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चटनी से चिकित्सा तक छोड़ी छाप : खट्टे स्वाद का मीठा कारोबार, दुनिया की थाली में भारतीय इमली ने जमाई धाक

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 08 Oct 2026 02:36 PM IST
सार

दुनिया में सबसे ज्यादा इमली कौन-सा देश उगाता है? जानिए, भारत के प्रमुख इमली उत्पादक राज्य और एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी गदग की कहानी। साथ ही, इमली निर्यात के आंकड़े, इससे सेहत को होने वाले फायदे और इसके सेवन से जुड़ी कुछ अहम सावधानियां...
 

इमली में कई एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिज होते हैं।
इमली में कई एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिज होते हैं। - फोटो : Ai
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विस्तार
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चटनी की चटख खटास हो या पारंपरिक घरेलू नुस्खे, इमली हर जगह अपनी जगह बना लेती है। दुनिया में इसकी सबसे ज्यादा पैदावार भारत में होती है। अब यह फल रसोई से निकलकर खाद्य उद्योग, पेय और न्यूट्रास्यूटिकल्स तक की जरूरत बन चुका है, और भारत इसका बड़ा निर्यातक है।

इमली अपने खट्टे स्वाद और सेहत से जुड़े गुणों के कारण लोकप्रिय उष्णकटिबंधीय फल बन चुकी है। चटनी और करी से लेकर पारंपरिक उपचार तक, दुनिया भर में इसका इस्तेमाल होता है।

दुनिया में सबसे ज्यादा इमली कहां
इमली के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में भारत का नाम सबसे ऊपर है। देश की उष्णकटिबंधीय जलवायु इसकी खेती के लिए आदर्श मानी गई है और यह कई राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। भारत भले ही शीर्ष उत्पादक है, पर थाईलैंड मीठी इमली के लिए जाना जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय पाक-मानकों पर खरी उतरती है। वहीं, भारत में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य अपनी अनुकूल जलवायु के कारण देश में सबसे ज्यादा इमली पैदा करते हैं।

एशिया की सबसे बड़ी मंडी
एशिया का सबसे बड़ा इमली बाजार गदग (कर्नाटक) में है, जहां इमली का व्यापक व्यापार और वितरण होता है। गदग मुख्य मंडी है और इसके साथ महाराष्ट्र व ओडिशा के प्रमुख बाजार भी हैं, जहां स्थानीय किसान और व्यापारी आपूर्ति की कड़ी बनाते हैं।

सेहत के लिहाज से फायदेमंद इमली
इमली में कई एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिज होते हैं। यह पाचन को सहारा देती है, हृदय की रक्षा करती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। यह प्राकृतिक सूजन-रोधी (anti-inflammatory) तत्व के रूप में भी काम करती है। पारंपरिक चिकित्सा में कब्ज दूर करने, पाचन सुधारने और सूजन घटाने के लिए इसका उपयोग होता है, लेकिन संतुलित मात्रा में ही। 

ज्यादा मात्रा में इमली खाने से पेट की परेशानी, एलर्जी और एसिडिटी हो सकती है। संवेदनशील पेट, एसिड रिफ्लक्स या कुछ दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को इसका सेवन सीमित रखना चाहिए।

निर्यात का बढ़ता दायरा
ट्रेडोलॉजी डॉट कॉम के अनुसार, भारत से हर साल 9,500 से अधिक इमली खेप निर्यात होती हैं। 1,000 से ज्यादा भारतीय निर्यातक वैश्विक इमली व्यापार में शामिल हैं। वहीं, 2,400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारत से इमली मंगाते हैं। अमेरिका, यूएई और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख आयात-गंतव्यों में शामिल हैं। वैश्विक इमली-अर्क (extract) बाजार के 2034 तक 1.99 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

रसोई से उद्योग तक छोड़ी छाप 
औद्योगिक खरीदार इमली को केवल मसाले के रूप में नहीं, बल्कि प्राकृतिक अम्लीय और बाइंडिंग तत्व के रूप में देखते हैं। मांग खाद्य प्रसंस्करण, सॉस, पेय, न्यूट्रास्यूटिकल्स और औद्योगिक उपयोगों से आती है। विशाखापत्तनम और चेन्नई जैसे केंद्रों से अंतरराष्ट्रीय प्रसंस्करण संयंत्रों तक नियमित कंटेनर खेप जाती हैं।

खरीदार टार्टरिक एसिड की मात्रा, नमी और शुद्धता के मानकों पर खास जोर देते हैं। कच्चे ब्लॉक की तुलना में इमली पेस्ट और स्प्रे-ड्राइड पाउडर से निर्यात-मूल्य ज्यादा मिलता है।

इमली केवल रसोई का मसाला नहीं, एक मूल्यवान प्राकृतिक औषधि और बढ़ता निर्यात-उत्पाद भी है। भारत के शीर्ष उत्पादन और कई क्षेत्रों के योगदान से यह आर्थिक और स्वास्थ्य, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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