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BIRC 2026: दिल्ली में दिखेगा चावल विविधता का अनूठा संग्रह, दुनियाभर की 200 चावल की किस्में बिखेरेंगी अपनी महक

गांव जंक्शन डेस्क, चंडीगढ़ Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 23 Sep 2026 01:29 PM IST
सार

भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस ((BIRC) 2026 में एक अनूठे 'ग्लोबल राइस आर्काइव' के जरिए करीब 200 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय चावल किस्में एक साथ प्रदर्शित की जाएंगी। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) के मुताबिक, इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को विभिन्न किस्मों की तुलना कर सीधे निर्यातकों से जुड़ने में मदद मिलेगी और भारतीय निर्यात का दायरा भी बढ़ेगा। जानिए, विस्तार से...

बीते साल BIRC-2025 में देश-दुनिया के 7800 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
बीते साल BIRC-2025 में देश-दुनिया के 7800 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भारतीय चावल निर्यातक देश की निर्यात टोकरी को व्यापक बनाने और नए बाजारों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। इसके लिए भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (बीआईआरसी) 2026 में अपनी तरह के पहले 'ग्लोबल राइस आर्काइव' के जरिए करीब 200 व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण भारतीय और अंतरराष्ट्रीय चावल किस्मों को एक ही मंच पर लाया जाएगा।

23 से 25 अक्टूबर तक दिल्ली में होगा आयोजन
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) के अनुसार, नई दिल्ली के भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर तक होने वाले बीआईआरसी 2026 के दौरान इस आर्काइव को पेश किया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदार निर्यातकों और उत्पादकों से सीधे जुड़ने से पहले दाने की विशेषताओं, दिखावट, प्रसंस्करण प्रारूप और मूल स्थान के आधार पर विभिन्न किस्मों की तुलना कर सकेंगे।

नौ 'एक्सपीरियंस जोन' में से एक होगा राइस आर्काइव
'200 वैरायटी, एक सांस्कृतिक परिदृश्य' थीम पर विकसित यह ग्लोबल राइस आर्काइव सम्मेलन के नौ इमर्सिव एक्सपीरियंस जोन में से एक होगा। इसमें चावल को सिर्फ एक व्यापारिक वस्तु के तौर पर नहीं, बल्कि भूगोल, जैव विविधता, पाककला परंपराओं और खेती की प्रथाओं के संदर्भ में भी प्रदर्शित किया जाएगा।

इटली, थाईलैंड और जापान की किस्में भी होंगी शामिल
इस आर्काइव में भारत की बासमती किस्मों, सुगंधित हेरिटेज अनाज, काले और लाल चावल तथा अन्य क्षेत्रीय विशेषताओं के साथ-साथ इटली का आर्बोरियो, थाईलैंड का जैस्मिन और ग्लूटिनस आरडी6 और जापान की सुशी राइस जैसी अंतरराष्ट्रीय किस्में भी प्रदर्शित होंगी।

निर्यातकों के लिए प्रोडक्ट-डिस्कवरी मंच बनने की उम्मीद
आईआरईएफ की ओर से बोलते हुए देव गर्ग ने कहा कि चावल की खरीदारी सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि दाने की विशेषताओं, पकाने के तरीके, व्यंजन और उपभोक्ता की पसंद के आधार पर भी होती है। उन्होंने बताया कि पहली बार बीआईआरसी में आने वाला कोई भी वैश्विक खरीदार एक ही जगह पर व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण किस्मों की एक विस्तृत श्रृंखला देख सकेगा, उनकी तुलना कर सकेगा और तुरंत आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत भी शुरू कर सकेगा।
आर्काइव में भारत के व्यावसायिक निर्यात उत्पादों में 1121, 1718, 1509 और 1401 बासमती, पूसा बासमती, सुगंधा, शरबती, पीआर-11, पीआर-14, परमल और सोना मसूरी शामिल होंगे।
आर्काइव में भारत के व्यावसायिक निर्यात उत्पादों में 1121, 1718, 1509 और 1401 बासमती, पूसा बासमती, सुगंधा, शरबती, पीआर-11, पीआर-14, परमल और सोना मसूरी शामिल होंगे। - फोटो : AI Image
आईआरईएफ को उम्मीद है कि यह पहल भारतीय निर्यातकों के लिए एक प्रोडक्ट-डिस्कवरी मंच का काम करेगी, जिससे फिलहाल सीमित भारतीय किस्मों की सोर्सिंग करने वाले खरीदार अपने बाजारों के लिए उपयुक्त विशेष, सुगंधित और गैर-बासमती चावल की पहचान कर सकेंगे।

1121, सुगंधा, सोना मसूरी सहित कई किस्में होंगी प्रदर्शित
आर्काइव में भारत के व्यावसायिक निर्यात उत्पादों में 1121, 1718, 1509 और 1401 बासमती, पूसा बासमती, सुगंधा, शरबती, पीआर-11, पीआर-14, परमल और सोना मसूरी शामिल होंगे। इन्हें कच्चे, स्टीम, सेला और गोल्डन-सेला जैसे प्रसंस्करण प्रारूपों में प्रदर्शित किया जाएगा।

देशभर की क्षेत्रीय विशेष किस्में भी होंगी शामिल
इस आर्काइव में केरल की नवारा और रक्तशाली; तमिलनाडु की सीरगा सांबा, मप्पिल्लई सांबा और करुप्पु कवुनी; छत्तीसगढ़ का दुबराज; पश्चिम बंगाल का तुलाईपांजी; मणिपुर का चाखाओ ब्लैक राइस; असम का जोहा; उत्तर प्रदेश का कालानमक; मध्य प्रदेश का छिंदवाड़ा (चिन्नोर); महाराष्ट्र का अंबेमोहर; और कश्मीर का मुश्बुदजी भी प्रदर्शित होगा।

जूट की बोरियों और परंपरागत तराजू से होगा प्रदर्शन
गर्ग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह राइस आर्काइव प्रोडक्ट-डिस्कवरी का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है और भारत की पारंपरिक किस्मों व बाजारों से आगे निर्यात बढ़ाने में मदद कर सकता है। हर चुनी गई किस्म को छोटी जूट की बोरियों और परंपरागत तराजू के जरिए अलग-अलग प्रदर्शित किया जाएगा, जिसका मकसद व्यावसायिक प्रोडक्ट-डिस्कवरी को चावल की जैव विविधता के संरक्षण और उत्सव के साथ जोड़ना है।

बी2बी कार्यक्रम का भी होगा हिस्सा
यह आर्काइव बीआईआरसी 2026 के संरचित बिजनेस-टू-बिजनेस कार्यक्रम का पूरक बनेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय आगंतुक चावल की किस्म खोजने से लेकर संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान करने और सम्मेलन के दौरान ही सौदे पर बातचीत करने तक का पूरा सफर तय कर सकेंगे। एक्सपीरियंस जोन का औपचारिक अनावरण बीआईआरसी 2026 के पहले दिन राइस सेक्टर विजन 2047 के साथ किया जाएगा। सम्मेलन के व्यापक कार्यक्रम में ज्ञान सत्र, इनोवेशन शोकेस, खरीदार-विक्रेता बैठकें और एक राइस फेस्टिवल भी शामिल होगा।
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