रबी फसलों की बुवाई का समय नजदीक है। खरीफ की तरह केंद्र सरकार ने खेत बचाओ अभियान के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। किसान मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद का उपयोग कर खेती की लागत को कम कर सकते हैं। वहीं, मिट्टी की सेहत के लिए भी खाद इस्तेमाल का यह तरीका काफी फायदेमंद होता है।
संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए किसानों को सबसे पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है। ऐसे में आपकों जांच के लिए मिट्टी का नमूना लेने का सही तरीका पता होना चाहिए।
खेत का चुनाव और नमूना लेने का सही तरीका
नमूना लेते समय खेत को मिट्टी के अलग रंग-असमान फसल विकास के आधार पर अलग-अलग हिस्सों में बांट लें। अब नमूना लेने से पहले घास-फूव हटा दें। सही जांच के लिए किसी एक जगह के बजाय कम से कम 8 से 20 अलग-अलग जगहों से नमूना लेने की सलाह दी जाती है।
जमीन में 9 इंच गहरी V आकार का गड्ढा खोदें, फिर गड्ढे की एक सतह से एक इंच मोटी मिट्टी की परत काट लें। यह तरीका 8 से 20 अलग-अलग जगहों पर लागू करें। इसके बाद मिट्टी को एक साफ बाल्टी में इकट्ठा कर लें। अगर खेत में फसल खड़ी है और बुवाई कतारों में हुई है, तो कतारों के बीच से नमूना लें।
जांच के लिए ऐसे तैयार करें आधा किलो मिट्टी
अब इकट्ठा की गई मिट्टी को अच्छी तरह मिला लें। अब जमीन पर फैलाकर इसे चार हिस्सों में बांट लें। आमने-सामने के दो हिस्सों की मिट्टी को रख लें और बाकी दो हिस्सों को हटा दें। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक कि कुल मिट्टी का वजन लगभग आधा किलो न रह जाए।
इस आधा किलो मिट्टी को एक साफ थैली में भर लें। इसके बाद मोटे कागज के दो टुकड़ों पर किसान का नाम, खेत की पहचान या संख्या, पूरा पता, जमीन सिंचित है या असिंचित, जिस फसल के लिए खाद की सिफारिश चाहिए उसका नाम और कोई दूसरी समस्या लिख लें। इनमें से एक पर्ची को थैली के अंदर डाल दें और दूसरी पर्ची को धागे से थैली के मुंह पर अच्छी तरह बांध दें।
बाग लगाने वाले किसानों के लिए मिट्टी जांच के नियम
जो किसान खेतों में बागवानी करना चाहते हैं या बाग लगाना चाहते हैं, उनके लिए नमूना लेने का तरीका थोड़ा अलग है। ऐसे किसानों को गड्ढा खोदकर अलग-अलग गहराई से मिट्टी लेनी चाहिए। पहली परत ऊपरी सतह से 30 सेंटीमीटर तक, दूसरी 30 से 60 सेंटीमीटर, तीसरी 60 से 100 सेंटीमीटर और चौथी परत 100 से 150 सेंटीमीटर की गहराई से लेनी चाहिए। खुदाई के दौरान अगर कोई कठोर सतह या कंकड़ वाली जगह मिले, तो उसकी गहराई और मोटाई को लिखकर उसका नमूना अलग से लेना चाहिए।