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Home› Misal Bemisal› Farmers Abandoning Rice And Wheat To Grow Ragi While Traders Reaching Out To Buy Produce

कम लागत, कम पानी और अच्छी कमाई: धान-गेहूं छोड़ मड़ुआ उगा रहे किसान, उपज खरीदने घर पहुंच रहे व्यापारी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 10 Oct 2026 04:33 PM IST
सार

  • झारखंड के कोडरमा जिले के हरिनो गांव में किसान मड़ुआ यानी रागी की खेती से आमदनी बढ़ा रहे हैं।

  • व्यापारी किसानों के घर और खलिहान पहुंचकर 33 रुपये प्रति किलो की दर से मड़ुआ खरीद रहे हैं।

  • धान और गेहूं की तुलना में मड़ुआ की खेती में कम लागत और कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है।

  • स्थानीय ग्रामीण भी घरेलू उपयोग के लिए सीधे किसानों से मड़ुआ खरीदते हैं।

मड़ुआ की खेती
मड़ुआ की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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झारखंड के कोडरमा जिले के चंदवारा प्रखंड स्थित हरिनो गांव के किसान मड़ुआ (रागी) की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस फसल की खासियत है कि इसमें धान और गेहूं के मुकाबले कम लागत और कम पानी की जरूरत होती है। साथ ही, किसानों को उपज बेचने के लिए बाजारों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ते। व्यापारी खुद गांव पहुंचकर किसानों से 33 रुपये प्रति किलो की दर से मड़ुआ खरीद रहे हैं। इससे किसानों का परिवहन खर्च और मेहनत बच रही है।

गांव में मड़ुआ की मांग स्थानीय स्तर पर भी है। आसपास के लोग घरेलू इस्तेमाल के लिए सीधे किसानों से इसे खरीदते हैं। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए आसानी से खरीदार मिल जाते हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलती है।

कम पानी और लागत में तैयार होती है फसल
किसानों के मुताबिक, धान और गेहूं की तुलना में मड़ुआ की खेती में खर्च कम आता है। इसे तैयार करने के लिए अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती। शुरुआती दौर में बारिश और बाद में खेत में पर्याप्त नमी मिलने पर फसल अच्छी तरह बढ़ सकती है। पानी और खाद पर कम खर्च होने से किसानों की लागत घटती है। यही वजह है कि किसान इसे वैकल्पिक फसल के रूप में अपना रहे हैं।

घर पहुंचकर उपज खरीद रहे व्यापारी
हरिनो गांव में मड़ुआ की मांग के कारण व्यापारी किसानों के घर और खलिहान तक पहुंच रहे हैं। वे 33 रुपये प्रति किलो के भाव से उपज खरीद लेते हैं। इससे किसानों को फसल बेचने के लिए दूर के बाजारों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

किसान अनिल पासवान बताते हैं कि धान और गेहूं की खेती में लागत और मेहनत ज्यादा लगती है, जबकि मड़ुआ की खेती में कम खर्च करके अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। किसान सुरेश यादव के मुताबिक, मड़ुआ की खेती से किसानों की कमाई बढ़ रही है। इसके पौष्टिक गुणों के कारण लोग भी इसे अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं। गांव के अन्य किसान भी अब इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं।

कैल्शियम और फाइबर से भरपूर है रागी
मड़ुआ यानी रागी एक पौष्टिक मोटा अनाज है। इसमें कैल्शियम, फाइबर और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि फाइबर पाचन को बेहतर बनाने और पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराने में सहायक होता है।

चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र कुमार के अनुसार, संतुलित आहार में रागी को शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके पोषक गुणों के कारण इसकी मांग बढ़ रही है। ऐसे में मड़ुआ की खेती किसानों के लिए कम लागत में आमदनी का एक अच्छा विकल्प बन सकती है।
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