आज, 20 अक्तूबर से भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू हो गया है। इस समझौते के तहत भारत के कृषि और प्रोसेस्ड उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। खास बात यह है कि समझौता लागू होने के पहले दिन से ही न्यूजीलैंड अपने बाजार में भारत से आने वाले सभी उत्पादों को शुल्क मुक्त पहुंच देगा।
भारतीय फल से सब्जियों तक को मिलेगा शुल्क मुक्त बाजार
जानकारी के अनुसार, भारतीय उत्पादों पर न्यूजीलैंड पहले शून्य से 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाता था। लेकिन, इस समझौते के माध्यम से ताजे फल, सब्जियां, बागवानी उत्पाद, कॉफी, चार, कोको, मसाले और अनाज पर लगने वाला 5 प्रतिशत शुल्क खत्म हो गया है।
प्रोसेस्ड उत्पादों को भी मिलेगा फायदा
समझौते के तहत भारत के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर भी न्यूजीलैंड कोई शुल्क नहीं लागू करेगा। इन उत्पादों में अचार, संरक्षित और जमी हुई सब्जियां, जैम, तुरंत खाने के लिए तैयार फूड, बिस्कुट, खाने के तेल और पशु चारा शामिल है।
भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धा करने में मिलेगी मदद
किसी भी देश में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से विपणन काफी आसान हो जाता है, क्योंकि उसी बाजार में दूसरे देशों के उत्पाद शुल्क देकर पहंचते हैं, जिससे उनकी कीमत बढ़ जाती है। इस तरह शुल्क मुक्त निर्यात की सुविधा उठाने वाले देशों को आयातक देश में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में काफी आसानी होती है।
हर साल 6.1 बिलियन डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदता है न्यूजीलैंड
आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में भारत ने न्यूजीलैंड को 108.21 मिलियन डॉलर का कृषि निर्यात किया। हालांकि न्यूजीलैंड हर साल विदेश से 6.1 बिलियन डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में भारतीय किसानों और खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग के लिए न्यूजीलैंड में निर्यात बढ़ाने की काफी जगह है।
समुद्री उत्पादों पर भी शुल्क खत्म, कार्गो क्लीयरेंस में तेजी का लक्ष्य
समुद्री उत्पादों पर लगने वाला 5% तक का शुल्क भी अब खत्म कर दिया गया है। समझौते के तहत बासमती चावल, अलसी के बीज, ईसबगोल की भूसी और ऑर्गेनिक काली चाय जैसे जैविक उत्पादों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। किसानों के जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए 24 घंटे के भीतर और अन्य सामानों के लिए 48 घंटे में कार्गो क्लीयरेंस का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और जांच की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
सेब, कीवी और शहद के लिए विशेष साझेदारी
आयात शुल्क कम करने के अलावा, दोनों देशों ने कृषि उत्पादकता साझेदारी पर भी सहमति जताई है। इसके तहत सेब, कीवी और शहद की पैदावार और गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष कार्य योजनाएं (एक्शन प्लान) बनाई गई हैं, ताकि किसानों की आय बढ़ सके। बागान प्रबंधन, कटाई के बाद के रख-रखाव और टिकाऊ मधुमक्खी पालन के लिए 'उत्कृष्टता केंद्र' (Centres of Excellence) खोले जाएंगे। साथ ही, अधिक पैदावार देने वाली और कम लागत वाली किस्मों की तकनीक साझा की जाएगी।
भारत ने 29.97% उत्पादों पर शुल्क छूट नहीं दी
इस समझौते के तहत भारत ने संवेदनशील 29.97 प्रतिशत उत्पादों पर न्यूजीलैंड को शुल्क मुक्त निर्यात की सुविधा नहीं दी है। इनमें डेयरी उत्पाद, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी, शहद और वनस्पति तेल जैसे उत्पाद शामिल हैं।
न्यूजीलैंड के सेब और कीवी उत्पादकों को सीमित राहत
दूसरी तरफ समझौते के तहत न्यूजीलैंड से आने वाले सेबों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगेगा। हालांकि सेब के लिए कोटा तय किया गया है, जिसके तहत पहले साल न्यूजीलैंड अधिकतम 32,500 टन सेब भारत भेज सकता है, जो छठे साल तक बढ़कर 45 हजार टन होगा। वहीं, न्यूजीलैंड की कीवी को भारतीय बाजार में एक सीमा तक शुल्क मुक्त पहुंच दी गई है। हालांकि इस पर टैरिफ-रेट कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य तय किया है।
भारत में कृषि तकनीक समेत कई क्षेत्रों में निवेश करेगा भारत
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत के कृषि तकनीक, विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अतिरिक्त, 5,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड में तीन साल तक के काम के अवसर मिलेंगे।
साल 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.3 बिलियन डॉलर था। इस नए समझौते से व्यापार के बढ़ने की पूरी संभावना है। हालांकि, कृषि क्षेत्र में इस समझौते का पूरा फायदा उठाने के लिए भारतीय किसानों और निर्यातकों को न्यूजीलैंड की खाद्य-सुरक्षा, गुणवत्ता और नियामकीय मानकों को पूरा करना होगा।