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Gajarghas Not Only Endangering Farms But Also Humans Animals Rapidly Spreading Foreign Weed
Gajarghas: गाजरघास से खेत ही नहीं, इंसान और पशु भी खतरे में, तेजी से फैल रहा विदेशी खरपतवार
डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान), केवीके, ललितपुर (यूपी), नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 23 Sep 2026 05:41 PM IST
सार
खेतों, सड़क किनारे, रेलवे ट्रैक, बंजर जमीन और खाली पड़े स्थानों पर तेजी से फैलने वाली गाजरघास (कांग्रेस घास) किसानों के साथ-साथ इंसानों और पशुओं के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है। यह एक विदेशी और आक्रामक खरपतवार है। भारत में इसके पहली बार 1950 के दशक में दिखाई देने की जानकारी मिलती है।
गाजरघास से खेत ही नहीं, इंसान और पशु भी खतरे में
- फोटो : सोशल मीडिया
गाजरघास आमतौर पर कांग्रेस घास, सफेद टोपी, गजरी, चटक चांदनी, रुखैया आदि नामों से जाना जाता है, एक विदेशी आक्रामक खरपतवार है। भारत में पहली बार 1950 के दशक में दृष्टिगोचर होने के बाद यह विदेशी खरपतवार रेलवे ट्रैक, सड़को के किनारे, बंजर भूमि, उद्यान आदि सहित लगभग 35 मिलियन हेक्टेयर फसलीय और गैर फसलीय क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है।
गाजर घास की विशेषता
यह एक वर्षीय शाकीय पौधा है जिसकी लंबाई 1.5 से 2.0 मीटर तक होती है। यह मुख्यतः बीजों से फैलता है। यह एक विपुल बीज उत्पादक है और इसमें लगभग 25000 से 50000 बीज प्रति पौधा पैदा करने की क्षमता होती है। बीज अपने कम वजन के हवा, पानी और मानवीय गतिविधियों द्धारा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच जाते हैं।
गाजर घास से होने वाला नुकसान
गाजरघास को सबसे अधिक खतरनाक खरपतवारों में गिना जाता है क्योंकि वह मनुष्यों और पशुओं में त्वचा रोग (डरमेटाइटिस), अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। इसके सेवन से पशुओं में अत्यधिक लार और दस्त के साथ मुंह में छाले हो जाते हैं। स्वादहीन होने के कारण इसका उपयोग पशुओं के के चारे के रूप में नहीं किया जा सकता है, साथ ही घास के मैदानों, चरागाहों और बन क्षेत्रों में इसके फैलने से चारे की उपलब्धता धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
नियंत्रण के उपाय
गाजरघास एक जन मानस की समस्या है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए किसानों सहित समाज के सभी वर्गों के द्वारा सामुदायिक पहल कि आवश्यकता है ताकि अपने आसपास को गाजरघास से मुक्त रखा जा सकता है।
कृषक बंधु फूल आने से पहली इस खरपतवार को उखाड़कर कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट बना सकते हैं।
गाजरघास को विस्थापित करने के लिए चकौड़ा, गेंदा जैसे स्व-स्थाई प्रतिस्पर्धी पौधों की प्रजातियों की बीज का छिड़काव किया जा सकता है।
अकृषित क्षेत्रों में सम्पूर्ण वनस्पति नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट (1.0 से 1.5 प्रतिशत) जैसे शाकनाशी का छिड़काव कर सकते हैं
मिश्रित वनस्पति में गाजरघास का नियंत्रण हेतु मैट्रीब्यूजिन (0.3 से 0.5 प्रतिशत) या 2, 4 डी (0.3 से 0.5 प्रतिशत) का छिड़काव उसमें फूल आने से पहले करें, ताकि घास कुल के पौधों को बचाया जा सकें। फसलो में शाकनाशियों के प्रयोग से पहले खरपतवार वैज्ञानिक/ विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।
जुलाई-आगस्त के दौरान गाजरघास संक्रमित क्षेत्रों में जैविक कीट जाइगोग्रामा बाइकोलोराटा (मेक्सिकन बीटल) को छोड़ा जा सकता है।
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