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रबी सीजन : मक्के की कटाई के बाद खाली न छोड़ें खेत, समय पर लगाएं आलू, अभी से जुटा लें अच्छा बीज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 26 Sep 2026 05:52 PM IST
सार

मक्के की कटाई के बाद किसान उसी खेत में रबी सीजन की आलू की फसल ले सकते हैं। आलू की कई किस्में 80-100 दिन में तैयार हो जाती हैं। समय पर बुआई, 25-30 ग्राम के स्वस्थ बीज कंद और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी से फसल को बेहतर शुरुआत मिल सकती है।

आलू की खेती
आलू की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मक्के की कटाई के बाद खेत खाली छोड़ने के बजाय किसान उसी खेत में आलू की खेती कर सकते हैं। इससे एक ही खेत का खरीफ और रबी दोनों मौसम में इस्तेमाल हो सकेगा। आलू की कई किस्में करीब 80 से 100 दिन में तैयार हो जाती हैं, इसलिए मक्के की कटाई के बाद खेत की तैयारी और आलू की बुवाई में ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर बुवाई होने से फसल को अनुकूल मौसम मिलने की संभावना रहती है और किसान जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

अभी से जुटाएं अच्छा बीज
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, किसानों को आलू की बुवाई का समय आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। अभी से अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। बीज का चुनाव अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करें। बाजार में कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सही किस्म का चुनाव करने से बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।

बलुई दोमट मिट्टी आलू के लिए अच्छी
आलू की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। इस मिट्टी में पानी की निकासी अच्छी रहती है और कंदों का विकास भी ठीक से हो सकता है। पलामू के कई इलाकों में इस तरह की मिट्टी पाई जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसान मक्के की कटाई के बाद आलू की फसल ले सकते हैं। ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो। ज्यादा नमी रहने पर आलू के कंद खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

25-30 ग्राम के स्वस्थ कंद चुनें
आलू की अच्छी फसल के लिए बीज कंद का आकार और गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। किसानों को बहुत बड़े आलू को बीज के रूप में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। करीब 25 से 30 ग्राम वजन वाले स्वस्थ और रोगमुक्त कंद बीज के लिए चुने जा सकते हैं। बुवाई से पहले बीज की अच्छी तरह छंटाई करें। केवल स्वस्थ और रोगमुक्त कंदों का इस्तेमाल करने से खेत में पौधों का विकास एक समान रखने में मदद मिलती है और फसल की देखभाल भी आसान होती है।

मक्के के बाद ऐसे बढ़ाएं खेत की उपयोगिता
मक्के की कटाई के बाद खेत की अच्छी तरह तैयारी करके आलू की बुआई की जा सकती है। खेत को ज्यादा समय तक खाली रखने से बचें। समय पर खेत की तैयारी, अच्छी किस्म के बीज का चयन और संतुलित खाद-पानी प्रबंधन आलू की फसल के लिए जरूरी है। एक ही खेत में खरीफ में मक्का और रबी में आलू लेने से किसान साल में दो फसलें ले सकते हैं। इससे जमीन की उपयोगिता बढ़ती है और अतिरिक्त आमदनी का रास्ता बन सकता है। हालांकि, उत्पादन और आमदनी मिट्टी, किस्म, मौसम, लागत और बाजार भाव पर निर्भर करेगी।
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