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पहाड़ों की गोद में सुर्ख सेब की सौगात: कुल्लू घाटी से देश की थाली तक कैसे पहुंची हिमाचली सेब की मीठी दास्तान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 08 Oct 2026 01:57 PM IST
भारत सरकार के बागवानी आंकड़ों में सेब की खेती उत्तरी पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देती है।
भारत सरकार के बागवानी आंकड़ों में सेब की खेती उत्तरी पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देती है। - फोटो : AI Image
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'रोज एक सेब का सेवन यानी डॉक्टर से दूरी', यह कहावत स्वास्थ्य और पोषण की सबसे आम मिसालों में गिनी जाती है। विटामिन, रेशे और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सेब दुनिया भर में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले पौष्टिक फलों में शामिल किया जाता है। एशिया में भारत सेब का एक महत्वपूर्ण उत्पादक है और पहाड़ी इलाकों के सैकड़ों किसानों की रोजी-रोटी इसकी खेती से जुड़ी है।

भारत सरकार के बागवानी आंकड़ों में सेब की खेती उत्तरी पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देती है। इन्हीं में एक राज्य ने बड़े पैमाने की खेती के दम पर 'भारत के सेब राज्य' का खिताब हासिल किया।

कौन-सा राज्य है भारत का प्रमुख 'सेब उत्पादक राज्य'
सेब के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल होने और इसकी खेती के यहां की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में होने के कारण हिमाचल प्रदेश को सेब की राजधानी कहा जाता है। देश के सेब उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत बतायी जाती है। यहां की जलवायु और भौगोलिक बनावट गुणवत्तापूर्ण सेब के लिए अनुकूल मानी जाती है। आज यह फल राज्य के अनेक परिवारों की आर्थिक रीढ़ बन चुका है।

क्यों कहलाता है हिमाचल 'सेब राज्य'
  • राज्य की सेब खेती से हर साल करीब ₹5,500 से ₹6,000 करोड़ की आय होती है और पहाड़ी जिलों के अनेक किसानों को रोजगार मिलता है।
  • यहां हर साल 4 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब पैदा होता है।
  • समशीतोष्ण जलवायु, ऊंचे पहाड़ी इलाके और उपजाऊ मिट्टी सेब के लिए बेहद अनुकूल हैं।
  • रॉयल डिलीशियस, रेड डिलीशियस और गोल्डन डिलीशियस जैसी लोकप्रिय किस्में यहां उगाई जाती हैं।
  • शिमला, कुल्लू, किन्नौर और मंडी जिले अपने बागों के लिए खास तौर पर जाने जाते हैं, और यहां के सेब देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचते हैं।
ब्रिटिश दौर से बाजार तक : सेब का इतिहास
हिमाचल में सेब की पहली खेती ब्रिटिश शासनकाल में शुरू हुई और आगे चलकर राज्य की अर्थव्यवस्था गढ़ने में इसकी बड़ी भूमिका रही। छोटे-छोटे बागों से शुरू हुई खेती बड़े व्यावसायिक कारोबार में बदली और पहाड़ी समुदायों के जीवन पर गहरा असर डाला।

तीन पड़ाव, जिन्होंने बदली तस्वीर
  • 1870: कैप्टन आर.सी. ली ने इंग्लैंड से लाए पौधों से कुल्लू घाटी में देश का पहला सेब बाग लगाया।
  • 1916: सत्यानंद स्टोक्स ने शिमला के पास कोटगढ़ में रेड डिलीशियस सेब की खेती शुरू की। उनका बाग बड़ी सफलता साबित हुआ और सेब ने पारंपरिक फसलों की जगह लेनी शुरू की। स्रोत में उन्हें 20वीं सदी की शुरुआत में व्यावसायिक सेब खेती का प्रवर्तक भी बताया गया है।
  • 1926: भारतीय बाजारों में सेब का व्यावसायिक उत्पादन सफल रहा।
आजादी के बाद सेब की बागवानी राज्य की प्रमुख गतिविधि बन गई और अनाज की पुरानी खेती की जगह लेती गई।

सेब की सुर्खी, जो बनी अर्थव्यवस्था की पहचान
व्यापक सेब-खेती, अनुकूल जलवायु और फलते-फूलते बागवानी क्षेत्र के कारण हिमाचल प्रदेश 'भारत का सेब राज्य' कहलाता है। सेब ने राज्य की आर्थिक तस्वीर बदली है और दशकों से किसानों को सहारा दिया है। यह प्रदेश आज भी देश के प्रमुख फल-उत्पादक क्षेत्रों में है।
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