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Crystal Crop S Hybrid Marigold Puts India On The Global Flower Map Orchids Next
फ्लोरीकल्चर : भारत के खेतों में थाईलैंड से आने वाला टेनिस की गेंद जैसा गेंदा फूल, जिसने बदली किसानों की किस्मत
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:47 PM IST
सार
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन ने भारत में गेंदे की शुरुआती हाइब्रिड किस्मों में से एक 'विजेता' विकसित की है, जो अब कंपनी के बीज कारोबार की सबसे ज़्यादा कमाई वाली किस्म बन गई है। इसकी सफलता देखकर विदेशी कंपनियां भी भारत आकर इस फूल का उत्पादन और निर्यात करने लगी हैं। अब कंपनी स्थानीय जर्मप्लाज़्म से देसी ऑर्किड हाइब्रिड भी बना रही है, जो आयातित फूलों से सस्ते होंगे।
भारत में गेंदे की हाइब्रिड किस्म विकसित करने की शुरुआती कोशिशों में से एक ने ऐसा रंग जमाया है कि दुनिया की कंपनियां अब भारत आकर इस फूल का निर्यात करने लगी हैं। यह पहल क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड (सीसीपीएल) की थी, जो कुछ साल पहले हुई। सीसीपीएल का दावा है कि इसकी 'विजेता' हाइब्रिड के बीज कंपनी के बीज कारोबार में सबसे ज्यादा कमाई कराने वाले उत्पाद बनकर उभरे हैं।
सीसीपीएल के वेजिटेबल एंड फ्लावर सीड्स के बिजनेस हेड अनुराग बाजपेयी बताते हैं कि इसकी मांग दो-तीन वजहों से है। यह कुछ जगहों पर गुलदाउदी की जगह लेने लगा है, क्योंकि यह ज्यादा समय तक टिकता है। बढ़ती धार्मिक गतिविधियों ने भी इस हाइब्रिड को लोकप्रिय बनाया है।
वर्ष 2012 में शुरुआत, 2014 में सफलता
कंपनी की वेजिटेबल एंड फ्लावर्स डिवीज़न के आरएंडडी प्रमुख रामामोहन जी. के मुताबिक गेंदे की हाइब्रिड बनाने में सीसीपीएल सबसे पहले उतरी और आज इस पौधे के शोध में अग्रणी है। शोध 2012 में शुरू हुआ और 2014 में कामयाबी मिली। इसमें शुद्ध वंशक्रम (प्योर लाइन) के मार्करों का इस्तेमाल किया गया और नई किस्म डबल्ड हैप्लॉइड प्रणाली से पराग के जरिये तैयार हुई। पहले ऐसा नारंगी गेंदा थाईलैंड से आयात होता था।
टेनिस की गेंद जैसा, दबाने पर भी पुराना आकार
इस फूल की खासियत है इसका टेनिस की गेंद जैसा गोल आकार। इसे जोर से दबाने पर भी यह अपने रूप में लौट आता है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों तक भेजते समय टूट-फूट की चिंता नहीं रहती। इसे कोल्ड स्टोरेज में 20 से 25 दिन तक रखा जा सकता है। इसके तने मज़बूत हैं, इसलिए चार फ़ीट से ऊंचा होने पर भी पौधा गिरता नहीं।
त्योहारों में बढ़ती कमाई
हर दूसरे महीने कोई धार्मिक आयोजन या शादी-ब्याह का मौसम होता है, इसलिए किसान अपनी गेंदे की फ़सल इस हिसाब से लगाते हैं कि ज़्यादा कमाई हो। बायोटेक प्रमुख पुरुषोत्तमा एम.जी. के अनुसार दिवाली के आसपास भाव आमतौर पर 60 रुपये और कभी-कभी 100 रुपये प्रति किलो तक चढ़ जाते हैं, जबकि किसानों को सामान्यतः 50 से 60 रुपये मिलते हैं।
कर्नाटक में कोलार के पास कजिकलहल्ली गांव के किसान के.एन. चंद्रशेखरन 'विजेता' की खेती करते हैं, क्योंकि इसकी उपज अच्छी है। उनका कहना है कि त्योहारों में उनकी कमाई 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। पहले वे गुलदाउदी उगाते थे, जो हल्का फूल है, जबकि गेंदा भारी होता है और अच्छा मुनाफ़ा देता है। पास के गांव के एक और किसान पिल्लै गौड़ा इसके आकार, रूप और उपज की वजह से इसे उगाते हैं, जो 10 टन तक पहुंच जाती है।
जगह-जगह अलग इस्तेमाल
बाजपेयी के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में इस फूल का इस्तेमाल अलग तरह से होता है। उत्तर में पूजा-पाठ में पूरा फूल चढ़ाया जाता है, जबकि दक्षिण में ख़ासकर तमिलनाडु में इसकी पंखुड़ियों से मालाएं बनाई जाती हैं। कंपनी अगले साल पीले रंग की एक और गेंदा हाइब्रिड बाज़ार में उतारेगी।
अब ऑर्किड की बारी
पुरुषोत्तमा के अनुसार, क्रिस्टल क्रॉप ऑर्किड की हाइब्रिड भी विकसित कर रही है, जो देश में अपनी तरह की पहली कोशिश है। उनके मुताबिक देसी हाइब्रिड का मतलब है कि लोगों को यह आयातित फूलों से सस्ता मिलेगा। भारत हर साल करीब 30 करोड़ रुपये के ऑर्किड आयात करता है, जबकि देसी ऑर्किड 400 रुपये से कम में मिलेगा।
रामामोहन बताते हैं कि थाईलैंड बड़ी मात्रा में ऑर्किड निर्यात करता है और हर साल नई हाइब्रिड किस्में उतारता है। सीसीपीएल ने स्थानीय जर्मप्लाज़्म से टिश्यू कल्चर के ज़रिये ऑर्किड तैयार किए हैं, जो शत-प्रतिशत भारतीय हाइब्रिड हैं। बाजपेयी कहते हैं कि कंपनी ऑर्किड में पहले कदम का फ़ायदा उठाना चाहती है और उसके पास कई किस्में तैयार होने की कतार में हैं।
बीज से बाग तक की योजना
बीज विकसित करने के बाद कंपनी उन्हें स्वतंत्र प्रजनकों को देती है, जो पौधे तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। आगे कंपनी ऑर्किड, चमेली और गुलाब के बीज बनाने की भी योजना बना रही है, जिससे इन बागवानी पौधों की खेती करने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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