किसी गांव का नाम लेते ही जेहन में हरी-भरी फसलें, पशुपालन और मिट्टी की खुशबू उभरकर आती है। लेकिन, तमिलनाडु के तेनकासी जिले का गोविंदपेरी गांव इस पारंपरिक तस्वीर को पूरी तरह बदल देता है।
गोविंदपेरी किसानों का नहीं, बल्कि इंजीनियर्स का गांव है - जहां खेतों के बीच लैपटॉप पर काम करते युवा दिखाई देते हैं और पेड़ों की छांव में भविष्य के सॉफ्टवेयर तैयार होते हैं। इस बदलाव के केंद्र में हैं तकनीकी कंपनी जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू, जिनके प्रयासों ने गोविंदपेरी को ऐसा टेक्नोलॉजी हब बना दिया है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में काम कर चुके इंजीनियर्स अब शहरों और विदेशों की नौकरियां छोड़कर गोविंदपेरी गांव में आकर बस रहे हैं।
गांव बना टेक्नोलॉजी की प्रयोगशाला
गोविंदपेरी में खेत या पेड़ के नीचे लैपटॉप पर काम करता कोई इंजीनियर दिख जाना अब सामान्य है। यही श्रीधर वेम्बू की सोच है, जहां ग्रामीण विकास और वैश्विक तकनीक का संगम नजर आता है। करीब 34 साल नौसेना में अपनी सेवाएं देने के बाद रिटायर हुए रवि कुमार अगस्त 2024 से गोविंदपेरी में श्रीधर वेम्बू के साथ काम कर रहे हैं।
रवि कुमार बताते हैं, यहां अनुसंधान एवं विकास केंद्र - पाईलैब्स के लिए सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और ऊर्जा प्रणालियों पर काम करने वाली इंजीनियर्स की एक मजबूत टीम तैयार की गई है। इसका उद्देश्य उन्नत सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और ऊर्जा प्रणालियों से जुड़े तकनीकी समाधान विकसित करना है, जो भारत में बने हों और वैश्विक स्तर पर उपयोग में आ सकें।
यूपी और एमपी में भी ऐसे प्रयास जारी हैं। गोविंदपेरी में फिलहाल 40 सदस्यों की टीम है, जिसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर इंजीनियर शामिल हैं, जबकि पास के ग्रामीण परिसर में करीब 2000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। दक्षिण भारत के बाद जोहो का विस्तार अब उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है।
शहर छोड़ गांव अपनाने का फैसला
पाईलैब्स के इंजीनियर्स की सोच पारंपरिक सोच से बिल्कुल अलग है और वे शहरों की भीड़ से दूर रहकर शांत माहौल में काम करना चाहते हैं। यहां काम करने वाले बेंगलुरु के राधाकृष्ण कहते हैं, शहरों में सफर करने में ही घंटों लग जाते हैं, यहां शांति है। स्थानीय छात्रों को काम के मौके मिल रहे हैं - गांवों का विकास ही देश को आगे बढ़ाएगा।
मदुरै के युवराज बताते हैं कि यहां आकर गांवों को लेकर उनकी धारणा बदल गई। सुविधाएं मौजूद हैं, काम का माहौल सुकून भरा है। इस मॉडल ने दिखाया है कि 5जी के इस दौर में गांव में रहकर भी दुनिया से जुड़कर बिना तनाव काम किया जा सकता है।
देसी सॉफ्टवेयर्स की प्रयोगशाला
सॉफ्टवेयर टीम का नेतृत्व कर रहे श्रीनिवास बताते हैं कि उनकी टीम इंजीनियरिंग डिजाइन के लिए इस्तेमाल होने वाले कैड सॉफ्टवेयर पर काम करती है। वह कहते हैं, हम चाहते हैं कि भारत में बने सॉफ्टवेयर दुनिया भर में उपयोग हों और विदेशी निर्भरता कम हो। हमने दिखाया है कि गांव में रहकर यह संभव है।
पहाड़, हरियाली और हाईटेक काम
प्रोडक्ट मैनेजर एल्विन, जिन्होंने अहमदाबाद में पढ़ाई की और गुजरात में काम किया, कहते हैं - यहां का नजारा देखिए - पहाड़ियां, हरियाली और झरने। जहां लोग घूमने आते हैं, हम वहीं पर रहकर काम कर रहे हैं। शुरू में परिवार के सदस्यों का दबाव था कि किसी बड़े शहर या विदेश जाओ, लेकिन अब लगता है कि यहां रहने का मेरा फैसला एकदम सही था।
डिजाइनर के तौर पर काम करने वाली ब्यूला, जो डेढ़ साल से पाईलैब्स के साथ जुड़ी हैं, कहती हैं - यहां ऑफिस नहीं, बल्कि घर जैसा माहौल है। शांत वातावरण, सीखने के मौके और रहने का खर्च भी कम है। शहरों के मुकाबले जीवन यहां कहीं ज्यादा संतुलित है।
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