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Capsicum Cultivation Farmers Should Prepare Nursery Like Special Variety Yields 20 Quintals Per Bigha
शिमला मिर्च की खेती : किसान ऐसे तैयार करें नर्सरी, इस खास किस्म से एक बीघा में 20 क्विंटल तक उपज
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 24 Sep 2026 07:43 PM IST
सार
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक आशा एफ1 शिमला मिर्च से एक बीघा में करीब 20 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। करीब 25-30 दिन में तैयार पौध की रोपाई की जाती है और खेत में जलभराव से बचाव के साथ सही देखभाल जरूरी है।
शिमला मिर्च की खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का विकल्प बन सकती है। सही किस्म का चुनाव, समय पर नर्सरी तैयार करना और खेत में पानी की निकासी का इंतजाम करके किसान अच्छी फसल ले सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो आशा एफ1 हाइब्रिड किस्म से एक बीघा में करीब 20 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है। अगर बाजार में करीब 30 रुपये किलो का भाव मिले तो लागत निकालने के बाद एक बीघा से 1 से 1.5 लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है।
सीधे खेत में नहीं बोते शिमला मिर्च
एक्सपर्ट के मुताबिक, शिमला मिर्च की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है। बीजों को अच्छी मिट्टी और उचित नमी वाली जगह पर बोया जाता है। इसके बाद पौधों को जरूरत के अनुसार पानी और पोषण दिया जाता है। रोग और कीट से बचाव के लिए भी पौधों की निगरानी जरूरी होती है। अच्छी देखभाल मिलने पर करीब 25 से 30 दिन में पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है। जब पौधे मजबूत हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में लगाया जाता है।
खेत में पानी जमा न होने दें
पौध रोपने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करना जरूरी है। इसके लिए खेत की जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा किया जाता है। साथ ही पानी की निकासी की व्यवस्था ठीक करनी चाहिए। खेत में ज्यादा पानी जमा रहने से शिमला मिर्च के पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए खेत तैयार करने के बाद जरूरत के अनुसार क्यारियां या बेड बनाकर पौधों की रोपाई की जा सकती है।
पौधों के बीच रखें सही दूरी
रोपाई के समय पौधों के बीच उचित दूरी रखना भी जरूरी है। इससे पौधों को फैलने और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। साथ ही खेत में हवा का आवागमन बना रहता है, जिससे पौधों की अच्छी बढ़वार में मदद मिलती है।
आशा एफ1 की क्या है खासियत?
एक्सपर्ट के मुताबिक आशा एफ1 हाइब्रिड शिमला मिर्च की किस्म है। इसके फल गहरे हरे, चमकदार और ब्लॉक आकार के होते हैं। फलों में आमतौर पर 3 से 4 लोब होते हैं। एक फल का वजन करीब 150 से 200 ग्राम तक बताया गया है। इसके फल मोटी दीवार वाले और मजबूत होते हैं। इसलिए इन्हें बाजार तक ले जाने में भी सुविधा रहती है। किसान अब्दुल्ला के अनुसार, इस किस्म के फल देखने में आकर्षक होते हैं और इनका आकार भी अच्छा आता है।
एक बीघा में 10 हजार रुपये तक लागत
एक्सपर्ट के अनुसार, अच्छी फसल तैयार करने में करीब 10 हजार रुपये प्रति बीघा तक लागत आती है। एक बीघा में करीब 20 क्विंटल तक उत्पादन मिलने और बाजार भाव 30 रुपये किलो रहने पर कुल बिक्री करीब 60 हजार रुपये बैठती है। हालांकि, बताए गए उत्पादन, लागत और मुनाफे के आंकड़े स्थानीय बाजार भाव, बीघा के आकार, मौसम, फसल प्रबंधन और वास्तविक लागत के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए खेती शुरू करने से पहले किसान अपने क्षेत्र के भाव और लागत का हिसाब जरूर देखें।
बाजार भाव पर निर्भर है कमाई
शिमला मिर्च की खेती में कमाई का बड़ा हिस्सा बाजार भाव पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट का कहना है कि करीब 30 रुपये किलो का भाव मिलने पर अच्छी आमदनी हो सकती है। ऐसे में अच्छी किस्म, स्वस्थ पौध, सही खेत प्रबंधन और समय पर बाजार में फसल पहुंचाना शिमला मिर्च की खेती में महत्वपूर्ण है।
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