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Papaya Cultivation September October Right Time Plant 1240 Saplings One Acre Proper Care Increase Income
पपीते की खेती : सितंबर-अक्टूबर सही समय, ऐसे लगाएं एक एकड़ में 1240 पौधे, सही देखभाल से बढ़ेगी कमाई
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 26 Sep 2026 05:44 PM IST
सार
सितंबर-अक्टूबर पपीते की रोपाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है। एक एकड़ में करीब 1,240 पौधे लगाए जा सकते हैं। पौधे से पौधे और कतार से कतार की दूरी करीब 6 फीट रखें और खेत में जलभराव न होने दें।
पपीते की खेती शुरू करने वाले किसानों के लिए सितंबर और अक्टूबर का समय अहम है। बरसात के बाद मौसम में नरमी आने लगती है, जो पपीते के पौधों के विकास के लिए अनुकूल मानी जाती है। किसान अक्टूबर तक पपीते के पौधों की रोपाई कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में करीब 1,240 पौधे लगाए जा सकते हैं। अच्छी देखभाल और अनुकूल बाजार भाव मिलने पर इससे किसान बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।
एक पौधे से मिल सकता है 50 किलो तक फल
पपीते के पौधों की सही तरीके से देखभाल की जाए तो एक पौधे से करीब 50 किलो तक फल मिलने का अनुमान बताया जाता है। करीब एक साल के अंदर पौधों में अच्छा फलन शुरू हो सकता है। उत्पादन और बाजार भाव बेहतर रहने पर एक एकड़ से सालाना 15 से 18 लाख रुपये तक की सकल आमदनी संभव बताई जाती है। हालांकि, वास्तविक आमदनी खेती की लागत, उत्पादन और बाजार में मिलने वाले भाव पर निर्भर करती है।
कैसी होनी चाहिए मिट्टी?
पपीते की खेती के लिए बलुई दोमट या हल्की काली मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। मिट्टी का पीएच मान करीब 6.0 से 7.0 के बीच होना बेहतर रहता है। खेत में पानी जमा रहने से पौधों को नुकसान हो सकता है, इसलिए अच्छी जल निकासी वाली जमीन का चयन करना जरूरी है।
पौधे लगाने से पहले ऐसे तैयार करें गड्ढे
रोपाई से पहले खेत में करीब 50×50×50 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे तैयार किए जा सकते हैं। गड्ढे खोदने के बाद उन्हें 2-3 दिन खुला छोड़ने की सलाह दी जाती है। इससे मिट्टी को धूप मिलने का समय मिलता है। इसके बाद गड्ढों को उचित खाद और मिट्टी के मिश्रण से भरकर पौधों की रोपाई की जा सकती है।
पौधों के बीच रखें 6 फीट दूरी
पपीते के पौधों को पर्याप्त जगह देने के लिए पौधे से पौधे और एक कतार से दूसरी कतार के बीच करीब 6 फीट दूरी रखी जा सकती है। इससे पौधों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। साथ ही खेत में हवा का आवागमन बेहतर रहता है और पौधों की देखभाल में भी आसानी होती है।
जरूरत के हिसाब से करें सिंचाई
अक्टूबर तक पौधों की रोपाई के बाद हल्की सिंचाई की जा सकती है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद नमी के आधार पर पानी देना चाहिए। सामान्य तौर पर 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, सिंचाई का अंतर मौसम, मिट्टी और खेत की नमी के अनुसार बदल सकता है। पपीते में सबसे जरूरी बात यह है कि खेत में पानी जमा न होने दें। जलभराव से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है। इसलिए खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था पहले से रखें।
कीट और रोगों पर रखें नजर
अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है। किसानों को नियमित रूप से पौधों की निगरानी करनी चाहिए। पत्तियों, तने और फलों पर किसी तरह के कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते प्रबंधन करना जरूरी है।
कीट और रोगों के नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिक या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही दवा या अन्य उपाय अपनाने चाहिए। सही मिट्टी, उचित दूरी, संतुलित सिंचाई और नियमित निगरानी से पपीते की फसल का उत्पादन बेहतर किया जा सकता है।
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