अच्छी नौकरी और करीब 90 लाख रुपये सालाना की सैलरी छोड़कर खेती शुरू करना आसान फैसला नहीं होता। लेकिन चंडीगढ़ के मोहित निझावन ने ऐसा ही किया। परिवार में स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर घटनाओं के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर माइक्रोग्रीन्स की खेती शुरू की। आज उनका यह कारोबार हर महीने करीब 12 लाख रुपये का राजस्व कमा रहा है।
22 साल कॉर्पोरेट नौकरी के बाद बदला करियर
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, माइक्रोग्रीन्स सब्जियों, अनाज और जड़ी-बूटियों के ऐसे छोटे पौधे होते हैं, जिन्हें आमतौर पर अंकुरण के 7 से 21 दिन बाद काट लिया जाता है। ये रंग, स्वाद और पोषण के लिए जाने जाते हैं। इनमें कई तरह के विटामिन, खनिज और जैव-सक्रिय तत्व पाए जाते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंप्यूटर साइंस में BTech कर चुके मोहित ने करीब 22 साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। वह अपनी नौकरी से संतुष्ट थे और अच्छी कमाई कर रहे थे। लेकिन उनके ससुराल में कैंसर से हुई मौतों ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया। मोहित को लगा कि स्वस्थ जीवनशैली और खान-पान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसी सोच के चलते उन्होंने 2020 में अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
धोखे के बाद दोबारा शुरू किया कारोबार
माइक्रोग्रीन्स की खेती में मोहित का शुरुआती सफर आसान नहीं रहा। 2021 में वह धोखाधड़ी का शिकार हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने 2022 में दोबारा शुरुआत की और Embryonic Greens (OPC) Private Limited की स्थापना की। इसी के तहत उन्होंने अपना माइक्रोग्रीन्स ब्रांड ‘ग्रीनू’ (GreenU) शुरू किया। मोहित ने महज 30 हजार रुपये के निवेश से कारोबार शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने चंडीगढ़ स्थित अपने घर की दूसरी मंजिल पर सिर्फ 100 वर्ग फुट की जगह में माइक्रोग्रीन्स उगाए।
21 किस्मों से शुरू किया सफर, अब 75 से ज्यादा वैरायटी
शुरुआत में मोहित ने केवल 21 किस्मों के बीज लगाए थे। आज वह करीब 500 वर्ग फुट के कमरे में 75 से ज्यादा किस्मों की माइक्रोग्रीन्स उगा रहे हैं। इनमें ब्रोकोली, मूली, सरसों और बाजरे जैसी माइक्रोग्रीन्स शामिल हैं। बाजरे की माइक्रोग्रीन्स में कैल्शियम और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
हर महीने 6,500 ट्रे की बिक्री
कंपनी के अनुसार, 2022 में कारोबार शुरू करने के बाद से अब वह हर महीने करीब 12 लाख रुपये का राजस्व कमा रही है। सालाना कारोबार करीब 1.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि वार्षिक लाभ करीब 60 लाख रुपये बताया गया है। मोहित के मुताबिक, हर महीने करीब 6,500 ट्रे माइक्रोग्रीन्स की बिक्री होती है। एक ट्रे की औसत कीमत करीब 200 रुपये है।
किसानों को भी दे रहे माइक्रोग्रीन्स की ट्रेनिंग
मोहित सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। वह किसानों और दूसरे लोगों को माइक्रोग्रीन्स की खेती के बारे में जानकारी देने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाते हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वह सिर्फ 149 रुपये फीस लेते हैं। उनका लक्ष्य पूरे देश में किसानों और नए उत्पादकों को माइक्रोग्रीन्स की खेती का तरीका सिखाना है।
मोहित का मानना है कि माइक्रोग्रीन्स की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है। साथ ही, इसके जरिए लोगों को पौष्टिक और स्वस्थ भोजन के प्रति जागरूक भी किया जा सकता है।
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