तमिलनाडु: मेट्टूर बांध में घटते जलस्तर से खतरे में सांबा धान की फसल, PMK ने किसानों के लिए मांगा ₹25000 मुआवजा
गांव जंक्शन डेस्क, चेन्नई
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 22 Sep 2026 01:58 PM IST
सार
कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी का पानी छोड़ने में कमी के चलते मेट्टूर बांध का जलस्तर तेजी से घटकर 84 फीट (कुल क्षमता 120 फीट) पर आ गया है। PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा भंडार सिर्फ 35 दिन तक सिंचाई कर सकता है, जिससे सांबा धान की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से प्रभावित किसानों को 25,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और अन्य राहत उपायों की मांग की है।
राज्यसभा सांसद अंबुमणि रामदास ने कहा है कि मेट्टूर बांध का जल भंडार सिर्फ 35 दिनों तक सिंचाई के लिए पर्याप्त है।
- फोटो : Ai
कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी का पानी छोड़ने में "कमी" किए जाने से मेट्टूर बांध के जलस्तर में आई तेज गिरावट पर गहरी चिंता जताते हुए PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार से किसानों की आजीविका बचाने के लिए सीधे राहत पैकेज देने की मांग की। पार्टी के एक बयान में अंबुमणि ने दावा किया कि कर्नाटक के जलाशयों से पानी छोड़ने में भारी कमी के बाद मेट्टूर बांध में पानी का प्रवाह घटकर 2,281 क्यूसेक रह गया है।
राज्यसभा सांसद ने बताया, "इसके नतीजे में बांध का जलस्तर 84 फीट (अधिकतम 120 फीट) तक गिर गया है, और कुल भंडारण घटकर 46 TMC यानी इसकी 93.47 TMC की पूर्ण क्षमता का सिर्फ 49.21% रह गया है।"
सिर्फ 35 दिन का बचा भंडार, सांबा खेती पर संकट
राज्यसभा सांसद ने कहा है कि मेट्टूर बांध का जल भंडार सिर्फ 35 दिनों तक सिंचाई के लिए पर्याप्त है, जिससे आगामी सांबा धान की खेती को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि क्या औसत उत्तर-पूर्वी मानसून (अक्टूबर-दिसंबर) भी इस स्थिति से निपटने में मदद कर पाएगा। अंबुमणि के मुताबिक, कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, कर्नाटक को 22 सितंबर तक तमिलनाडु को 113.33 TMC पानी छोड़ना चाहिए था, लेकिन अब तक सिर्फ 43 TMC पानी ही दिया गया है, जिससे 70 TMC की कमी बनी हुई है।
आगे पानी पूरी तरह बंद होने की आशंका
उन्होंने कहा, "कर्नाटक के जलाशयों में फिलहाल सिर्फ 60 TMC पानी बचा है, जिसमें से केवल 37 TMC ही इस्तेमाल लायक है, और कुल प्रवाह घटकर 6,695 क्यूसेक रह गया है जबकि बहिर्वाह 14,000 क्यूसेक है — ऐसे में आने वाले दिनों में तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने पर पूरी तरह रोक लगने का खतरा बना हुआ है।"
40% कावेरी डेल्टा भूमि रह सकती है बंजर
अंबुमणि ने दावा किया कि पानी की गंभीर कमी के चलते कावेरी डेल्टा की करीब 40% भूमि पर खेती नहीं हो पाएगी। उनके मुताबिक, इन इलाकों के किसान पहले ही कुरुवई फसल का सीजन गंवा चुके हैं, और अब उन्हें अपनी सालाना आजीविका के पूरी तरह चौपट होने का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों के लिए क्या-क्या मांगें रखीं
इस चुनौती से निपटने के लिए अंबुमणि ने तमिलनाडु सरकार से कई मांगें रखीं:
पानी की कमी के चलते सांबा या थलाडी फसल न बो पाने वाले प्रभावित किसानों को 25,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाए
सांबा खेती में शामिल सभी किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ की विशेष इनपुट सहायता दी जाए
भूजल सिंचाई पर निर्भर बची हुई 60% भूमि के लिए फरवरी 2027 तक निर्बाध 3-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
सीधी बुआई तकनीक पर सलाह देने की मांग
उन्होंने राज्य सरकार से यह भी अपील की कि वह सीधी बुआई (direct seeding) तकनीक को लेकर स्पष्ट सलाह जारी करे, क्योंकि मानसून से पहले सितंबर के अंत में रोपाई के लिए नर्सरी तैयार करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है। साथ ही उन्होंने बीज, उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की।
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