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पकी फसल पर पानी फेर गई बरसात : यूपी में किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद, धान-बाजरा खेतों में बिछे
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:16 PM IST
सार
36-48 घंटे की लगातार बारिश और तेज हवाओं से यूपी में धान, बाजरा, तिल, उड़द और मूंगफली समेत कई खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। खेतों में जलभराव से किसानों की चिंता बढ़ी है, जबकि 32 जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया गया है।
यूपी में किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद
- फोटो : गांव जंक्शन
उत्तर प्रदेश में लगातार 36 से 48 घंटे से हो रही बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। पककर तैयार धान, बाजरा, तिल, उड़द, मूंगफली और दूसरी खरीफ फसलें खेतों में गिर गई हैं या पानी में डूब गई हैं। कई जिलों में खेतों में जलभराव के कारण कटी फसल भीग गई है। तेज हवाओं से गन्ना और केले की फसल को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई जगह पेड़ और बिजली के पोल भी गिर गए हैं। प्रदेश के 32 जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बारिश के बीच किसान अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में जुटे हुए हैं। कहीं किसान कटी फसल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगे हैं तो कहीं खेतों से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों को अब सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि खेत में गिरी या पानी में डूबी धान की फसल के दाने काले पड़कर सड़ न जाएं। ज्यादा नमी के कारण मंडियों में गीले धान की खरीद प्रभावित होने और भाव गिरने की भी आशंका है।
अलीगढ़ में धान-बाजरा जमीन पर बिछा
अलीगढ़ में शुक्रवार देर रात से हुई बारिश और तेज हवाओं ने पककर तैयार धान और बाजरा की फसल को नुकसान पहुंचाया है। कई खेतों में पानी भरने से कटी पड़ी फसल भीग गई, जबकि तेज हवा से खड़ी फसल जमीन पर गिर गई। किसानों को दाना काला पड़ने, फसल सड़ने और कटाई की लागत बढ़ने की चिंता है। बारिश के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को कम भाव मिलने का भी डर है।
मंडियों में भी भीगा धान
अलीगढ़ जिले की खैर मंडी में खुले में रखा धान भी बारिश की चपेट में आ गया। पिछले दिनों यहां रोज करीब एक लाख कट्टे धान की आवक हो रही थी और भाव करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। बारिश के बाद व्यापारियों के मुताबिक गीले धान के भाव में करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। जिले की छर्रा मंडी में भी करीब 25 हजार क्विंटल व्यापारियों और 10 से 15 हजार क्विंटल किसानों के धान के भीगने का अनुमान है। शनिवार को सूखे धान की खरीद 4,150 रुपये प्रति क्विंटल तक हुई, जबकि गीला धान नहीं खरीदा गया।
एटा में पकी धान और कटा बाजरा प्रभावित
एटा के अलीगंज, मारहरा, निधौलीकलां, जलेसर, राजा का रामपुर और आसपास के गांवों में तेज हवा और बारिश से पकी धान की फसल जमीन पर बिछ गई। खेतों में कटा पड़ा बाजरा भी पानी में भीग गया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च किया था। फसल तैयार होने के समय बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
लखीमपुर खीरी में धान और गन्ने को नुकसान
लखीमपुर खीरी में 36 से 48 घंटे से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है। इससे धान की खड़ी फसल गिरने लगी है। किसानों को डर है कि अगर जल्द पानी नहीं निकला तो फसल सड़ सकती है। तेज हवाओं से गन्ने की फसल झुक गई है, जबकि केला और तिलहनी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
शाहजहांपुर में धान, तिल और बाजरा खेतों में बिछे
शाहजहांपुर में भारी बारिश और तेज हवाओं से पककर तैयार धान, तिल और बाजरे की फसल जमीन पर गिर गई है। जलभराव के कारण खेतों में हार्वेस्टर चलाना मुश्किल हो गया है। इससे किसानों की कटाई लागत बढ़ने और धान में फंगस लगने का खतरा है। बारिश जारी रहने से बची हुई फसल को भी नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
जालौन में तिल की फसल को भारी नुकसान
जालौन के कोंच और उरई तहसील क्षेत्र के कई गांवों में करीब 36 घंटे से हो रही बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों के मुताबिक तिल की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से राहत की मांग की है।
कन्नौज में धान की फसल पानी में डूबी
कन्नौज के इंदरगढ़ क्षेत्र में तेज हवा और बारिश से खेतों में पानी भर गया है। कई जगह धान की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई। अनंतपुर गांव के किसान राजू उर्फ राजेश कुमार की चार बीघा धान की फसल को नुकसान हुआ है। वहीं कई अन्य किसानों की दो से आठ बीघा तक फसल पानी में डूब गई। किसानों ने प्रशासन से राजस्व और कृषि विभाग की टीम भेजकर फसल नुकसान का सर्वे कराने और नियमानुसार राहत देने की मांग की है।
झांसी में दलहन-तिलहन फसलें प्रभावित
झांसी के गरौठा, टोड़ी फतेहपुर, ककरबई, लुहारी, खिलारा और आसपास के क्षेत्रों में दो-तीन दिन से बारिश जारी है। खेतों में खड़ी और कटी पड़ी खरीफ फसलें पानी में डूबकर खराब होने लगी हैं। उड़द, मूंग, तिल, मूंगफली, अरहर और सोयाबीन को नुकसान पहुंचा है। गरौठा क्षेत्र में किसानों ने मूंगफली में 60 से 70 फीसदी तक नुकसान की बात कही है। लुहारी क्षेत्र में फलदार पेड़ों की टहनियां टूट गईं और आंवला, सीताफल, नींबू, करौंदा और पपीते के फल जमीन पर गिर गए। सकरार में खेत में सुखाने के लिए रखी उड़द भी बारिश में भीग गई।
सुलतानपुर में धान को 25-30 फीसदी नुकसान
सुलतानपुर में 48 घंटे से जारी बारिश से धान की फसल प्रभावित हुई है। कूरेभार, धनपतगंज, बल्दीराय, कादीपुर, करौंदीकला, जयसिंहपुर, मोतिगरपुर, भदैया और दुबेपुर सहित कई क्षेत्रों में धान की करीब 25 से 30 फीसदी फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बारिश के कारण कई जगह बिजली के पोल भी गिर गए हैं।
देवरिया में 40 फीसदी से ज्यादा धान प्रभावित
देवरिया में तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल खेतों में गिर गई है। किसानों के अनुसार जिले में 40 फीसदी से ज्यादा किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है।
बाराबंकी में पककर तैयार धान को नुकसान
बाराबंकी में भी बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल तेज हवा और बारिश से जमीन पर बिछ गई। खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
बहराइच में हजारों बीघा फसल प्रभावित
बहराइच की सभी तहसीलों में तेज हवा और बारिश से कई पेड़ सड़कों पर गिर गए। हजारों बीघा केला, धान और गन्ने की फसल प्रभावित होने की सूचना है। वन विभाग की टीम सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने में जुटी है। जिला प्रशासन ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मकान, पशु और फसल समेत अन्य नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। घटनाओं की सूचना कंट्रोल रूम के नंबर 05252-230132 और टोल फ्री नंबर 1077 पर देने को कहा गया है।
अंबेडकरनगर में गन्ना और सब्जियों को नुकसान
अंबेडकरनगर में तीन दिन से तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। रसूलपुर में पेड़ गिरने से एक भैंस की मौत हुई है। बारिश और तेज हवा से गन्ने और सब्जियों की फसल भी प्रभावित हुई है।
बरेली में जलभराव से धान डूबा
बरेली के क्योलडिया क्षेत्र में दो दिन से जारी भारी बारिश और तेज हवाओं से खेतों में जलभराव हो गया है। इससे धान की फसल डूब गई है। दर्जनों किसानों की सैकड़ों बीघा फसल प्रभावित होने की जानकारी है।
किसानों को अब सर्वे और राहत का इंतजार
लगातार बारिश से तैयार फसल को हुए नुकसान के बाद किसानों की नजर अब प्रशासन की ओर है। किसानों की मांग है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीमें खेतों में जाकर नुकसान का आकलन करें, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत मिल सके।
सबसे बड़ी चिंता उन किसानों की है जिनकी फसल कटने के लिए तैयार थी या कटकर खेत में पड़ी थी। लगातार बारिश से नमी बढ़ने के कारण अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मंडियों में गीली उपज की खरीद में दिक्कत आ सकती है।
बारिश थमने के बाद किसानों के लिए सबसे जरूरी काम खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना और जहां संभव हो, कटी फसल को सुरक्षित व सूखे स्थान पर पहुंचाना होगा। फसल में नुकसान के लक्षण दिखाई देने पर किसान स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं।
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