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72 साल बाद परदे पर लौटा गरीब किसान शंभू : बिमल रॉय की 'दो बीघा जमीन' का वेनिस में वर्ल्ड प्रीमियर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 12 Jul 2025 09:07 PM IST
सार

Do Bigha Zamin Film: वर्ष 1953 में बनी 'दो बीघा जमीन' हिंदी फिल्म करीब सात दशक पहले के भारत में जमींदारी और गरीब किसानों की दशा को बयां करती है। बिमल रॉय की इस मशहूर फिल्म को अब रिस्टोर किया गया है। इस फिल्म का 4K वर्जन 2025 के वेनिस फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए तैयार है। 

दो बीघा जमीन को एक अमीर जमींदार के चंगुल से बचाने के लिए जूझते एक किसान की कहानी।
दो बीघा जमीन को एक अमीर जमींदार के चंगुल से बचाने के लिए जूझते एक किसान की कहानी। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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Do Bigha Zamin Film: मुंबई से ताजा अपडेट है कि बिमल रॉय की मशहूर फिल्म 'दो बीघा जमीन' (1953) का रिस्टोर किया गया 4K वर्जन वर्ष 2025 के वेनिस फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए तैयार है। ये एलान शनिवार 12 जुलाई को बिमल रॉय के 116वें जन्मदिन पर किया गया है.

इस रेस्टोरेशन का काम फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने द क्राइटेरियन कलेक्शन और जेनस फिल्म्स के साथ मिलकर किया है। फेस्टिवल में बिमल रॉय के परिवार के लोग- बेटियां रिंकी रॉय भट्टाचार्य, अपराजिता रॉय सिन्हा और बेटा जॉय बिमल रॉय- साथ ही फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के डायरेक्टर शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर भी मौजूद रहेंगे।

फिल्म का गौरवशाली इतिहास
'दो बीघा जमीन' को भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर माना जाता है। 1954 में इस फिल्म ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रिक्स इंटरनेशनल पुरस्कार जीता, जो पहली भारतीय फिल्म थी जिसने ये सम्मान हासिल किया। इसके अलावा, करलोवी वैरी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी इसे तारीफ मिली और पहले फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर का खिताब जीता। 

'दो बीघा जमीन' फिल्म रबींद्रनाथ टैगोर की एक कविता से प्रेरित है, जिसकी स्क्रिप्ट सलिल चौधरी ने लिखी है। गुलजार, जिन्होंने बिमल रॉय के साथ 'काबुलीवाला' (1961) में असिस्टेंट के तौर पर काम शुरू किया, कहते हैं कि बिमल दा की हर फिल्म साहित्य पर आधारित थी।

रेस्टोरेशन की लंबी जद्दोजहद
इस फिल्म का रेस्टोरेशन 2022 में शुरू हुआ और तीन साल से ज्यादा वक्त लगा। इसके लिए नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया और ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट में रखे मूल निगेटिव्स का इस्तेमाल किया गया। 

'दो बीघा जमीन' फिल्म की कहानी
फिल्म में एक गरीब किसान की कहानी है, जो अपनी जमीन बचाने के लिए बेटे के साथ शहर चला जाता है। ये फिल्म शहरी गरीबी और ग्रामीण विस्थापन को हकीकत के आईने में दिखाती है, और इसमें बलराज साहनी का अभिनय आज भी याद किया जाता है। बिमल रॉय ने इसे विटोरियो डे सिका की 'बाइसिकल थीव्स' से प्रेरणा लेकर बनाया था।

फिल्म में गरीब किसान शंभू (बलराज साहनी) अपनी दो बीघा जमीन को एक अमीर जमींदार के चंगुल से बचाने के लिए रिक्शा चलाने के लिए कलकत्ता जाकर रिक्शा चलाने को मजबूर हो जाता है। हालांकि, सड़कों पर सोने वाले हजारों गरीब लोगों की तरह, शंभू की किस्मत भी साथ नहीं देती और बदकिस्मती से उसे अपनी जमीन गंवानी पड़ती है। 

बिमल रॉय की विरासत
बिमल रॉय को भारत के सबसे बड़े फिल्ममेकर्स में गिना जाता है। उन्होंने 1950-60 के स्वर्णिम युग में सामाजिक मुद्दों को अनूठे अंदाज में पेश किया। 56 साल की उम्र में 1966 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्में आज भी प्रेरणा देती हैं।
 
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