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मध्य प्रदेश : कम पानी वाली दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए 2,442 करोड़ रुपये की पंचवर्षीय योजना तैयार

गांव जंक्शन डेस्क, भोपाल Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 08 Oct 2026 03:38 PM IST
सार

पानी की अधिक खपत वाली धान-गेहूं की खेती से हटकर मध्य प्रदेश अब चना, मसूर, अरहर और उड़द की ओर बढ़ रहा है। पांच वर्षों की 2,442 करोड़ रुपये की कार्य योजना न केवल उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि दाल मिलों और प्रसंस्करण उद्योग के जरिये गांवों में रोजगार के नए द्वार भी खोलेगी।
 

दलहन
दलहन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश सरकार ने धान और गेहूं जैसी अधिक पानी खपत वाली फसलों की जगह चना, मसूर, अरहर और उड़द जैसी कम पानी वाली दलहनी फसलों को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके लिए दलहन मिशन के अंतर्गत पांच वर्ष की 2,442 करोड़ रुपये की वृहद कार्य योजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना नहीं, प्रसंस्करण उद्योग को प्रोत्साहित करना भी है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनें।

मिशन के तहत राज्य भर में 55 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक मिल के लिए भारत सरकार से 25 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा।

देश की दाल-टोकरी, फिर भी आयात की मजबूरी
दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और कुल उत्पादन में 28 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। विडंबना यह है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक होने के बावजूद लगभग 60 प्रतिशत दलहन विदेशों से मंगाता है। देश को इस क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार ने 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से दलहन मिशन लागू किया है।

मध्य प्रदेश में दलहनी फसलों के विस्तार की संभावनाएं अधिक हैं, इसलिए इस राष्ट्रीय मिशन में राज्य की बड़ी भूमिका तय की गई है।

किसान के लिए बीज, खरीद और भरोसा
पंचवर्षीय योजना में तुअर, उड़द और मसूर के क्षेत्र विस्तार पर विशेष ध्यान रहेगा। उत्पादन बढ़ाने के लिए जलवायु अनुकूल बीजों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी और उपज के भंडारण व प्रबंधन में आधुनिक प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग होगा।

अक्सर उपज का उचित मूल्य न मिलने की आशंका के कारण किसान दलहन बोने से कतराते हैं। इसके समाधान के लिए पीएम-आशा (प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान) के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना के मानदंडों के अनुसार नेफेड और एनसीसीएफ किसानों से तुअर, उड़द और मसूर खरीदेंगे। कोई सहकारी समिति खाद्य प्रसंस्करण करना चाहे, तो उसे कृषि अधोसंरचना निधि से आर्थिक सहायता दी जाएगी।

आंकड़ों में मध्य प्रदेश की ताकत
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है।
  • खाद्यान्न: 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान, राष्ट्रीय उत्पादन का 13.04 प्रतिशत।
  • दलहन: 52 लाख 40 हजार टन उत्पादन के साथ पहला स्थान, देश के कुल उत्पादन का 20.40 प्रतिशत।
  • तिलहन: 82 लाख 50 हजार टन उत्पादन के साथ दूसरा स्थान, राष्ट्रीय हिस्सेदारी लगभग 19.19 प्रतिशत।
  • सोयाबीन: देश का लगभग 35.27 प्रतिशत उत्पादन।

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