इस रबी सीजन गेहूं की बायोफोर्टिफाइड किस्म उगाकर किसान बेहतर भाव और देश की पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। हम IARI, इंदौर द्वारा विकसित एचआई 8849 किस्म की बात कर रहे हैं, जो दूसरी किस्मों के मुकाबले बेहतर पोषण देती है। इस किस्म के माध्यम से किसान प्रति हेक्टेयर 51.9 क्विंटल उपज की उम्मीद कर सकते हैं।
इन राज्यों के लिए किस्म उपयुक्त, तापमान सहने की खूबी
जानकारी के अनुसार, एचआई 8849 किस्म कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गोवा जैसे प्रायद्वीपीय क्षेत्र में आने वाले राज्यों के लिए उपयुक्त है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में गेहूं की फसल को अधिक तापमान नुकसान पहुंचा सकता है। एचआई 8849 किस्म के पौधे मध्यम स्तर तक तापमान को सहने की क्षमता रखते हैं। समय पर बुवाई और सिंचाई की सुविधा रखने वाले किसानों के लिए यह किस्म फायदे का सौदा साबित हो सकती है।
बाजार में मिल सकता है ज्यादा भाव
एचआई 8849 किस्म के गेहूं में पोषक तत्वों की मात्रा काफी अधिक होती है, जिसके चलते बाजार में किसानों को बेहतर भाव मिल सकता है। जानकारी के अनुसार, इस किस्म के गेहूं में 10.9 प्रतिशत प्रोटीन होता है। यह किस्म जिंक और आयरन से भरपूर है। आंकड़ों के अनुसार इसमें 41.1 पीपीएम आयरन तथा 39.1 से 41.1 पीपीएम तक जिंक पाया जाता है।
पोषण सुरक्षा और किसानों की आमदनी में सुधार
जानकारों के अनुसार, पोषक तत्वों से भरपूर होने और अधिक उपज देने के कारण यह किस्म किसानों की आय सुधारने में मदद करती है। साथ ही, जिंक और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर इस बायोफोर्टिफाइड गेहूँ के उत्पादन से देश में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में भी बड़ा योगदान मिलेगा।