विज्ञापन
Home› Lokrang› Entertainment› Karnataka Deputy Cm Parameshwara Seeks Centre S Intervention For Rs 22 400 Crore Drought Relief

कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र से सूखा राहत के लिए मांगी मांगी 22,400 करोड़ की आर्थिक सहायता

गांव जंक्शन डेस्क, बेंगलुरु (कर्नाटक) Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 03 Nov 2026 08:55 PM IST
सार

कर्नाटक ने संशोधित मानदंडों के बाद सूखा राहत की मांग बढ़ाकर 22,400.58 करोड़ रुपये कर दी है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखा।

सूखे से राज्य के 226 तालुकों में 57.93 लाख हेक्टेयर में फसलों को भारी नुकसान हुआ।
सूखे से राज्य के 226 तालुकों में 57.93 लाख हेक्टेयर में फसलों को भारी नुकसान हुआ। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री व राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर केंद्रीय सूखा सहायता की 22,400.58 करोड़ रुपये की राशि जल्द मंजूर कर जारी करने की मांग की है।

2 नवंबर के अलग-अलग पत्रों में उन्होंने राज्य की संशोधित कुल मांग बताई और तीनों केंद्रीय नेताओं से मिलने का समय मांगा ताकि ज्ञापन खुद रखकर कृषि संकट की गंभीरता समझा सकें।

226 तालुकों में 57.93 लाख हेक्टेयर में फसलों को नुकसान
उन्होंने कहा कि सूखे से राज्य के 226 तालुकों में 57.93 लाख हेक्टेयर में फसलों को भारी नुकसान हुआ। अनुमानित आर्थिक नुकसान 62,481.88 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे लाखों किसान परिवार, खासकर छोटे-सीमांत किसान, गंभीर वित्तीय संकट में हैं।

परमेश्वर ने बताया कि गृह मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना से 2026-27 से 2030-31 के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के तहत सहायता मानदंड संशोधित किए हैं। इसके बाद फसल हानि इनपुट सब्सिडी की जरूरत 6,128.70 करोड़ से बढ़कर 7,943.55 करोड़ रुपये हो गई, यानी 1,814.85 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।  

इससे राज्य की कुल संचयी जरूरत 20,585.73 करोड़ से बढ़कर 22,400.58 करोड़ रुपये हो गई। पहले दिए ज्ञापन के बाकी घटक अपरिवर्तित हैं।

दरों पर आपत्ति
केंद्र के मानदंड संशोधन का स्वागत करते हुए उन्होंने चिंता जताई कि बढ़ी दरें खेती की बढ़ती लागत, जलवायु आपदाओं और किसानों की वित्तीय कमजोरी को देखते हुए अपर्याप्त हैं। असिंचित फसलों के लिए 11,000 रुपये, सिंचित के लिए 22,000 और बारहमासी फसलों के लिए 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की संशोधित दरें बीज, उर्वरक, कृषि श्रम, सिंचाई और अन्य जरूरी खर्च को सही नहीं दर्शातीं। 

उन्होंने पत्र में कहा, "हमारे किसानों से 2026 की आर्थिक सच्चाइयों का सामना ऐसे राहत ढांचे के साथ करने की उम्मीद नहीं की जा सकती जो खेती की वास्तविक लागत और उनके नुकसान को पर्याप्त रूप से न पहचानता हो।" उन्होंने कहा कि आपदा सहायता से किसानों को नुकसान से उबरने, आजीविका बहाल करने और खेती फिर शुरू करने में सार्थक वित्तीय मदद मिलनी चाहिए।

ये हैं पात्रता के आंकड़े
परमेश्वर ने आपदा सहायता की पात्रता तय करने के लिए कृषि जनगणना 2015-16 पर निरंतर निर्भरता पर चिंता जताई। उनके मुताबिक दशक पुराने भूमि आंकड़े मौजूदा कृषि वास्तविकता नहीं दर्शाते और पात्र छोटे-सीमांत किसान वंचित हो सकते हैं। उन्होंने केंद्र से लाभार्थी पहचान के लिए कर्नाटक के 'फ्रूट्स' डेटाबेस को अधिक समकालीन और सत्यापित तंत्र मानने का आग्रह किया। साथ ही खेती की यथार्थ लागत, अद्यतन भूमि रिकॉर्ड, आजीविका की मजबूत सुरक्षा और बढ़ती जलवायु आपदाओं के अनुरूप सहायता के लिए मौजूदा आपदा-सहायता ढांचे की व्यापक समीक्षा की जरूरत बताई।

विकसित भारत का हवाला
2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा का जिक्र करते हुए परमेश्वर ने कहा, "विकसित भारत ऐसी कृषि अर्थव्यवस्था पर नहीं बन सकता जिसमें एक विफल मानसून सालों की मेहनत मिटा दे, परिवार की बचत खत्म कर दे और कृषकों की एक पीढ़ी को अनिश्चितता में धकेल दे।" उन्होंने यह भी कहा, "राष्ट्र की प्रगति की सच्ची कसौटी सिर्फ यह नहीं कि किसान अच्छे साल में कितना उपजाते हैं, बल्कि यह भी कि संकट के साल में हम कितनी मजबूती से उनके साथ खड़े होते हैं।"

उन्होंने प्रधानमंत्री और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से राज्य की संशोधित जरूरत पर ध्यान देने, दावे का मूल्यांकन तेज करने और स्वीकार्य वित्तीय सहायता जल्द मंजूर कर जारी करने का आग्रह दोहराया। सहकारी संघवाद की भावना से केंद्र-राज्य सहयोग बढ़ाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि किसान कल्याण राजनीतिक और प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर है।

कर्नाटक के किसान परिवारों को सूखे से उबरने के लिए समय पर वित्तीय सहायता और निष्पक्ष राहत ढांचा चाहिए।

 
विज्ञापन
विज्ञापन