विज्ञापन
Home› Kheti Kisani› Tomato Cultivation When To Fertilize Spray Pesticides Understand Complete Schedule In Five Steps

टमाटर की खेती : कब दें खाद और कब करें दवा का छिड़काव? 5 चरणों में समझें पूरा शेड्यूल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 25 Sep 2026 05:11 PM IST
सार

टमाटर की फसल में 0 से 15 दिन, 15 से 30 दिन, फूल आने, फल सेटिंग और फल विकास की अवस्था में पोषण की जरूरत बदलती है। ड्रिप फर्टिगेशन, कीट-रोग की नियमित निगरानी और सही समय पर फसल सुरक्षा उपाय अपनाकर किसान फसल की गुणवत्ता बेहतर रख सकते हैं।

टमाटर की खेती
टमाटर की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

टमाटर की फसल में अच्छी पैदावार के लिए केवल खाद देना ही काफी नहीं है। रोपाई के बाद पौधे की बढ़वार, फूल आने, फल बनने और फल विकास की हर अवस्था में पोषण और कीट-रोग प्रबंधन का अलग महत्व है। सही समय पर पोषक तत्व देने और फसल की नियमित निगरानी करने से पौधों की बढ़वार, फल सेटिंग और फल की गुणवत्ता बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। किसान टमाटर की फसल को रोपाई से लेकर फल विकास तक पांच चरणों में बांटकर खाद और फसल सुरक्षा का प्रबंधन कर सकते हैं।

1- रोपाई के बाद 0 से 15 दिन
रोपाई के बाद शुरुआती 15 दिनों में पौधों की जड़ों और नई बढ़वार पर विशेष ध्यान दें। ड्रिप के जरिए फर्टिगेशन करने से पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिल सकते हैं। प्रति एकड़ 12:61:00 की 1 किलो, ह्यूमिक एसिड की 250 ग्राम और कैल्शियम नाइट्रेट की 2 किलो मात्रा दी जा सकती है। इस दौरान जड़ सड़न के लक्षणों पर नजर रखें। थ्रिप्स और सफेद मक्खी जैसे कीटों की भी नियमित निगरानी करें। कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल समस्या की पहचान और उत्पाद के पंजीकृत लेबल निर्देश के अनुसार ही करें।

2- बढ़वार अवस्था : 15 से 30 दिन
रोपाई के 15 से 30 दिन के बीच टमाटर के पौधों में तेजी से बढ़वार होती है। इस समय संतुलित पोषण देने से पौधों के विकास में मदद मिलती है। प्रति एकड़ ड्रिप से 19:19:19 की 2 किलो, सीवीड एक्सट्रैक्ट की 250 मिलीलीटर और मैग्नीशियम सल्फेट की 2 किलो मात्रा दी जा सकती है। इस अवस्था में लीफ माइनर और थ्रिप्स पर नजर रखें। पत्तियों पर धब्बे या झुलसा रोग के लक्षण दिखें तो फसल की जांच कर उचित फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।

3- फूल आने की अवस्था : 30 से 45 दिन
टमाटर में 30 से 45 दिन के बीच फूल आने लगते हैं। इस समय संतुलित पोषण और पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। पोषक तत्वों की कमी से फूल और आगे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। प्रति एकड़ ड्रिप से 00:52:34 की 2 किलो, बोरॉन की 250 ग्राम और कैल्शियम नाइट्रेट की 3 किलो मात्रा दी जा सकती है। फूल झड़ने की समस्या पर नजर रखें और खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें। किसी ग्रोथ रेगुलेटर का इस्तेमाल करने से पहले उसके लेबल पर दी गई फसल, मात्रा और उपयोग विधि जरूर जांचें।

4- फल सेटिंग अवस्था : 45 से 65 दिन
टमाटर में 45 से 65 दिन के बीच फल बनना शुरू हो जाते हैं। इस अवस्था में पोटाश और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। प्रति एकड़ ड्रिप से 13:00:45 की 2 किलो, SOP (00:00:50) की 2 किलो और कैल्शियम नाइट्रेट की 3 किलो मात्रा दी जा सकती है। इस दौरान फल छेदक कीट और बैक्टीरियल रोगों की नियमित निगरानी करें। कैल्शियम नाइट्रेट और सल्फेट वाले उर्वरकों को एक ही टैंक में न मिलाएं। दोनों को अलग-अलग समय पर देने से जमाव और अवांछित रासायनिक प्रतिक्रिया का खतरा कम किया जा सकता है।

5- फल विकास अवस्था : 65 दिन के बाद
65 दिन के बाद टमाटर के फलों का आकार और गुणवत्ता बेहतर करने के लिए संतुलित पोषण देना जरूरी है। इस अवस्था में प्रति एकड़ ड्रिप से SOP (00:00:50) की 3 किलो, मैग्नीशियम सल्फेट की 2 किलो और अमीनो एसिड की 250 मिलीलीटर मात्रा दी जा सकती है। फसल में झुलसा रोग और रस चूसने वाले कीटों की नियमित निगरानी करें। लक्षण दिखाई देने पर समस्या की सही पहचान कर पंजीकृत दवा का इस्तेमाल करें। दवा की मात्रा हमेशा लेबल के अनुसार रखें और अनावश्यक छिड़काव से बचें।

टमाटर में कीट-रोग की नियमित निगरानी जरूरी
टमाटर की फसल में थ्रिप्स, सफेद मक्खी, लीफ माइनर और फल छेदक जैसे कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं अलग-अलग मौसम और खेत की परिस्थितियों में झुलसा, जड़ सड़न और बैक्टीरियल रोग जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

इसलिए केवल कैलेंडर के आधार पर बार-बार दवा का छिड़काव करने के बजाय खेत की नियमित निगरानी कर समस्या की पहचान के बाद ही उपचार करना बेहतर है। दवा की मात्रा हमेशा संबंधित उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करें।

ड्रिप से खाद देने के बाद चलाएं साफ पानी
फर्टिगेशन के बाद ड्रिप लाइन में बची खाद को बाहर निकालने के लिए कुछ समय तक साफ पानी चलाने की जरूरत होती है। इससे ड्रिप लाइन में उर्वरक जमा होने की समस्या कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, पानी चलाने का समय खेत, ड्रिप सिस्टम और सिंचाई व्यवस्था के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

पीले-नीले स्टिकी ट्रैप भी लगाएं
टमाटर की फसल में कीटों की निगरानी के लिए पीले और नीले स्टिकी ट्रैप उपयोगी हो सकते हैं। इनसे कुछ उड़ने वाले कीटों की निगरानी और संख्या कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ पौधों की पत्तियों, फूलों और फलों की नियमित जांच करते रहें।

इन बातों का रखें खास ध्यान
  • कैल्शियम नाइट्रेट और सल्फेट वाले उर्वरकों को एक साथ टैंक में न मिलाएं।
  • कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल समस्या की पहचान और लेबल निर्देश के अनुसार करें।
  • स्प्रे के लिए स्थानीय मौसम और हवा की स्थिति को ध्यान में रखें।
  • ड्रिप फर्टिगेशन के बाद लाइन में साफ पानी चलाएं।
  • खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें, जलभराव से बचाएं।
  • पीले-नीले स्टिकी ट्रैप लगाकर कीटों की निगरानी करें।
  • फसल की नियमित जांच करें और जरूरत के अनुसार खाद व फसल सुरक्षा प्रबंधन में बदलाव करें।

नोट: कीटनाशक/फफूंदनाशक के इस्तेमाल से पहले उत्पाद का पंजीकृत लेबल, फसल के लिए अनुमोदित उपयोग, प्रतीक्षा अवधि और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर जांचें। केवल ब्रांड/कंपनी के नाम के आधार पर किसी उत्पाद को बेहतर न मानें।
विज्ञापन
विज्ञापन