भूजल बचाने के लिए बदली खेती: धान-गेहूं से दूरी, सब्जी नर्सरी से बदली किस्मत... सालाना तैयार कर रहे 10 लाख पौधे
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 27 Sep 2026 06:53 PM IST
सार
भूजल स्तर 120 से 180 फुट नीचे जाने और धान-गेहूं की बढ़ती लागत के बीच सिरसा के किसान मुकेश कंबोज ने खेती का तरीका बदला। सब्जी उत्पादन से शुरुआत कर उन्होंने पौध नर्सरी शुरू की, जहां अब सालाना करीब 8 से 10 लाख पौधे तैयार किए जाते हैं।
भूजल स्तर लगातार नीचे जाने और धान-गेहूं की खेती की बढ़ती लागत से परेशान सिरसा के किसान मुकेश कंबोज ने करीब पांच साल पहले खेती का तरीका बदल दिया। गांव झोरड़नाली निवासी मुकेश ने अक्तूबर 2021 में धान-गेहूं आधारित खेती से हटकर सब्जियों की खेती शुरू की। इसके बाद उन्होंने गुणवत्तापूर्ण सब्जी पौध तैयार करने की नर्सरी शुरू की। आज उनकी नर्सरी में सालाना करीब 8 से 10 लाख सब्जी पौधे तैयार होते हैं। इस काम से स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।
120 से 180 फुट नीचे पहुंचा भूजल
मुकेश के मुताबिक, उनके क्षेत्र में भूजल स्तर करीब 120 से 180 फुट तक नीचे चला गया है। धान और गेहूं की खेती में लागत बढ़ने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता में भी गिरावट की समस्या सामने आ रही थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने पारंपरिक फसल चक्र से हटकर कम पानी वाली फसलों और सब्जी उत्पादन को अपनाने का फैसला किया।
एक-दो एकड़ से शुरू किया सब्जी उत्पादन
अक्तूबर 2021 में मुकेश ने शुरुआत में एक से दो एकड़ जमीन में अलग-अलग सब्जियों की खेती की। शुरुआती दो वर्षों में उन्होंने खुद सब्जियां उगाने के साथ आसपास के किसानों को भी सब्जी उत्पादन की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।
सब्जियों की अच्छी पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध की जरूरत महसूस होने पर उन्होंने खुद पौध तैयार करने का काम शुरू किया। सबसे पहले प्याज और लहसुन की पौध तैयार की गई। किसानों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद उन्होंने टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च समेत अन्य सब्जियों की पौध भी तैयार करनी शुरू कर दी।
4.25 लाख रुपये से बनाया नेट हाउस
नर्सरी को आधुनिक और बेहतर बनाने के लिए मुकेश ने वर्ष 2022 में हरियाणा बागवानी विभाग की संरक्षित खेती योजना के तहत नेट हाउस स्थापित किया। इस पर करीब 4.25 लाख रुपये खर्च हुए। विभाग की ओर से उन्हें 75 प्रतिशत अनुदान मिला। नेट हाउस के कारण पौध को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने और बेहतर गुणवत्ता की पौध तैयार करने में मदद मिली।
तकनीक पर करीब 20 लाख रुपये का निवेश
मुकेश ने नर्सरी में सिंचाई और पौध तैयार करने की आधुनिक तकनीक भी अपनाई है। उन्होंने सूक्ष्म फव्वारा सिंचाई, सब्जियों के लिए टपका सिंचाई और अन्य कृषि उपकरणों पर अब तक करीब 20 लाख रुपये अतिरिक्त निवेश किया है। पौध तैयार करने के लिए नर्सरी में प्रो-ट्रे और मिट्टी रहित कोकोपीट मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पौध को एक समान तरीके से तैयार करने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
नर्सरी से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध
मुकेश की नर्सरी अब सिर्फ उनका कृषि व्यवसाय नहीं रह गई है, बल्कि आसपास के किसानों को भी सब्जियों की गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध करा रही है। धान-गेहूं के पारंपरिक फसल चक्र से अलग विकल्प तलाशने वाले किसानों के लिए सब्जी उत्पादन और पौध नर्सरी आय का एक नया जरिया बन रहा है।
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