इस रबी कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाने के लिए किसान चुकंदर की खेती का चुनाव कर सकते हैं। इस फसल की लगभग पूरी साल मांग रहती है, क्योंकि इसे सलाद से अचार तक में उपयोग किया जाता है।
यह फसल खेत की मिट्टी में पोषक तत्व भी बढ़ाती है।
खेत की तैयारी और सही समय
जानकार चुकंदर की बुवाई के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक का समय उपयुक्त बताते हैं। इसके लिए जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेती शुरू करने से पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है। इसके बाद पौधों को शुरुआती पोषण देने के लिए मिट्टी में गोबर की खाद या जैविक कंपोस्ट मिलाई जाती है।
बुवाई और सिंचाई का सही तरीका
एक एकड़ खेत में चुकंदर की बुवाई के लिए 4 से 5 किलो बीज की खपत होती है। बुवाई के दौरान कतारों के बीच 30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए। बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए ताकि अंकुरण अच्छी तरह हो सके। इसके बाद हर 10 से 15 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि खेत में पानी का भराव न हो, अन्यथा चुकंदर की जड़ें सड़ सकती हैं।
कम समय में तैयार होती है फसल
चुकंदर की एक बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए बेहद कम निवेश की आवश्यकता होती है। शुरुआती फसल महज 25 से 30 दिनों में ही बाजार में भेजने के लिए तैयार होने लगती है, जिससे किसानों को आमदनी के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। वहीं, पूरी फसल को पूर्ण रूप से तैयार होने में लगभग 90 से 100 दिन का समय लगता है। अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवार पर नियंत्रण करना चाहिए। साथ ही, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे तत्वों का संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। किसान इस फसल के साथ मूली, गाजर और गोभी जैसी सब्जियां भी आसानी से उगा रहे हैं।
लागत कम और कई गुना मुनाफा
किसानों के अनुसार, चुकंदर की जड़ जितनी बड़ी और लाल रंग की होती है, बाजार में उसके दाम उतने ही अच्छे मिलते हैं। इसलिए खुदाई के समय सावधानी बरतनी चाहिए ताकि जड़ें क्षतिग्रस्त न हों।
जानकारों के अनुसार, एक एकड़ में चुकंदर की खेती से किसान 80 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं। हालांकि यह मुनाफा बाजार भाव ओर मौसम जैसे कारकों पर भी निर्भर करता है।