केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि कपास की मूल्य व्यवस्था के चलते विदर्भ के पांच जिलों में 10,000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कृषि संकट यवतमाल, वर्धा, बुलढाणा, अकोला और वाशिम जिलों में सबसे अधिक गंभीर रूप में देखा गया।
हालांकि केंद्रीय मंत्री ने कपास मूल्य व्यवस्था पर विस्तार से बात नहीं कही, लेकिन उनका संकेत उन विभिन्न पहलुओं की ओर था जो कृषि उत्पादों की कीमतों पर असर डालते हैं। बता दें कि एमएसपी के साथ खुले बाजार में फसलों की कीमतों को तय करने में मांग और सप्लाई का नियम अहम भूमिका निभाता है। लेकिन, कपास के मामले में ऐसा नहीं है। कपास किसानों को मात्र एमएसपी पर अपनी फसल बेचने का विकल्प होता है। वहीं, किसान नेता कहते आए हैं कि मौजूदा एमएसपी खेती की लागत तक नहीं निकाल पाती है।
वैल्यू चेन बढ़ाकर किसानों को दिलाया जा सकता है बेहतर दाम
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कच्चे माल की बेहतर कीमत पाने के लिए उत्पादों की वैल्यू चेन को बढ़ावा देना जरूरी है। अपनी बात के समर्थन में मक्के का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब हमने मक्के से एथेनॉल बनाया, तब मक्के का बाजार भाव 1,200 रुपये प्रति क्विंटल था और एमएसपी 1,800 रुपये थी। जैसे ही इथेनॉल बनाने की अनुमति मिली, मक्के की कीमत बढ़कर 2,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गई और इससे बिहार व उत्तर प्रदेश के किसानों की जेब में 45,000 करोड़ रुपये पहुंचे।
विदर्भ की प्रमुख फसलों की पैदावार बढ़ाने और खर्च घटाने की जरूरत
वैल्यू चेन को बेहतर करने के अलावा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विदर्भ में उगाई जाने वाली फसलों की पैदावार बढ़ाने और उनकी लागत कम करने पर ध्यान देना होगा। गडकरी ने कहा कि कपास, संतरा, सोयाबीन और तुअर विदर्भ की जीवनरेखा हैं। हमें इनकी उत्पादकता बढ़ानी होगी और उत्पादन पर होने वाले खर्च को कम करना होगा।