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Home› Kheti Kisani› Up Lalitpur To Become The First Natural Farming District Gaushalas Cow Shelters Will Boost The Economy

UP: ललितपुर बनेगा पहला नेचुरल फार्मिंग जिला, अर्थव्यवस्था को रफ्तार देंगी गोशालाएं, गोबर से बनेंगे तमाम उत्पाद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 19 Oct 2026 05:55 PM IST
सार

  • ललितपुर बनेगा यूपी का पहला पायलट प्राकृतिक खेती जिला
  • गोशालाओं में गोबर से खाद, जैविक कीटनाशक और उपयोगी उत्पाद बनेंगे
  • किसानों को स्थानीय स्तर पर मिलेंगे प्राकृतिक खेती के इनपुट
  • नाबार्ड से किसान समूहों को मिलेगा वित्तीय सहयोग
  • गोबर से बायोगैस और कम्प्रेस्ड बायोगैस बनाने की भी तैयारी

यूपी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में गोशालाओं को एक केंद्र के रूप में विकसित
यूपी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में गोशालाओं को एक केंद्र के रूप में विकसित - फोटो : ati
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार गोशालाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के विकास में योगदान देने वाले एक केंद्र की तरह विकसित करना चाहती है। इसके लिए प्रदेश सरकार गोशालाओं से निकलने वाले गोबर और दूसरे जैविक संसाधनों का उपयोग कर प्राकृतिक खेती का एक आत्मनिर्भर मॉडल तैयार कर रही है।

इस नई योजना के तहत ललितपुर जिले को प्रदेश के पहले पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य गोशालाओं की आमदनी बढ़ाना और किसानों को स्थानीय स्तर पर खाद-बीज देकर उनकी फसलों के लिए बाजार तैयार करना है।

गोशालाओं में बनेगी प्राकृतिक खाद और उपयोगी उत्पाद
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, CM के निर्देश पर इस योजना की शुरुआत की जा रही है। इसे लेकर गो सेवा आयोग और नाबार्ड (NABARD) के अधिकारियों के बीच बैठक कर रूपरेखा तैयार की गई है।

प्रस्तावित योजना के तहत गोशालाओं के गोबर से प्राकृतिक खाद, जैविक कीटनाशक, वर्मी कम्पोस्ट, गो-काष्ठ (गोबर की लकड़ी) और पंचगव्य से जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे। ये उत्पाद सीधे स्थानीय किसानों को दिए जाएंगे। इससे गोशालाओं को कमाई का नया साधन मिलेगा और किसानों को बाजार से महंगी रासायनिक खाद नहीं खरीदनी पड़ेगी।

खेत से लेकर बाजार तक की बनेगी पूरी व्यवस्था
ललितपुर में इस पायलट प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद, इसके अनुभवों के आधार पर प्रदेश के हर मंडल के एक-एक जिले में ऐसी व्यवस्था शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, योजना का मकसद केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों के उत्पादों को सही बाजार दिलाना भी है।

इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों की मदद ली जाएगी। इनके जरिए फसलों को इकट्ठा करने, उनकी सफाई, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बिक्री की पूरी एक संगठित व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।

नाबार्ड से मिलेगा लोन, बायोगैस से बनेगी ऊर्जा
इस पूरे मॉडल को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए नाबार्ड के जरिए किसान समूहों और पात्र किसानों को लोन और वित्तीय मदद दी जाएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक किसानों व गोशाला संचालकों को तकनीकी प्रशिक्षण देंगे।

योजना में गोशालाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऊर्जा उत्पादन को भी शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, बड़ी और उपयुक्त गोशालाओं में गोबर आधारित बायोगैस और कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने की भी तैयारी की जा रही है। इससे गोबर का इस्तेमाल खाद बनाने के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी हो सकेगा।


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