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महाराष्ट्र: किसानों पर दोहरी मार, सूखे के बाद सोयाबीन-कपास फसलों पर कीटों का हमला

गांव जंक्शन डेस्क, छत्रपति संभाजीनगर Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 22 Sep 2026 08:30 PM IST
सार

महाराष्ट्र के नांदेड़ में सूखे के बाद अब सोयाबीन और कपास की फसलें येलो मोजैक और कीट प्रकोप की चपेट में हैं। फसल बीमा दावों की अस्वीकृति पर अशोक चव्हाण ने उठाए सवाल।

नांदेड़ में कपास की फसल फिलहाल फूल और फली बनने की अवस्था में है, लेकिन बारिश की कमी के चलते फसलों पर गंभीर नमी का दबाव है।
नांदेड़ में कपास की फसल फिलहाल फूल और फली बनने की अवस्था में है, लेकिन बारिश की कमी के चलते फसलों पर गंभीर नमी का दबाव है। - फोटो : AI
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विस्तार
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महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में सूखे जैसे हालात झेल रहे किसानों की कपास और सोयाबीन फसलें अब येलो मोजैक और कीटों के प्रकोप से जूझ रही हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बीमा कंपनियों द्वारा किसानों के दावे खारिज किए जाने पर सवाल उठाए हैं। नांदेड़ जिले के कपास और सोयाबीन किसानों के लिए यह दोहरी मुसीबत बनकर आया है। सूखे जैसी स्थितियों से जूझ रहे इस जिले में अब फसलें येलो मोजैक और कीटों के प्रकोप की चपेट में आ गई हैं।

औसत से 23 प्रतिशत कम हुई बारिश
प्रशासन के मुताबिक, नांदेड़ जिले में अब तक 764.2 मिमी की औसत अपेक्षित बारिश के मुकाबले सिर्फ 587.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। एक अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी जिलों की तुलना में नांदेड़ में बारिश की कमी भले ही कम (23.1 प्रतिशत) है, लेकिन फसलों में कीट प्रकोप के चलते किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

कैटरपिलर और येलो मोजैक का हमला
इस साल नांदेड़ में सोयाबीन की खेती का रकबा पिछले वर्षों के औसत क्षेत्रफल के मुकाबले 12 प्रतिशत बढ़कर 4.69 लाख हेक्टेयर हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सोयाबीन की फसल फूल आने की अवस्था में है, लेकिन यह पत्ती खाने वाली इल्ली, स्टेम फ्लाई, बीटल, फली छेदक, सफेद मक्खी और येलो मोजैक रोग से संक्रमित हो गई है, जिसके चलते फसल की बढ़वार रुक गई है।

बारिश की कमी से कपास पर बढ़ा संकट
मराठवाड़ा क्षेत्र में कपास भी एक प्रमुख फसल है। रिपोर्ट के मुताबिक, नांदेड़ में कपास की फसल फिलहाल फूल और फली बनने की अवस्था में है, लेकिन बारिश की कमी के चलते फसलों पर गंभीर नमी का दबाव है और वे सूख रही हैं। तापमान बढ़ने के कारण कपास की फसल एफिड, जैसिड, सफेद मक्खी और थ्रिप्स जैसे कीटों से भी प्रभावित हो रही है, जिससे पत्तियां पीली पड़ रही हैं और फसल की बढ़वार बाधित हुई है।

फसल बीमा दावों की अस्वीकृति पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद अशोक चव्हाण ने बीमा कंपनियों द्वारा फसल बीमा के दावे कथित तौर पर खारिज किए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। राज्य कृषि सचिव परिमल सिंह के साथ हुई एक ऑनलाइन बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन आधारों पर बीमा कंपनियां किसानों के दावों को अस्वीकार कर रही हैं, वे संदेहास्पद हैं, खासकर तब जब सरकारी तंत्र पहले ही नुकसान दर्ज कर चुका है।

उन्होंने कहा कि एक ही राजस्व मंडल या गांव में, जहां समान बारिश हुई है, वहां भी दो अलग-अलग किसानों को अलग-अलग अनुपात में मुआवजा मिल रहा है, और इसकी जांच होनी चाहिए। चव्हाण ने बीमा कंपनियों पर लापरवाह रवैया अपनाने और जिलाधिकारी के साथ अपनी नुकसान सर्वे रिपोर्ट साझा न करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियां गांवों का दौरा भी नहीं कर रही हैं, जिसके चलते फसल बीमा कराने का आंकड़ा घट रहा है और इससे केंद्र सरकार की छवि भी खराब हो रही है।
 
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