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Home› Kheti Kisani› Do These Five Things Before Sowing Wheat Chance To Get Better Yield At Less Cost

Wheat Sowing: गेहूं की बुवाई से पहले कर लें ये 5 काम, कम खर्च में बेहतर पैदावार पाने का मौका

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 11 Oct 2026 06:38 PM IST
सार

  • गेहूं की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराएं और रिपोर्ट के अनुसार खाद डालें।

  • एक एकड़ खेत में 4 से 5 जगहों से मिट्टी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजें।

  • डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222 और एचडी 2967 जैसी किस्मों का चुनाव क्षेत्र के हिसाब से करें।

  • उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में समय पर गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर सामान्यतः उपयुक्त है।

गेहूं की खेती
गेहूं की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रबी सीजन में गेहूं की अच्छी पैदावार पाने के लिए किसानों को बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच करानी चाहिए। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, सही बीज का चुनाव, संतुलित खाद और वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने से खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, सुपर सीडर और जीरो टिल मशीन से बुवाई करने पर बार-बार जुताई का खर्च भी बचाया जा सकता है।

रबी सीजन को देखते हुए किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। इस दौरान सही समय पर बुवाई और उन्नत किस्मों के बीज का चुनाव करना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करें।

बुवाई से पहले ऐसे लें मिट्टी का नमूना
गेहूं की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराने से उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिलती है। इससे फसल की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी का नमूना लेने के लिए एक एकड़ खेत में 4 से 5 अलग-अलग जगहों से करीब 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई तक मिट्टी लें। सभी नमूनों को अच्छी तरह मिलाकर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला या कृषि विज्ञान केंद्र में जांच के लिए भेजें। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खाद और उर्वरकों की मात्रा तय करें।

खेत में फसल अवशेष न जलाएं
अगर खेत में पिछली फसल के अवशेष बचे हैं, तो उन्हें जलाने के बजाय सड़ाकर मिट्टी में मिलाएं। इसके लिए पूसा डीकंपोजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे फसल अवशेषों का प्रबंधन करने में मदद मिलती है।

किसान सुपर सीडर या जीरो टिल मशीन की मदद से भी गेहूं की बुवाई कर सकते हैं। इन मशीनों से बार-बार जुताई करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे समय और डीजल की बचत होती है। फसल अवशेषों वाले खेतों में मशीन का चुनाव खेत की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार करना चाहिए।

गेहूं की इन उन्नत किस्मों का करें चुनाव
अच्छी पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज का चुनाव जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं की डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222 और एचडी 2967 जैसी किस्मों का उल्लेख किया है। हालांकि, किस्म चुनते समय अपने क्षेत्र की जलवायु, बुवाई का समय, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय की सलाह को ध्यान में रखें।

बीज हमेशा प्रमाणित स्रोत से खरीदें और उसकी गुणवत्ता की जांच करें। उन्नत किस्म का बीज इस्तेमाल करने से पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन वास्तविक उत्पादन मौसम, मिट्टी, सिंचाई और फसल प्रबंधन पर भी निर्भर करता है।

गेहूं की बुवाई का सही समय और तरीका
गेहूं की समय पर बुवाई करना अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सिंचित गेहूं की समय पर बुवाई के लिए नवंबर का महीना सामान्यतः उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, सही समय स्थानीय मौसम और फसल चक्र के अनुसार तय करना चाहिए।

बुवाई के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
  • कतार से कतार की दूरी : सामान्य स्थिति में करीब 20 से 22.5 सेंटीमीटर रखें।
  • बीज की गहराई : बीज को लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं।
  • मिट्टी में नमी : बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
  • बीज की मात्रा : किस्म, बुवाई के समय और बुवाई की विधि के अनुसार सही मात्रा तय करें।
  • मशीन से बुवाई : सुपर सीडर या जीरो टिल मशीन का इस्तेमाल खेत की स्थिति के अनुसार करें।

वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर घट सकती है लागत
गेहूं की खेती में बार-बार जुताई, खाद का असंतुलित इस्तेमाल और खराब गुणवत्ता वाले बीज लागत बढ़ा सकते हैं। इसलिए किसान मिट्टी की जांच, प्रमाणित बीज और वैज्ञानिक बुवाई विधि अपनाएं। खेत की स्थिति के अनुसार आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करने से समय, डीजल और जुताई के खर्च में बचत हो सकती है।

किसानों को सलाह है कि बुवाई से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क कर लें। इससे उन्हें अपने इलाके के अनुकूल किस्म, बीज की मात्रा, खाद और बुवाई के सही समय की जानकारी मिल सकेगी।
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