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त्योहारी सीजन में बाहर खाना महंगा : मेन्यू से गायब हो रहे महंगे आइटम, कैफे-फाइन-डाइन चेन ने घटाया थाली का आकार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 19 Oct 2026 09:10 AM IST
सार

  • महंगाई और साफ-सफाई के नियमों से रेस्तरां का खर्च बढ़ा
  • अक्टूबर की शुरुआत से खाने की कीमतों में 4 से 5 फीसदी की बढ़ोतरी
  • महंगे आइटम हटाकर और पोर्शन घटाकर मेन्यू में बदलाव कर रहे रेस्तरां
  • मुंबई के रेस्तरां में 10 से 15 फीसदी तक दाम बढ़ने की तैयारी
  • खाद्य सामग्री, एलपीजी, कर्मचारियों और संचालन की लागत बनी बड़ी चुनौती
     

खाद्य महंगाई समते कई दूसरे कारकों ने रेस्तरां और कैफे का गणित बिगाड़ने का काम किया है।
खाद्य महंगाई समते कई दूसरे कारकों ने रेस्तरां और कैफे का गणित बिगाड़ने का काम किया है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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त्योहारी सीजन के दौरान खाने-पीने की चीजों की बढ़ती महंगाई और साफ-सफाई के नियमों पर हो रहे भारी खर्च के कारण रेस्तरां और कैफे को कई बड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत से कीमतों में 4 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा, रेस्तरां मेन्यू से महंगे आइटम हटा रहे हैं, खाने की मात्रा (पोर्शन) कम कर रहे हैं, या छोटे भोजन (स्मॉल मील) पेश कर रहे हैं।

महंगाई का असर और मेन्यू में बदलाव
सितंबर महीने में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई है। इसमें खाने का तेल, चीनी, प्याज, अदरक, लहसुन और अन्य सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आया है। 'बिरयानी ब्लूज़' (Biryani Blues) के सह-संस्थापक रेमंड एंड्रयूज के अनुसार, हमने अपनी बिरयानी रेंज में कुछ ऐसे महंगे विकल्पों को देना फिलहाल रोक दिया है, जिनमें ज्यादा लागत वाली सामग्री लगती है।

एशियन फूड चेन 'काइलिन' (Kylin) के प्रबंध निदेशक सौरभ खनीजो का कहना है कि अब ग्राहकों के साथ महंगाई का कुछ बोझ बांटने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है, हालांकि कुछ खर्च वे खुद भी उठाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह मौजूदा महंगाई इस साल मार्च-अप्रैल में (पश्चिम एशिया युद्ध के चरम पर) हुए एलपीजी गैस आपूर्ति संकट की तुलना में ज्यादा लंबा और गहरा असर डाल रही है।

साफ-सफाई के कड़े नियमों से बढ़ा खर्च
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा खाद्य सुरक्षा, साफ-सफाई, भंडारण (स्टोरेज) और लाइसेंस से जुड़े नियमों पर की जा रही सख्ती के कारण भी रेस्तरां का खर्च काफी बढ़ गया है।

अधिकारियों के अनुसार, इस 'हाइजीन सर्ज' (साफ-सफाई के कारण बढ़े खर्च) में अतिरिक्त ऑडिट स्टाफ रखना, अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करना, जांच के लिए बाहरी लैब की मदद लेना और अपनी कानूनी टीम को मजबूत करना शामिल है। दिल्ली के एक प्रमुख रेस्तरां चेन के प्रमुख (जिन्होंने अपना नाम न छापने का अनुरोध किया) ने बताया, "अब नियामकों के कई ऐसे नियम हैं जिनका असर छोटे ऑपरेटरों से लेकर बड़ी चेन तक, हर किसी पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, हम डीप फ्राई करने वाले तेल को तय मानक से भी जल्दी बदल रहे हैं ताकि नियामक हम पर कोई सवाल न उठाएं। इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा हम ग्राहकों पर डाल रहे हैं।"

मुंबई में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं दाम
रेस्तरां मालिकों को गैस, पानी, और कर्मचारियों के खर्च के साथ-साथ एग्रीगेटर कंपनियों के कमीशन और छूट (डिस्काउंट) देने के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। 'तत्व बार एंड कैफे' (Tattva Bar & Cafe) चलाने वाले पेनिनसुला रेडपाइन के निदेशक शशांक शेट्टी के अनुसार, बहुत कम दाम पर काम करने वाले नए प्रतिद्वंद्वियों के बाजार में आने से मुनाफा बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।

हाल ही में, इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) ने एक बयान जारी कर बताया कि मुंबई के रेस्तरां कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहे हैं। AHAR के अध्यक्ष विजय के. शेट्टी के अनुसार, यह बढ़ोतरी खाना तैयार करने और परोसने की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण की जा रही है।

मुंबई के आईटीसी ग्रैंड सेंट्रल के एफ एंड बी (F&B) मैनेजर अवनीश चतुर्वेदी ने बताया कि राशन, कर्मचारियों, किराये और बिजली-पानी के बिल बढ़ने से संचालन का कुल खर्च बढ़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि रेस्तरां अपने मेन्यू में सूझ-बूझ से बदलाव करके, सही तरीके से खरीदारी करके, खाने की बर्बादी रोककर और काम करने के तरीके में सुधार लाकर इस बढ़ती लागत के दबाव को कम कर सकते हैं।


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