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किसान का कमाल : धान-गेहूं छोड़ केले की खेती को बनाया कमाई का मॉडल, सहफसली से बढ़ी आमदनी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 30 Aug 2026 06:15 PM IST
सार

जितेंद्र केले के पौधों के बीच पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली और धनिया जैसी फसलें उगाते हैं। उनका कहना है कि केले की फसल तैयार होने में समय लगता है। इस दौरान पौधों के बीच खाली जगह में सब्जियां उगाकर अतिरिक्त कमाई की जा सकती है। 

धान-गेहूं छोड़ केले की खेती को बनाया कमाई का मॉडल
धान-गेहूं छोड़ केले की खेती को बनाया कमाई का मॉडल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पारंपरिक धान-गेहूं की खेती में बढ़ती लागत और सीमित आमदनी को देखते हुए इटावा के एक किसान ने खेती का तरीका बदलकर अपनी आय बढ़ाने की राह बनाई है। मेढ़ी दूधी गांव के किसान जितेंद्र कुमार पाठक करीब चार साल पहले केले की खेती शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने 2 एकड़ में केला लगाया, जो अब बढ़कर 5.5 एकड़ तक पहुंच गया है। जितेंद्र कुमार जी9 टिशू कल्चर केले की खेती कर रहे हैं। उनके खेती मॉडल की खास बात यह है कि वह केवल केले पर निर्भर नहीं हैं। केले के पौधों के बीच खाली जगह का इस्तेमाल करते हुए वह सहफसली खेती भी करते हैं। इससे एक ही खेत से अलग-अलग फसलों की आमदनी मिलती है।

केले के साथ सब्जियों की खेती
जितेंद्र केले के पौधों के बीच पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली और धनिया जैसी फसलें उगाते हैं। उनका कहना है कि केले की फसल तैयार होने में समय लगता है। इस दौरान पौधों के बीच खाली जगह में सब्जियां उगाकर अतिरिक्त कमाई की जा सकती है। सहफसली खेती से खेत की उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल होता है और किसान को मुख्य फसल के साथ दूसरी फसल से भी आय मिलती है।

पत्तागोभी से एक एकड़ में करीब एक लाख रुपये की आमदनी
जितेंद्र के अनुसार, एक एकड़ में करीब 20 हजार पत्तागोभी के पौधे लगाए जा सकते हैं। यदि एक पौधे से औसतन 5 रुपये की आय मानी जाए तो एक एकड़ से करीब एक लाख रुपये की पत्तागोभी की बिक्री हो सकती है। उनके मुताबिक पत्तागोभी की दो फसलें भी ली जा सकती हैं। पहली फसल सितंबर में लगाई जाती है, जो करीब 90 से 100 दिन में तैयार होकर खेत खाली कर देती है। इसके बाद दिसंबर में दूसरी फसल लगाई जा सकती है। इस तरह केले की मुख्य फसल के साथ पत्तागोभी से भी अतिरिक्त आमदनी का रास्ता बनता है।

एक एकड़ केले से करीब 5 लाख रुपये की बिक्री
जितेंद्र बताते हैं कि केले की एक एकड़ फसल से करीब 5 लाख रुपये तक की बिक्री हो सकती है। उनके अनुसार, एक एकड़ में लगभग 1,000 केले के पौधे लगाए जाते हैं। पिछले अनुभव के आधार पर उन्हें केले का भाव करीब 12 से 18 रुपये प्रति किलो तक मिला है। एक पौधे से औसतन 25 से 38 किलो तक उत्पादन प्राप्त हुआ। हालांकि केले की कीमत बाजार के हिसाब से बदलती रहती है। इसलिए किसान को उत्पादन के साथ-साथ बिक्री के लिए सही बाजार और समय का भी ध्यान रखना जरूरी है।

पहली फसल में अधिक लागत, रैटून में खर्च कम
जितेंद्र के मुताबिक, एक एकड़ केले की फसल तैयार करने में करीब एक लाख रुपये तक की लागत आती है। इसमें पौधे, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों का खर्च शामिल होता है। केले की खेती में दूसरे साल रैटून फसल का फायदा मिलता है। रैटून फसल में पहली फसल के बाद उसी पौधे से दोबारा उत्पादन लिया जाता है। इसलिए खेत में नए पौधे लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और लागत काफी कम हो जाती है।

पारंपरिक खेती से अलग मॉडल अपनाकर बढ़ाई आय
जितेंद्र कुमार पाठक का खेती मॉडल दिखाता है कि किसान मुख्य फसल के साथ सहफसली खेती को अपनाकर खेत से मिलने वाली आमदनी बढ़ा सकते हैं। केले जैसी लंबी अवधि की फसल के बीच कम अवधि वाली सब्जियां लगाने से खेत की खाली जगह का उपयोग होता है और किसान को फसल तैयार होने का इंतजार भी नहीं करना पड़ता। 

धान-गेहूं की पारंपरिक खेती से अलग रास्ता अपनाकर जितेंद्र ने केला + सहफसल को अपनी कमाई का मॉडल बनाया है। अब वह 5.5 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं और दूसरे किसानों को भी बाजार, पानी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसी फसल प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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