खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है । इनमें प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं...

 
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम कानूनी रूप से 75 प्रतिशत तक ग्रामीण आबादी और 50 प्रतिशत तक शहरी आबादी को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये सब्सिडी युक्त खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार देता है। एनएफएसए, देश भर में करीब 81 करोड़ लाभार्थियों को कवर करता है। इसमें 16 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, जो महिलाओं के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके व्यापक कवरेज के दायरे में प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) यानी दोनों श्रेणियों को शामिल किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सब्सिडी वाला खाद्यान्न पर्याप्त मात्रा में लोगों तक पहुंच सके।

 
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)
इस योजना को देश में वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट के मद्देनजर गरीबों और जरूरतमंदों को ध्यान में रख कर शुरू किया गया था । केंद्र सरकार ने एक जनवरी, 2024 से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को अतिरिक्त पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम के तहत करीब 81.35 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।

 
पीएम पोषण (पोषण शक्ति निर्माण) योजना
पीएम पोषण अभियान का उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध करवाना और वंचित छात्रों को नियमित स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए शिक्षा में सुधार लाना है।

माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने स्कूलों में पीएम पोषण राष्ट्रीय योजना को वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक पांच साल की अवधि के लिए जारी रखने को मंजूरी दी है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 54,061.73 करोड़ रुपये और राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से 31,733.17 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। केंद्र सरकार खाद्यान्न पर करीब 45,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का भी वहन करेगी। इस प्रकार इस योजना का कुल बजट 1,30,794.90 करोड़ रुपये होगा।

 
अंत्योदय अन्न योजना (AAY)
ये योजना एक आवश्यक सामाजिक कल्याण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत  8.92 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हो रहें हैं । गौरतलब है कि इन लाभार्थियों में 2 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं। इससे महिला प्रतिभागियों की जरूरतों को पूरा करने और महत्वपूर्ण संसाधनों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इस कार्यक्रम की प्रतिबद्धता उजागर होती है।

यह लक्षित दृष्टिकोण न केवल गरीब परिवारों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर देता है, जिससे कि उनकी जरूरतें पूरी हो सकें और उन्हें सशक्त बनाया जाए। महिला लाभार्थियों की पर्याप्त संख्या से स्पष्ट होता है कि समाज के सभी वर्ग इस योजना से लाभान्वित और सकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहें हैं ।

 
भारत में चावल का फोर्टिफिकेशन
फोर्टिफाइड चावल, वह चावल है जिसके पोषण मूल्य में सुधार के लिए आवश्यक विटामिन और खनिजों की मात्रा को बढ़ाया गया है। वर्ष 2019-20 से 31 मार्च, 2024 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये करीब 406 लाख टन फोर्टिफाइड चावल वितरित किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यक्रमों/ योजनाओं के जरिये जनता को वितरित किये जाने वाले चावल की पोषण गुणवत्ता में सुधार करना है।

 
महंगाई से राहत देने के लिए सरकार क्या कर रही?
केंद्र सरकार ने आवश्यक कृषि-बागवानी वस्तुओं के मूल्यों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) का उपयोग किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि  जनसाधारण, खास तौर पर निम्न आय वर्ग के लोगों को मूल्यों में उतार-चढ़ाव के कारण कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

प्याज का बफर स्टॉक वर्ष 2020-21 में 1 एलएमटी से बढ़कर 2023-24 में 7 एलएमटी हो गया। इस रणनीतिक दृष्टिकोण का उद्देश्य कीमतों में स्थिरता लाना और उतार-चढ़ाव को रोकना है क्योंकि यह आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं अफोर्डेबिलिटी यानी लोगों की क्रयशक्ति को प्रभावित कर सकता है।

भारत दाल को जुलाई 2023 में लॉन्च किया गया था। इसके तहत चना स्टॉक को सब्सिडी वाली चना दाल में बदलकर उसे 1 किलो पैक के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम और 30 किलो पैक के लिए 55 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत पर बाजार में उतारा गया है। इसके अलावा नैफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के जरिये भारत आटा और भारत चावल को क्रमशः 27.50 रुपये प्रति किलोग्राम और 29 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराया गया है।

(लेखक डॉ. पुरुषोत्तम कुमार आर्य, दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं)
 
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