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नई बयार : छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक ने नक्सल प्रभावित गांव में खोली शाखा, 50 से अधिक गांवों को वित्तीय सेवाएं

गांव जंक्शन डेस्क, रायपुर Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 27 May 2025 02:11 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित पामेड गांव में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा खुली है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे विकास और सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। साथ ही, आदिवासी कन्याओं के लिए छात्रावास और बच्चों के लिए पोषण केंद्र भी शुरू किया गया है। 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पामेड, जो कभी नक्सलियों की बटालियन नंबर-1 का गढ़ था, अब विकास की राह पर है। छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा ने 50 से अधिक गांवों के लिए वित्तीय सेवाएं शुरू की हैं।  

वित्तीय समावेशन : 100 किमी की यात्रा खत्म
पामेड के निवासियों को पहले बैंकिंग के लिए आवापल्ली तक 97 किमी की यात्रा करनी पड़ती थी। नई शाखा से 50 गाँवों के लोग अब आसानी से लेन-देन, बचत, और ऋण सुविधाएँ प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करेगा।  

मुख्यमंत्री का संदेश : सशक्तीकरण का नया बस्तर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को शाखा का वर्चुअल उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, “यह केवल बैंक नहीं, बल्कि विश्वास, सेवा, और स्थिरता के ज़रिए लोगों के कल्याण का वादा है। यह नया बस्तर है - आत्मविश्वास और विकास से भरा।”  

शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा
साय ने 1.62 करोड़ रुपये की लागत से बने आदिवासी कन्या छात्रावास का उद्घाटन किया, जो क्षेत्र की युवतियों को शिक्षा तक पहुँच देगा। साथ ही, पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की शुरुआत हुई, जो आदिवासी बच्चों में कुपोषण को खत्म करने में मदद करेगा।  

नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “बस्तर अब हिंसा का नहीं, विकास और समृद्धि का प्रतीक बनेगा।” यह कदम केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति का हिस्सा है।  

भविष्य की राह : समृद्ध और सुरक्षित बस्तर
पामेड में बैंक, छात्रावास, और पोषण केंद्र की शुरुआत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन, शिक्षा, और स्वास्थ्य को बढ़ावा देगी। यह पहल बस्तर को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।
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