इस रबी सरसों की बुवाई की तैयारी में जुटे किसानों को कृषि विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तरीका अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, 25 अक्तूबर तक का समय बुवाई के लिए अच्छा है। किसान सही समय पर बुवाई और नई विधियों से खेती की लागत कम और मुनाफा बढ़ा सकते हैं। बुवाई की सही समय स्थानीय मौसम, खेत की नमी और बीज की किस्म पर काफी निर्भर करता है।
खेत की तैयारी, अच्छी उपज का आधार
बुवाई से पहले खेती की तैयारी अच्छी उपज के लिए काफी अहम है। ऐसे में किसानों को सबसे पहले खेत को जोतकर मिट्टी को भुरभुरा और समतल करना चाहिए। समतल खेत में सिचाई का जल एक समान रूप से हर हिस्से में पहुंच सकता है। बुवाई से पहले मिट्टी में नमी की उपलब्धता तय करें। नमी कम होने पर बीजों के अंकुरण पर खराब असर पड़ सकता है, जिससे पौधों की संख्या में गिरावट आ सकती है। बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं और केवल अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करें।
नागौर जिले के लिए इन किस्मों का सुझाव
आपको अपने इलाके की जलवायु को ध्यान में रखकर बीजों का चयन करना चाहिए। नागौर के लिए कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह ने किसानों को आरएच-749, गिरिराज और आरजीएन-73 जैसी किस्में के चुनाव का सुझाव दिया है। पानी की कम उपलब्धता वाले इलाकों के लिए आरजीएन-298 किस्म को सबसे उपयुक्त बताया गया है।
सही किस्म के चुनाव का तरीका
विशेषज्ञ के अनुसार, किसी भी किस्म को चुनने से पहले उसकी क्षेत्रीय अनुकूलता, पकने की अवधि, पानी की आवश्यकता और रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही बीज का पैकेट खरीदते समय उस पर दी गई सभी जानकारियों को ध्यान से पढ़ना भी जरूरी है।
बुवाई का सही तरीका
फसल के बेहतर विकास के लिए बीजों की बुवाई में दूरी काफी अहम है। उन्नत किसान अर्जुन चौधरी कहते हैं कि सरसों की बुवाई करते समय कतार से कतार के बीच की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर रखी जानी चाहिए। बीज को केवल दो से तीन सेंटीमीटर की गहराई में ही बोना चाहिए।
ज्यादा गहराई में बुवाई से बचें, कतार में बुवाई के फायदे
किसान के अनुसार, अधिक गहराई में बुवाई से बीज का अंकुरण रुक जाता है। कतार में बुवाई करने का फायदा यह है कि इससे पौधों की संख्या नियंत्रित रहती है और बाद में निराई-गुड़ाई करने में आसानी होती है। इसके अतिरिक्त, जब फसल में फूल आ रहे हों और फलियां बन रही हों, तब खेत में नमी बनाए रखना अनिवार्य है। संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरक का प्रबंधन करने से पौधों का विकास काफी बेहतर होता है।