19 अक्तूबर से शुरू होने वाले हफ्ते के दौरान उत्तर भारत में मौसम शुष्क और साफ रहेगा। ऐसे में यहां के किसान अपनी कटाई और बुवाई का काम बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं। लेकिन, देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और आंधी का अनुमान है।
भारी बारिश वाले इलाकों के लिए कृषि सलाह
IMD के अनुसार, तमिलनाडु, केरल, तटीय और दक्षिणी अंदरूनी कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में भारी बारिश को देखते हुए किसानों को खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है। धान, केला, कपास, हल्दी, गन्ना और सब्जियों के खेतों में पानी जमा होने से रोकने की सख्त सलाह दी गई है।
किसानों से कहा गया है कि वे धान, मूंगफली और मक्का जैसी तैयार हो चुकी फसलों की कटाई तभी करें जब मौसम साफ हो और बारिश रुकी हुई हो। काटी गई उपज को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, IMD ने यह भी स्पष्ट किया है कि बारिश के दौरान खेतों में किसी भी तरह के खाद या कीटनाशक दवा का छिड़काव बिल्कुल न करें और कृषि से जुड़े अन्य काम भी कुछ समय के लिए टाल दें।
तेज हवाओं और आंधी से बचाव के उपाय
जिन इलाकों में तेज हवाएं चलने और आंधी का अलर्ट है, वहां के लिए IMD ने किसानों को अपनी काटी गई फसल को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की सलाह दी है। यदि फसल खेत में ही है, तो उसे तिरपाल से अच्छी तरह ढकने और मजबूती से बांधने को कहा गया है ताकि तेज हवा से उपज उड़ न जाए। इसके अलावा, केले, पपीते और अन्य सब्जियों व फलों के छोटे पौधों को तेज हवा से गिरने और टूटने से बचाने के लिए लकड़ी या अन्य किसी सहारे से बांधने की सलाह दी गई है।
मवेशियों और मछली पालन के लिए निर्देश
फसलों के साथ-साथ पशुपालकों के लिए भी IMD ने खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारी बारिश के दौरान सभी मवेशियों को शेड या सुरक्षित छत के नीचे रखने को कहा गया है। पशुओं के चारे को नमी और खराब होने से बचाने के लिए उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। मछली पालकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने तालाबों के किनारों पर पानी निकलने का उचित रास्ता बनाएं और जाली (नेटिंग) लगाएं, ताकि तालाब में पानी ज्यादा भर जाने की स्थिति में मछलियां बाहर न बह सकें।