विज्ञापन
Home Misal Bemisal From Barren Land To Greenery Karauli Women Turned Dacoits Into Farmers

मिसाल : बंजर जमीन पर फूटे बदलाव के अंकुर, करौली की महिलाओं ने डकैतों को बनाया किसान

गांव जंक्शन डेस्क, करौली (राजस्थान) Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 26 May 2025 02:04 PM IST
सार

राजस्थान के करौली की महिलाओं ने बंजर जमीन को हरा-भरा कर डकैत पतियों को किसानी सिखाई। 500 पोखरों और जल संरक्षण से बदली इलाके की तकदीर। पढ़ें, कैसे नारी शक्ति ने भूजल संकट का समाधान किया और उम्मीद की नई कहानी लिखी। 

सम्पति देवी, अपने पति जगदीश, जो कि एक पूर्व डकैत है, के साथ राजस्थान के जल संकटग्रस्त करौली जिले में
सम्पति देवी, अपने पति जगदीश, जो कि एक पूर्व डकैत है, के साथ राजस्थान के जल संकटग्रस्त करौली जिले में - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्या बंजर जमीन पर हरियाली लहलहा सकती है? क्या डकैतों का दिल खेती की ओर मोड़ा जा सकता है? राजस्थान के करौली जिले की महिलाओं ने यह असंभव-सा सपना सच कर दिखाया। अपनी मेहनत, हिम्मत, और लगन से उन्होंने न सिर्फ सूखी जमीन को उपजाऊ बनाया, बल्कि डकैती की राह पर भटके पतियों को किसानी का नया रास्ता दिखाया। बीते कुछ सालों में करौली में 500 से ज्यादा पोखर बनाए गए, जिन्होंने इस इलाके की तस्वीर बदल दी। यह कहानी है नारी शक्ति की, जिसने निराशा को उम्मीद में बदला और डर को अमन-चैन में।  

सूखे की मार: डकैती का अंधेरा
करीब 15 साल पहले करौली की जमीनें बंजर थीं, और लोग डर के साए में जीते थे। लगातार सूखा और कम होती बारिश ने खेती को नामुमकिन बना दिया। पानी के स्रोत सूख गए, और पशुपालन ठप हो गया। नतीजा? पुरुष निराशा में डकैती की राह पर चल पड़े। संपत्ति देवी जैसी महिलाएँ हर दिन इस डर में जीती थीं कि उनके पति जंगल से लौटेंगे भी या नहीं। भूरखेड़ा के लज्जाराम, जो कभी 40 मामलों में डकैत थे, पानी और खेती की कमी के कारण अपराध की दुनिया में चले गए। लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की कहानी थी।  

नारी शक्ति : बंदूक से कुदाल तक
2010 के आसपास करौली की महिलाओं ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पतियों को बंदूक छोड़ने और खेती की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया। लज्जाराम की बहन ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मनाया। आज वे 10 बीघा जमीन पर सरसों, चना, और बाजरा उगाते हैं, और आठ भैंसों के साथ समृद्ध जीवन जी रहे हैं। संपत्ति देवी ने अपने पति जगदीश को डकैती छोड़ने के लिए राजी किया। इन महिलाओं की जिजीविषा ने न सिर्फ उनके परिवारों, बल्कि पूरे इलाके को नई रोशनी दी।  

जल संरक्षण : हरियाली की नींव
करौली की इस क्रांति में अलवर की जल संरक्षण संस्था तरुण भारत संघ (TBS) का बड़ा योगदान है। 1975 से जल संरक्षण के लिए समर्पित TBS ने महिलाओं के साथ मिलकर पुराने तालाबों को पुनर्जनन किया और नए पोखर बनाए। संपत्ति देवी और जगदीश ने दूध बेचकर कमाए पैसों से एक पोखर बनवाया, जो बारिश के साथ लबालब भर गया। आज वे सरसों, गेहूं, बाजरा, और सब्जियाँ उगाते हैं। उनके जलाशय को सिंघाड़े की खेती के लिए किराए पर देकर वे हर सीजन में करीब 1 लाख रुपये कमाते हैं। संपत्ति देवी गर्व से कहती हैं, “अब हमारी जमीन लहलहाती है, और जिंदगी मुस्कुराती है।”  

जंगलों में जल : पोखरों की जादुई कहानी
TBS और स्थानीय समुदाय ने मिलकर करौली के जंगलों में 16 पोखर बनाए, जो पहाड़ियों से बहते पानी को रोकते हैं। डीजल पंपों से यह पानी खेतों तक पहुँचता है। इन प्रयासों ने करौली को डकैतों की कुख्याती से निकालकर अमन-चैन की मिसाल बना दिया। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुमित डूकिया बताते हैं कि चंबल का पथरीला इलाका बारिश के पानी को तेजी से बहा देता था, जिससे भूजल रिचार्ज नहीं हो पाता था। अब पोखरों ने इस समस्या को हल कर दिया है।  

भूजल की जीत : सेरनी नदी का पुनरुद्धार
करौली में जल संरक्षण ने मौसमी सेरनी नदी को बारहमासी बना दिया। TBS के संरक्षणवादी रणवीर सिंह बताते हैं, “10 साल पहले यह नदी दिवाली के बाद सूख जाती थी। अब गर्मियों में भी पानी रहता है, और भूजल स्तर 5-10 फीट ऊपर आ गया है।” 150 जल संरचनाओं ने नदी को जीवित रखा, जिससे सूखे और बाढ़ का खतरा टल गया। यह बदलाव भूजल संकट का समाधान बनकर उभरा, और करौली की जमीनें फिर से लहलहाने लगीं।  

नया करौली : उम्मीदों का उजाला
करौली की महिलाओं ने साबित कर दिया कि हौसला और मेहनत से बंजर जमीन पर हरियाली लाई जा सकती है, और डकैतों को किसान बनाया जा सकता है। उनके प्रयासों ने न सिर्फ परिवारों को जोड़ा, बल्कि पूरे समुदाय को नई पहचान दी। यह कहानी सिर्फ करौली की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है, जो मुश्किलों के आगे हार नहीं मानता।  


 
विज्ञापन
विज्ञापन