अगर आप किसी वजह से अभी तक आलू की बुवाई नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सही किस्म के बीज, खेत की तैयारी और बुवाई की तकनीक अपनाकर अब भी आलू की खेती की जा सकती है। खास बात यह है कि बीज की लागत कम करने के लिए किसान बड़े आकार के आलू को काटकर भी बुवाई कर सकते हैं। एक आलू से 4 से 5 बीज तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी, ताकि कटे हुए आलू के टुकड़े खेत में सड़ें नहीं और उनका सही अंकुरण हो सके। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, देर से आलू की बुवाई करने वाले किसानों को बीज के चुनाव से लेकर सिंचाई तक विशेष ध्यान देना चाहिए।
एक बड़े आलू से तैयार करें 4-5 बीज
आलू की बुवाई में बीज की लागत कम करने के लिए बड़े आकार के आलू को काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, एक बड़े आलू को उसके आकार के अनुसार 4 से 5 टुकड़ों में काट सकते हैं।
आलू काटते समय इन बातों का रखें ध्यान
प्रत्येक टुकड़े में कम से कम 1-2 स्वस्थ आंखें (अंकुर निकलने वाली जगह) होनी चाहिए।
आलू के बहुत छोटे टुकड़े न करें।
बुवाई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त आलू का चुनाव करें।
कटे हुए आलू के टुकड़ों का बुवाई से पहले उचित उपचार जरूर करें।
क्या है फायदा?
एक बड़े आलू से 4-5 बीज तैयार होने से कम मात्रा में बीज खरीदकर अधिक क्षेत्र में बुवाई की जा सकती है। हालांकि, बीज की वास्तविक बचत आलू के आकार और टुकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।
एक हेक्टेयर में कितना बीज लगेगा?
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, आलू की खेती के लिए एक हेक्टेयर खेत में करीब 25 से 30 क्विंटल बीज की जरूरत होती है। हालांकि, यह मात्रा आलू के आकार और बुवाई के तरीके के अनुसार कम-ज्यादा हो सकती है।
आलू की बुवाई के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी?
आलू की अच्छी पैदावार के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना जरूरी है।
खेत तैयार करते समय ध्यान रखें
रोटावेटर से खेत की अच्छी तरह जुताई करें।
मिट्टी को भुरभुरी बनाएं, ताकि आलू के अंकुर आसानी से निकल सकें।
खेत में बुवाई के समय पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।
आलू की बुवाई करते समय कितनी दूरी रखें?
आलू की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए बुवाई उचित दूरी पर करें। एक कतार से दूसरी कतार के बीच 50-60 सेंटीमीटर और एक आलू के टुकड़े से दूसरे के बीच करीब 15 सेंटीमीटर की दूरी रखें। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलेगी और खेत में निराई-गुड़ाई जैसे काम करने में भी आसानी होगी।
आलू की पहली सिंचाई कब करें?
आलू की बुवाई के तुरंत बाद ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके त्रिपाठी के मुताबिक, बुवाई के करीब 10 से 12 दिन बाद अंकुरण होने पर हल्की सिंचाई कर सकते हैं।
सिंचाई में रखें ये सावधानियां
खेत में जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें।
खेत में पानी जमा न होने दें।
जलभराव से कटे हुए आलू के टुकड़ों के सड़ने का खतरा रहता है।
कटे हुए आलू के बीज का उपचार क्यों जरूरी?
आलू को काटने के बाद उसके अंदर का हिस्सा खुल जाता है। ऐसे में मिट्टी में लगाने से पहले कटे हुए टुकड़ों का उचित उपचार करना जरूरी है। इससे कटे हिस्से में सड़न और रोग लगने का खतरा कम करने में मदद मिलती है। बिना उपचार किए कटे हुए आलू की बुवाई करने से बचें। उपचार के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशक और उसकी निर्धारित मात्रा का ही इस्तेमाल करें।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
देर से आलू की बुवाई करते समय केवल बीज की मात्रा कम करने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ और रोगमुक्त बीज का चुनाव, कटे हुए टुकड़ों का उपचार, खेत में सही नमी और उचित दूरी पर बुवाई भी जरूरी है। साथ ही, देर से बुवाई के लिए उपयुक्त किस्म का चुनाव स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह से करें। इससे फसल के बेहतर अंकुरण और उत्पादन की संभावना बढ़ सकती है।
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