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Seedless Parwal Special Variety That Increases Farmers Income Demand Increases From Bihar To Up And Bengal
बिना बीज वाला परवल : किसानों की कमाई बढ़ाने वाली खास किस्म, बिहार से यूपी-बंगाल तक बढ़ी मांग
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 04 Nov 2026 04:10 PM IST
सार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने परवल की खास सीडलेस किस्म विकसित की है। छोटे और मुलायम बीज वाले इस परवल की बिहार, यूपी, झारखंड और बंगाल में मांग बढ़ रही है। जानें इसकी खासियत और किसानों को होने वाले फायदे।
परवल खाना पसंद है, लेकिन उसके सख्त बीज निकालने से परेशान रहते हैं? बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने किसानों के लिए परवल की एक ऐसी खास किस्म विकसित की है, जिसके बीज बेहद छोटे और मुलायम होते हैं। कुछ फलों में बीज बिल्कुल नहीं होते, जबकि कुछ में इतने नरम बीज होते हैं कि खाते समय महसूस भी नहीं होते। इसी वजह से इसे ‘सीडलेस’ यानी बिना बीज वाला परवल कहा जा रहा है।
इस किस्म की मांग बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी बढ़ रही है। इसकी खासियत सिर्फ मुलायम बीज ही नहीं, बल्कि बेहतर दिखावट और सामान्य परवल के मुकाबले अधिक समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता भी है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है।
पांच साल से अधिक समय में तैयार हुई किस्म
बिहार कृषि विश्वविद्यालय किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सब्जियों और दूसरी फसलों की नई किस्मों पर शोध कर रहा है। इसी प्रयास के तहत वैज्ञानिकों ने इस खास परवल को विकसित किया है।विश्वविद्यालय के डॉ. डी.आर. सिंह के मुताबिक, इस किस्म को विकसित करने में पांच साल से अधिक का समय लगा है। अब बिहार के कई जिलों के किसान इसकी खेती कर रहे हैं। धीरे-धीरे दूसरे राज्यों में भी इसकी खेती का दायरा बढ़ रहा है।
पूरी तरह बीजरहित नहीं है परवल
इस परवल को पूरी तरह बीजरहित कहना सही नहीं होगा। सामान्य परवल की तुलना में इसके बीज बहुत छोटे और मुलायम होते हैं। कुछ फलों में बीज नहीं भी मिलते हैं। खाने के दौरान इसके बीज महसूस नहीं होते, इसलिए इसे सीडलेस परवल के नाम से पहचान मिली है।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह किस्म?
इस परवल की कुछ खास खूबियां इसे किसानों और कारोबारियों के लिए उपयोगी बनाती हैं।
मुलायम बीज : इसके बीज छोटे और नरम होते हैं, जिससे ग्राहकों को खाने में आसानी होती है।
आकर्षक दिखावट : फल हरे, लंबे और देखने में सुंदर होते हैं।
ज्यादा समय तक सुरक्षित : सामान्य परवल की तुलना में इसकी भंडारण क्षमता बेहतर बताई गई है। इससे जल्दी खराब होने का खतरा कम हो सकता है।
बाजार में मांग : बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी इसकी मांग बढ़ रही है।
बेहतर कीमत की संभावना : इसकी खास खूबियों के कारण व्यापारियों को बाजार में इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिसका फायदा किसानों को हो सकता है।
किन राज्यों में हो रही है खेती?
फिलहाल बिहार के कई जिलों में किसान इस किस्म की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी इसका उत्पादन बढ़ रहा है। पड़ोसी राज्यों में बढ़ती मांग से किसानों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं।
खेती शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी इस खास परवल की खेती करना चाहते हैं तो कुछ जरूरी जानकारियां पहले जुटा लें।
बीज या पौधे की उपलब्धता : बिहार कृषि विश्वविद्यालय या संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र से इस किस्म की उपलब्धता की जानकारी लें।
खेती की तकनीक : इसकी बुवाई, पौधों के बीच दूरी, खाद-पानी और सहारे की व्यवस्था के बारे में विशेषज्ञों से सलाह लें।
बाजार की जानकारी : खेती शुरू करने से पहले स्थानीय मंडी और व्यापारियों से इसकी मांग और संभावित कीमत पता करें।
भंडारण और बिक्री : इसकी बेहतर भंडारण क्षमता का लाभ उठाने के लिए तुड़ाई, छंटाई और रखरखाव की सही जानकारी लें।
छोटे स्तर से शुरुआत : पहली बार खेती करने वाले किसान सीमित क्षेत्र में इसका उत्पादन करके बाजार की प्रतिक्रिया समझ सकते हैं।
मुलायम बीज, आकर्षक फल और बेहतर भंडारण क्षमता वाली यह परवल किस्म किसानों के लिए कमाई का नया विकल्प बन सकती है। हालांकि, खेती से पहले इसकी उपज, लागत, बीज की उपलब्धता और स्थानीय बाजार में मिलने वाली कीमत की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
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