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रबी में मटर की खेती से डबल फायदा : अच्छी कमाई संग सुधरेगी मिट्टी की सेहत, ये किस्में देंगी बंपर उपज...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 19 Oct 2026 04:37 PM IST
सार

  • रबी सीजन में मटर की खेती से किसानों को दोहरा फायदा...
  • मटर की खेती से मिट्टी की सेहत में होगा सुधार
  • किसान बंपर उपज देने वाली पंजाब 89 और मीठी फली जैसी किस्मों का चुनाव कर सकते हैं
  • बेहतर उपज और गुणवत्ता के लिए बीज उपचार, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण जरूरी
  • इन प्रमुख कीटों और रोगों से बचाने की सलाह

रबी सीजन में मटर की खेती से किसानों को दोहरा लाभ।
रबी सीजन में मटर की खेती से किसानों को दोहरा लाभ। - फोटो : Ai
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विस्तार
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रबी सीजन में मटर की खेती से किसान दोहरा फायदा ले सकते हैं। एक तरफ अगेती किस्मों की बुवाई से किसान अच्छा मुनाफा कम सकते हैं, तो दूसरी तरफ यह फसल मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाने का काम करती है। बिगड़ती मिट्टी की सेहत के बीच जानकार किसानों को फसल चक्र में मटर जैसी दलहन फसलों को शामिल करने की सलाह देते हैं।

हवा से नाइट्रोजन सीधे पौधे तक पहुंचती है
मटर सर्दियों के लिए एक बेहतरीन सब्जी है क्योंकि यह ठंडे मौसम में अच्छी तरह विकसित होती है और इसे नाइट्रोजन वाले उर्वरकों की कम जरूरत पड़ती है। जानकारों के अनुसार, मटर की जड़ों की गांठों में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो हवा में मौजूद नाइट्रोजन को खींचकर पौधे तक पहुंचाते हैं। इस तरह मिट्टी की सेहत में सुधार होता है।

ये किस्में देंगी बंपर उपज 
जानकारों के अनुसार, किसान बंपर उपज के लिए पंजाब 89 और मीठी फली जैसी किस्मों का चुनाव कर सकते हैं। पंजाब 89 किस्म के चुनाव के किसान बेहतर विकास और गहरे हरे रंग की फलियां हासिल कर सकते हैं। यह किस्म 60 क्विंटल प्रति एकड़ की उच्च उपज के लिए भी जानी जाती है। इसके अलावा मीठी फली किस्म को बिना छिले पूरी फली को एक साथ खाया जाता है। इस तरह पारंपरिक किस्मों के मुकाबले यह खाने योग्य लगभग दोगुना उपज देती है।

बुवाई और बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में पहली बार मटर उगाई जा रही है, वहां बीजों को राइजोबियम लेग्युमिनोसारम से जरूर उपचारित करें। इससे पौधों का विकास, फलियों की गुणवत्ता और कुल पैदावार बढ़ती है। फसल के अच्छे उत्पादन के लिए पौधों के बीच सही दूरी, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है। जैविक खेती में नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने के लिए धान की पराली का इस्तेमाल काफी कारगर साबित हो सकता है।

वैज्ञानिकों ने किसानों को कुछ आम कीड़े और बीमारियों के प्रति भी आगाह किया है। इनमें चेपा, थ्रिप्स, लीफ माइनर और स्टेम फ्लाई जैसे कीट और पाउडरी मिल्ड्यू, रतवा, जड़ सड़न और सफेद सड़न जैसी बीमारियां शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नुकसान से बचने के लिए किसानों को समय पर बुवाई, खेत की साफ-सफाई, फसल चक्र और जैविक उपचार का गंभीरता से पालन करना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता अब स्वस्थ और टिकाऊ तरीके से उगाए गए भोजन को पसंद कर रहे हैं, ऐसे में मटर की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने और पर्यावरण बचाने का एक शानदार अवसर है।


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