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New Identity Of Carpet City Humming Bees Bhadohi Earns Money From Honey Subsidies Available For Beekeeping
कालीन नगरी की नई पहचान, मधुमक्खियों की गुनगुन : भदोही में शहद से कमाई, मधुमक्खी पालन पर मिल रही सब्सिडी
संतोष देव गिरी, स्वतंत्र पत्रकार, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 18 Oct 2026 01:44 PM IST
सार
मखमली कालीनों के ताने-बाने से दुनिया भर में पहचाना जाने वाला भदोही अब एक नई कहानी लिखने जा रहा है। बुनकर व किसान परिवारों के लिए जिला उद्यान विभाग ने मधुमक्खी पालन की नई राह खोल दी है।
कालीन नगरी की नई पहचान, मधुमक्खियों की गुनगुन
- फोटो : गांव जंक्शन
मखमली कालीनों के लिए मशहूर रहे उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की पहचान रही है, जिसका ताना-बाना पूरी दुनिया में फैला है। अब इस कालीन नगरी को एक और पहचान मिल रही है, मीठे शहद और मौन पालन की। पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे किसानों के लिए जिला उद्यान विभाग ने मधुमक्खी पालन को स्वरोजगार के बड़े मॉडल के रूप में पेश किया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने जिले में मौन पालन की 101 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। मकसद यह है कि कालीन बुनाई के साथ ही किसानों की आय का एक स्थाई और अतिरिक्त जरिया बने और भदोही शहद उत्पादन के नक्शे पर भी अपनी छाप छोड़े।
एक यूनिट पर 40 फीसदी सब्सिडी
जिला उद्यान अधिकारी ममता सिंह यादव बताती हैं, सरकार यूनिट की लागत पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। एक यूनिट का मतलब आठ फ्रेम वाले 50 बक्से (बी-बॉक्स), 50 मौन वंश यानी मधुमक्खी कॉलोनी और शहद निकालने की मशीन समेत पूरे सेटअप से होता है। इसकी कुल लागत 3 लाख 20 हजार रुपये है, जिसमें से 40 प्रतिशत यानी 1 लाख 28 हजार रुपये सब्सिडी के रूप में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजे जाएंगे। लाभ "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर मिलेगा और आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होगा।
शहद की कमाई का ये है गणित
उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक बक्से से एक महीने में औसतन 5 किलो शुद्ध शहद मिलता है। इस हिसाब से 50 बक्सों की एक यूनिट से महीने में करीब 250 किलो यानी ढाई क्विंटल शहद उत्पादन हो सकता है। बाजार में शहद का भाव 300 रुपये किलो भी मानें, तो एक यूनिट से महीने में 75 हजार रुपये तक शहद मिल सकता है। यह खेती-किसानी के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन रहा है, जिसमें रोज-रोज की मजदूरी का खर्च नहीं उठाना पड़ता।
छोटी जोत, दोहरा फायदा
मधुमक्खी पालन से जुड़े किसान बालकिशन, अमृतलाल और इंद्रावती देवी कहते हैं, थोड़ी-सी सावधानी और मेहनत से यह कारोबार लाभप्रद बन सकता है। भदोही में किसानों की जोत बहुत छोटी है और ज्यादातर परिवार कालीन बुनाई और खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में मधुमक्खी पालन दोहरा फायदा देता है। पहला फायदा शहद बेचने से सीधी आमदनी है। दूसरा और बड़ा फायदा परागण (पॉलिनेशन) से मिलता है।
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, जहां मधुमक्खियों के बक्से रखे होते हैं, वहां सरसों, सब्जियों और फलों की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है, क्योंकि मधुमक्खियां एक फूल से दूसरे फूल तक पराग ले जाती हैं और फसल में फल-फूल ज्यादा बनते हैं। किसान शहद भी बेचेगा और उसकी सरसों-गेहूं की पैदावार भी बढ़ेगी।
पिछले कुछ सालों में कालीन उद्योग में उतार-चढ़ाव आया है, इसलिए सरकार चाहती है कि बुनकर-किसान परिवार एक ही व्यवसाय पर निर्भर न रहें। जिला उद्यान अधिकारी बताती हैं, 'सरकार का लक्ष्य है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ मौन पालन भी अपनाएं। इसमें जगह कम लगती है।
मधुमक्खियों के बक्से खेत के किनारे, बाग या घर के आंगन में भी रख सकते हैं। महिलाएं भी इस काम को आसानी से कर सकती हैं।' अगर यह योजना सफल हुई तो तो आने वाले समय में भदोही अपने मखमली कालीन के साथ शहद के लिए भी जाना जाएगा। इस तरह, कालीन नगरी में छोटे किसानों के लिए शहद की मिठास से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जाएगी।
जान लें आवेदन का आसान तरीका
भदोही में आवेदन के लिए किसान को उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग की वेबसाइट horticulture.up. gov.in पर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। इसमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी और फोटो लगेगी। चयन के बाद विभाग की टीम मौके पर जांच करेगी और फिर यूनिट आवंटित करेगी।
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