हरियाणा: धान खरीद से पहले 1400 में से 350 राइस मिलर्स ने ही कराया रजिस्ट्रेशन, बकाया चावल स्वीकार करने पर अड़े
गांव जंक्शन डेस्क, चंडीगढ़
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 23 Sep 2026 01:20 PM IST
सार
हरियाणा में राइस मिलर्स साल 2026-27 की धान खरीद से पहले कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में हिचकिचा रहे हैं।
लगभग 1,400 मिलर्स में से अब तक सिर्फ 350 ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है, जिसकी वजह पिछले सीजन के बकाया चावल, भुगतान और खरीद नियमों को लेकर स्पष्टता की कमी बताई जा रही है।
मिलर्स की सबसे बड़ी चिंता करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन सीएमआर को लेकर है, जिसके पिछले खरीद चक्र से लंबित रहने की आशंका जताई जा रही है।
- फोटो : गांव जंक्शन
हरियाणा में राइस मिलर्स 2026-27 की खरीद सीजन के लिए कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) का रजिस्ट्रेशन कराने से हिचकिचा रहे हैं। इसकी वजह बकाया चावल, भुगतान और खरीद नियमों को लेकर स्पष्टता की कमी बताई जा रही है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली धान खरीद से पहले करीब 1,400 मिलर्स में से अब तक सिर्फ 350 ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है, जो राज्य सरकार के सामने एक नई चुनौती बनकर उभरा है।
चंडीगढ़ में अधिकारियों के साथ हुई बैठक
सोमवार को चंडीगढ़ में हुई एक बैठक में मिलर्स ने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशक अंशज सिंह के सामने अपनी चिंताएं रखीं। मिलर्स की सबसे बड़ी चिंता करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन सीएमआर को लेकर है, जिसके पिछले खरीद चक्र से लंबित रहने की आशंका जताई जा रही है। वे चाहते हैं कि सरकार पूरी बकाया मात्रा को स्वीकार करने का आश्वासन दे।
एफसीआई का लक्ष्य 55 लाख टन, खरीद हुई 62 लाख टन
हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष ज्वेल सिंगला ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने पहले धान स्वीकृति का लक्ष्य 55 लाख मीट्रिक टन तय किया था, जबकि पिछले सीजन में सरकारी एजेंसियों ने करीब 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर इसे करीब 1,400 राइस मिलों को आवंटित किया था।
केंद्र ने बढ़ाया लक्ष्य, फिर भी 2.5 लाख टन रहेगा बकाया
10 सितंबर को केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए हरियाणा का धान स्वीकृति लक्ष्य बढ़ाकर 59.62 लाख मीट्रिक टन कर दिया और बढ़ी हुई मात्रा के एवज में सीएमआर डिलीवरी की समय सीमा भी 30 सितंबर तक बढ़ा दी। सिंगला ने बताया कि मिलर्स ने अपना बकाया चावल देना शुरू कर दिया है, लेकिन एफसीआई 59.62 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा स्वीकार नहीं करेगा, जिसके चलते पिछले सीजन का करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन चावल बकाया रह जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि पूरा बचा हुआ चावल स्वीकार किया जाए।
मिलिंग, ट्रांसपोर्टेशन शुल्क में देरी पर भी जताई नाराजगी
मिलर्स ने लंबित मिलिंग, होल्डिंग, ब्लेंडिंग और परिवहन शुल्क का भुगतान जल्द करने की भी मांग की है। करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने धान खरीद के दौरान निर्धारित 17 प्रतिशत नमी सीमा का सख्ती से पालन करने की मांग करते हुए कहा कि एजेंसियों को इस सीमा से अधिक नमी वाला धान न तो खरीदना चाहिए और न ही आवंटित करना चाहिए। सिंगला ने पारदर्शी भौतिक सत्यापन प्रक्रिया की भी मांग करते हुए कहा कि मिलर्स सत्यापन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें इसमें परेशान नहीं किया जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर मिलर्स पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं और राज्य व केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।
अधिकारियों को जल्द रजिस्ट्रेशन की उम्मीद
अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक सकारात्मक रही और उन्हें उम्मीद है कि मिलर्स जल्द ही रजिस्ट्रेशन करा लेंगे। करनाल के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक सकारात्मक रही, क्योंकि मिलर्स की ज्यादातर चिंताओं का समाधान हो जाएगा और उन्हें उम्मीद है कि मिलर्स जल्द रजिस्ट्रेशन करा लेंगे।
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