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Madhavpur Fair Tradition And History Love Story Of Krishna Rukmini Becomes Celebration Of Cultural Unity
माधवपुर मेला : जहां कृष्ण-रुक्मिणी की प्रेम कथा बनती है सांस्कृतिक एकता का उत्सव, जानें; परंपरा और इतिहास
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 29 Mar 2026 07:21 PM IST
सार
गुजरात के पोरबंदर जिले के गांव माधवपुर में लगने वाला मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की उस पौराणिक कथा की याद दिलाता है, जो भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और साहस का प्रतीक मानी जाती है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत में ऐसे कई पर्व और मेले हैं, जो इतिहास, आस्था और परंपरा को एक साथ जीवंत कर देते हैं। गुजरात का माधवपुर मेला भी ऐसा ही एक अद्भुत उत्सव है, जहां धर्म और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
अरब सागर के किनारे गुजरात के पोरबंदर जिले में बसे शांत और सुंदर गांव माधवपुर (घेड़) हर साल रामनवमी के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक उत्सव का गवाह बनता है। यह पांच दिनों तक चलने वाला माधवपुर मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाता है। साल 2026 में यह मेला 27 से 31 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर से कलाकार और श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं।
भगवान कृष्ण और रुक्मिणी का हुआ विवाह
यह मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की उस पौराणिक कथा की याद दिलाता है, जो भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और साहस का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने कुंदनपुर से रुक्मिणी का हरण कर उन्हें अपने साथ लाए और माधवपुर में ही उनका विवाह संपन्न हुआ। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक घटना की स्मृति में हर वर्ष यह मेला आयोजित किया जाता है।
Madhavpur is believed to be the place where Shri Krishna and Devi Rukmini were married. Every year, this story comes alive through celebrations at Madhavpur Fair 2026. So, plan your trip this year and be part of this fair.
देशभर से जुटते हैं श्रद्धालु
मेले की सबसे खास बात है श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी, जिसे देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इसके साथ ही लोक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस उत्सव को और भी जीवंत बना देते हैं। खास बात यह है कि इस मेले में गुजरात के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत के कलाकार भी हिस्सा लेते हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है।
Come witness the divine wedding of Lord Krishna and Devi Rukmini, a timeless celebration brought alive at Madhavpur Fair 2026. Experience vibrant cultural performances from Gujarat and the North East and feel the true spirit of Ek Bharat Shreshtha Bharat. Happening at Madhavpur… pic.twitter.com/dSFcw6NYrv
सांस्कृतिक उत्सव की दिखती है झलक
माधवपुर मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रंग-बिरंगी संस्कृति का जीवंत उत्सव है। यहां आने वाले लोग भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की पौराणिक कथा के साथ-साथ गुजरात की समृद्ध परंपराओं को करीब से महसूस करते हैं। मेले में पारंपरिक हस्तशिल्प की आकर्षक प्रदर्शनी, स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजन और लोक कला की झलक देखने को मिलती है। इसके साथ ही समुद्र तट की प्राकृतिक खूबसूरती इस अनुभव को और भी यादगार बना देती है।
माधवपुर मेले पर पीएम मोदी का संदेश
माधवपुर मेले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस उत्सव को भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि माधवपुर मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाला जीवंत उत्सव है। यह गुजरात और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों को भी उजागर करता है।
My best wishes for the ongoing Madhavpur Mela taking place in Porbandar, Gujarat.
This vibrant celebration highlights our glorious culture and at the same time it reinforces the timeless cultural bond between Gujarat and the Northeast.
उन्होंने अपने संदेश में कहा, “यह उत्सव विभिन्न परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं सभी से इस मेले में आने का आह्वान करता हूं।” प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह संदेश साझा किया। इससे पहले वे अप्रैल 2022 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी माधवपुर मेले के महत्व और भारतीय संस्कृति में इसकी खास भूमिका पर प्रकाश डाल चुके हैं।
कैसे पहुंचे?
माधवपुर पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन पोरबंदर है, जो यहां से लगभग 58 किलोमीटर दूर है। पोरबंदर से बस या टैक्सी के माध्यम से आसानी से माधवपुर पहुंचा जा सकता है। अगर आप धार्मिक आस्था, इतिहास और संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो माधवपुर मेला आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकता है।
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